ब्लॉग

उत्तर प्रदेश के आपराधिक कालखंड की सच्ची दास्तान: जानिए कैसे श्रीप्रकाश शुक्ला के ‘वर्चस्व’ का हुआ अंत

उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते समय मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के हाथ में एक पर्ची थमाई गई. पर्ची खोलकर वे मुस्कुराए और अध्यक्ष महोदय से क्षमा मांगते हुए बोले, ‘एक महत्वपूर्ण घोषणा करनी है…श्रीप्रकाश शुक्ला मारा गया.’

यह वाक्य सिर्फ एक अपराधी की मौत की सूचना नहीं था. यह उस युग के अंत की घोषणा थी, जब एक गैंगस्टर के नाम से पूरे पूर्वांचल और बिहार की राजनीति-प्रशासन की नींद उड़ जाती थी. राजेश पाण्डेय की पुस्तक (हिंदी में ‘वर्चस्व’ और अंग्रेजी में ‘Operation Bazooka’, कवर पर ‘हिटमैन’ के रूप में भी प्रस्तुत) ठीक इसी कालखंड की सच्ची दास्तान है.

श्रीप्रकाश शुक्ला: पांच वर्ष का आतंक

गोरखपुर का शूटर, बिहार के दबंग सूरजभान सिंह से जुड़ा, महज पांच वर्ष सक्रिय रहा, लेकिन उसकी दहशत इतनी थी कि लखनऊ के एसएसपी चार बार बदले गए. पहली बार भारत में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन उसी को पकड़ने या मारने के लिए हुआ. वीरेंद्र शाही की हत्या में एक सौ से अधिक गोलियां, पटना के सरकारी अस्पताल में बृज बिहारी प्रसाद की हत्या, रेलवे ठेकेदारी के लिए खून-खराबा, नेताओं-दबंगों की साझेदारी, जाति समीकरण, लखनऊ-पटना-काठमांडू का त्रिकोण-सब कुछ किताब में व्यवस्थित ढंग से आता है.

नब्बे के दशक का परिदृश्य भी जीवंत है. केबल टीवी का आना, सेलुलर फोन का अपराधियों द्वारा शुरुआती इस्तेमाल, फोन टेप की तकनीक का विकास, पुरुलिया एयरड्रॉप से आई एके-47 राइफलें जिन्होंने अपराध का पैमाना ही बदल दिया.

अंदरूनी नजर से लिखा गया खाका

लेखक राजेश पाण्डेय स्वयं उस STF टीम के संस्थापक सदस्यों में थे जिसने गठन के महज तीन महीने बाद गाजियाबाद के इंदिरापुरम में श्रीप्रकाश शुक्ला को घेरकर मार गिराया. इसलिए किताब में सिर्फ घटनाएं नहीं, बल्कि पुलिस की रणनीति, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस यूनिट का विकास, सूचना तंत्र और मुठभेड़ की बारीकियां भी हैं. शुक्ला की इकलौती उपलब्ध तस्वीर कैसे मिली, सुनील शेट्टी से जुड़े किस्से जैसे रोचक प्रसंग भाषा को और आकर्षक बनाते हैं.

भाषा पूरी तरह मंजी हुई साहित्यिक नहीं है. यह एक पुलिस अधिकारी की लेखनी है, लेकिन रोचकता बनाए रखने की कोशिश पूरी है. मिर्जापुर जैसी वेब सीरीज का अहसास बार-बार होता है: गुंडों की प्रेमिकाएं, वेश्याओं से संबंध, वर्चस्व की लड़ाइयां, नेताओं की सांठ-गांठ.

कुछ कमियां, लेकिन कुल मिलाकर पठनीय

कुछ जगह संवाद काल्पनिक लगते हैं. एक मंत्री से ‘कुंडली निकाल लानी होगी’ जैसे संवाद बेतुके हैं. छोटन शुक्ला को कहीं छुटकुन कह दिया गया है. छोटन की शवयात्रा में जिलाधिकारी कृष्णय्या की हत्या का प्रसंग और आनंद मोहन सिंह का नाम अधूरा रह गया है. जीवित और सक्रिय लोगों के नाम सावधानी से रखे गए हैं. यह ब्यूरोक्रेसी और राजनीति के समीकरणों को समझते हुए किया गया लगता है.

फिर भी किताब पढ़ने लायक है. यह सिर्फ एक अपराधी की कहानी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की भी है जिसमें अपराध, राजनीति और प्रशासन एक-दूसरे में घुले-मिले थे. STF के गठन और सफलता की कहानी आज भी प्रासंगिक है.

राजेश पाण्डेय ने जो देखा, झेला और अंजाम तक पहुंचाया, उसे ईमानदारी से कागज पर उतार दिया है. अगर नब्बे के दशक के पूर्वांचल-बिहार के आपराधिक-राजनीतिक माहौल को समझना हो, या फिर यह जानना हो कि एक गैंगस्टर के आतंक ने कैसे पूरे सिस्टम को हिला दिया था, तो यह किताब डेढ़-दो घंटे की ‘ठांय-ठांय’ वाली पठनीयता देती है.

क्रिकेट मैच के दौरान बारिश हो जाए और समय काटना हो, या फिर सचमुच उस कालखंड को जानने की जिज्ञासा हो, तो दोनों हालत में इसे उठाया जा सकता है.

यह भी पढ़ें:इतिहास के अनसुने पन्नों की दास्तान: जानिए क्यों खास है विश्वास पाटील का उपन्यास ‘ग्रेट कंचना सर्कस’

-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

Recent Posts

ममता बनर्जी पर हमले की कोशिश, TMC का दावा- महिला ने खींची साड़ी, चाकू लेकर पहुंची

Mamata Banerjee Attack : ममता बनर्जी पर हमले की कोशिश का TMC ने दावा किया…

5 minutes ago

‘सिर्फ मुआवजा काफी नहीं, जिम्मेदारी भी तय हो’, कस्टडी में हुई मौत पर छत्तीसगढ़ सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

छत्तीसगढ़ में 34 वर्षीय युवक की कस्टोडियल डेथ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को…

27 minutes ago

दिल्ली में पानी का संकट या टैंकरों का कारोबार? भारत एक्सप्रेस की पड़ताल में सामने आए चौंकाने वाले दावे

दिल्ली में पानी की किल्लत के बीच टैंकरों के कारोबार पर गंभीर सवाल उठ रहे…

28 minutes ago

नपीसीआई ने UPI MDR के लिए किया नया ऐलान, जानिए आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा असर

एनपीसीआई ने ऐलान किया है कि यूपीआई एमडीआर फ्रेमवर्क को दीपावली के तुरंत बाद लागू…

43 minutes ago

‘वह जेल से भाग चुका है…’, बेअंत सिंह हत्याकांड के दोषी हवारा के ट्रांसफर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, केंद्र को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी जगतार सिंह…

45 minutes ago

गुजरात में कांग्रेस की 41 साल से लगातार हार, राहुल गांधी को आत्ममंथन की जरूरत- अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी…

60 minutes ago