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Book Review

शंभुनाथ की पुस्तक 'भारतीय ज्ञान परंपरा: एक सभ्यता की अंतर्दृष्टि' के आलोक में जानिए कि कैसे भारत की ज्ञान-परंपरा संस्कृत, पालि, तमिल, लोक-कलाओं और वैचारिक बहस से समृद्ध हुई है.

बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी शहर की चिताओं के बीच एक ऐसी दुनिया भी बसती है, जिसे समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है. राधिका आयंगर की किताब बनारस का मसान डोम समुदाय के जीवन, संघर्ष, सपनों और सामाजिक भेदभाव की इसी अनदेखी दुनिया से पाठकों को रूबरू कराती है.

पूर्व आईपीएस अफसर राजेश पाण्डेय की किताब 'वर्चस्व' कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के खौफनाक दौर और यूपी एसटीएफ के गठन की इनसाइड स्टोरी बयां करती है.

विश्वास पाटील का उपन्यास 'ग्रेट कंचना सर्कस' द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान बर्मा के जंगलों में फंसे एक भारतीय सर्कस दल, उनकी नायिका कंचना और बेजुबान जानवरों के 520 किमी लंबे संघर्ष और साहस की ऐतिहासिक गाथा बयां करता है.

आरक्षण हटाओ आंदोलन के दौर में डॉ. सुरज मिलिंद येनगड़े की किताब 'जाति जिंदा है' भारतीय समाज के जातीय विमर्श और सवर्ण विशेषाधिकारों पर एक जरूरी बहस छेड़ती है.

क्या हम अपनी ज़िंदगी को सच में प्लान करते हैं, या बस हालात के साथ बहते रहते हैं? 'प्रोजेक्ट योर सक्सेस' इसी सवाल का जवाब देती है. यह किताब प्रेरणा के साथ ऐसे आसान तरीके भी बताती है, जिनसे जीवन को बेहतर दिशा दी जा सकती है.

हिंदी साहित्य में कुछ किताबें ऐसी होती हैं जो सिर्फ कहानी नहीं सुनातीं, बल्कि पाठक को सोचने का एक नया नजरिया भी देती हैं. पत्रकार और लेखक अंशुमान तिवारी की नई पुस्तक ‘विक्टर और वेताल 2.0’ इसी तरह का एक अलग और दिलचस्प प्रयोग है.

मशहूर कथावाचक जया किशोरी की नई पुस्तक 'जो है, ठीक है...' पेंगुइन प्रकाशन द्वारा रिलीज की गई है. इस किताब में उन्होंने बेहद सरल कहानियों और व्यावहारिक उदाहरणों के जरिए युवाओं को तनाव, असफलता और विपरीत परिस्थितियों को स्वीकार कर जीवन में सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने का मंत्र दिया है.

दिग्गज साहित्यकार और अभिनेता गिरीश कर्नाड की आत्मकथा This Life at Play जीवन के अप्रत्याशित सच को उजागर करती है. आर्थिक तंगी के कारण उनके माता-पिता उनका गर्भपात कराना चाहते थे, लेकिन डॉक्टर न मिलने की एक छोटी सी घटना ने उनका जीवन बचा लिया.

मेरे द्वारा की गई साहित्यिक समीक्षा: 'गुनाहों का देवता' और 'रेत की मछली' उपन्यासों के झरोखे से मानवीय संबंधों, निश्चल प्रेम और स्त्री की मौन वेदना का एक मार्मिक विश्लेषण.