Unique Temple: भारत के अलग-अलग राज्यों में कई ऐसे मंदिर हैं, जिनकी परंपरा भी काफी अजब-गजब है. जिसके बारे में जानकर कोई भी हैरान हो जाएंगे. झारखंड के सरायकेला में एक ऐसा मंदिर है, जहां घोड़े के पूजा की अनोखी परंपरा है. झारखंड के सरायकेला जिले के गम्हरिया प्रखंड में स्थित घोड़ा बाबा मंदिर है. खास बात ये है कि यहां भगवान की मूर्ति के बजाय ‘घोड़ा बाबा’ (Ghoda Baba Mandir) की पूजा की जाती है.
मान्यता है कि यहां जो मन्नत मांगी जाती है, तो वह पूरी हो जाती है. मन्नत पूरी होने पर घोड़ा बाबा को मिट्टी के घोड़े-हाथी चढ़ाए जाते हैं. यही बजह है कि मंदिर के बाहर बड़ी संख्या में मिट्टी के हाथी-घोड़े की मूर्ति बेची जाती है. वहीं, मंदिर के बाहर सैकड़ों मिट्टी के घोड़े कतार में देखने को मिलते हैं, जो लाखों भक्तों की मन्नत पूरा होने के गवाह हैं. यह परंपरा स्थानीय लोक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है
आपको बता दें कि ये मंदिर जमशेदपुर (Ghoda Baba Mandir) से 10 किमी दूरी है. यहां जनवरी में मकर संक्रांति के अगले दिन विशाल मेला लगता है. खास तौर पर भक्त इस दिन दूर-दराज से आकर अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए घोड़ा बाबा से प्रार्थना करते हैं. सबसे अजीब बात ये है कि मंदिर से मिलने वाला प्रसाद भक्त घर नहीं ले जा सकते हैं.
प्रसाद के तौर पर मिलने वाला केला और नारियल भक्त अपने घर नहीं ले जा सकते हैं. उन्हें प्रसाद को मंदिर परिसर में ही खाना करना होता है. इस दौरान मंदिर की पवित्रता का भी खास ध्यान रकना होता है. आपको बता दें कि पहले मंदिर में महिलाओं का प्रवेश वर्जित था. खास तौर पर कुम्भकार जाति इस मंदिर का संचालन करती है. इस जाति की महिलाओं का मंदिर में आज भी प्रवेश वर्जित है. हालांकि, अब मंदिर में 18 साल से कम आयु की बालिकाएं मंदिर में जा सकती है.
घोड़ा बाबा मंदिर को लेकर कहा जाता है कि लगभग 300 साल पहले भगवान कृष्ण और बलराम घोड़े (Ghoda Baba Mandir) पर सवार होकर इसी जगह आए थे. इस इलाके में मिट्टी की उर्वरता को देखकर बासुदेव के भाई दाऊ (बलराम) ने हल चलवाकर खेती की शुरुआत करवाई. कहा जाता है कि कुछ समय बाद वह चले गए, लेकिन उनके घोड़े यहीं रह गए. तब स्थानीय लोगों ने इन घोड़ों का पूजना प्रारंभ कर दिया. धीरे-धीरे ये पूजा परंपरा बन गई. लोग इन्हें घोड़ा बाबा के नाम से जानने लगे. ये मंदिर लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का केन्द्र है.
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-भारत एक्सप्रेस
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