1961 से 2011 तक कितना बदला भारत का जनसांख्यिकीय ढांचा? हरेन्द्र प्रताप की किताब में हुआ बड़ा खुलासा
Indian Census Analysis: हरेन्द्र प्रताप की पुस्तक 1961 से 2011 तक की जनगणना के आधार पर भारत की बदलती धार्मिक जनसांख्यिकी, अवैध प्रवासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर सवालों पर एक दूरदर्शी विमर्श प्रस्तुत करती है.
बुक रिव्यू: AI के दौर में मानवीय चेतना और संवेदनशीलता की पैरवी करती विनीत नायर की पुस्तक ‘इंसान पहले, मशीन बाद में’
मैं प्रसिद्ध लेखक विनीत नायर की पुस्तक 'इंसान पहले, मशीन बाद में' की समीक्षा कर रही हूं. जानिए AI के दौर में मशीनों की होड़ के बीच कैसे मानवीय संवेदना और विवेक से तय होगा भविष्य.
बुक रिव्यू: सुर्खियों और भ्रांतियों से परे सनातन धर्म का प्रमाणिक परिचय देती ‘Hinduism Beyond Headlines’
प्रो. हिमांशु राय और सुब्बू चिदंबरन की पुस्तक 'हिंदुइज्म बियॉन्ड हेडलाइन्स' का रिव्यू. वेदों, कर्म और सनातन परंपरा को वैज्ञानिक व तथ्य-आधारित दृष्टिकोण से पेश करती कृति.
नीतिगत फैसलों से कैसे बदला भारत? मदन सबनविस की किताब में खोले कई राज
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनविस की नई किताब 'पॉलिसीज दैट शेप्ड मॉडर्न इंडिया' भारत के आर्थिक विकास और राजनीति के गहरे रिश्तों को बेहद सरल भाषा में बयां करती है.
एक भाषा या ग्रंथ तक सीमित नहीं है भारतीय ज्ञान परंपरा: शंभुनाथ की पुस्तक में उजागर हुई सभ्यता की बहुरंगी अंतर्दृष्टि
शंभुनाथ की पुस्तक 'भारतीय ज्ञान परंपरा: एक सभ्यता की अंतर्दृष्टि' के आलोक में जानिए कि कैसे भारत की ज्ञान-परंपरा संस्कृत, पालि, तमिल, लोक-कलाओं और वैचारिक बहस से समृद्ध हुई है.
चिता की आग और मोक्ष की नगरी, क्या आपने देखी है बनारस की इस दुनिया की असली तस्वीर?
बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी शहर की चिताओं के बीच एक ऐसी दुनिया भी बसती है, जिसे समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है. राधिका आयंगर की किताब बनारस का मसान डोम समुदाय के जीवन, संघर्ष, सपनों और सामाजिक भेदभाव की इसी अनदेखी दुनिया से पाठकों को रूबरू कराती है.
उत्तर प्रदेश के आपराधिक कालखंड की सच्ची दास्तान: जानिए कैसे श्रीप्रकाश शुक्ला के ‘वर्चस्व’ का हुआ अंत
पूर्व आईपीएस अफसर राजेश पाण्डेय की किताब 'वर्चस्व' कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के खौफनाक दौर और यूपी एसटीएफ के गठन की इनसाइड स्टोरी बयां करती है.
इतिहास के अनसुने पन्नों की दास्तान: जानिए क्यों खास है विश्वास पाटील का उपन्यास ‘ग्रेट कंचना सर्कस’
विश्वास पाटील का उपन्यास 'ग्रेट कंचना सर्कस' द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान बर्मा के जंगलों में फंसे एक भारतीय सर्कस दल, उनकी नायिका कंचना और बेजुबान जानवरों के 520 किमी लंबे संघर्ष और साहस की ऐतिहासिक गाथा बयां करता है.
सवर्णों के बिना असंभ जाति व्यवस्था का अंत: पढ़िए सुरज येनगड़े की किताब ‘Caste Matters’ का सार
आरक्षण हटाओ आंदोलन के दौर में डॉ. सुरज मिलिंद येनगड़े की किताब 'जाति जिंदा है' भारतीय समाज के जातीय विमर्श और सवर्ण विशेषाधिकारों पर एक जरूरी बहस छेड़ती है.
क्या ज़िंदगी को भी ऑफिस प्रोजेक्ट की तरह चलाना मुमकिन है? जानिए क्या कहती है ‘प्रोजेक्ट योर सक्सेस’
क्या हम अपनी ज़िंदगी को सच में प्लान करते हैं, या बस हालात के साथ बहते रहते हैं? 'प्रोजेक्ट योर सक्सेस' इसी सवाल का जवाब देती है. यह किताब प्रेरणा के साथ ऐसे आसान तरीके भी बताती है, जिनसे जीवन को बेहतर दिशा दी जा सकती है.







