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Book Review

सुचेता दलाल और देबाशीष बासु की 2026 में प्रकाशित किताब 'पाथब्रेकर्स: हाउ 10 विजनरी लीडर्स ट्रांसफॉर्म्ड इंडिया' आधुनिक भारत के 10 प्रभावशाली नेताओं की निजी यात्राओं, संघर्षों और दूरदृष्टि का एक मूल्यवान दस्तावेज है.

देवेश कपूर और अरविंद सुब्रमण्यन की पुस्तक 'A Sixth of Humanity' स्वतंत्र भारत की विकास यात्रा को डेटा और तुलनात्मक नजरिए से पेश करती है. यह किताब भारतीय लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था की अप्रत्याशित सफलताओं व संरचनात्मक चुनौतियों का विश्लेषण करती है.

Indian Census Analysis: हरेन्द्र प्रताप की पुस्तक 1961 से 2011 तक की जनगणना के आधार पर भारत की बदलती धार्मिक जनसांख्यिकी, अवैध प्रवासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के गंभीर सवालों पर एक दूरदर्शी विमर्श प्रस्तुत करती है.

मैं प्रसिद्ध लेखक विनीत नायर की पुस्तक 'इंसान पहले, मशीन बाद में' की समीक्षा कर रही हूं. जानिए AI के दौर में मशीनों की होड़ के बीच कैसे मानवीय संवेदना और विवेक से तय होगा भविष्य.

प्रो. हिमांशु राय और सुब्बू चिदंबरन की पुस्तक 'हिंदुइज्म बियॉन्ड हेडलाइन्स' का रिव्यू. वेदों, कर्म और सनातन परंपरा को वैज्ञानिक व तथ्य-आधारित दृष्टिकोण से पेश करती कृति.

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनविस की नई किताब 'पॉलिसीज दैट शेप्ड मॉडर्न इंडिया' भारत के आर्थिक विकास और राजनीति के गहरे रिश्तों को बेहद सरल भाषा में बयां करती है.

शंभुनाथ की पुस्तक 'भारतीय ज्ञान परंपरा: एक सभ्यता की अंतर्दृष्टि' के आलोक में जानिए कि कैसे भारत की ज्ञान-परंपरा संस्कृत, पालि, तमिल, लोक-कलाओं और वैचारिक बहस से समृद्ध हुई है.

बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी शहर की चिताओं के बीच एक ऐसी दुनिया भी बसती है, जिसे समाज अक्सर नजरअंदाज कर देता है. राधिका आयंगर की किताब बनारस का मसान डोम समुदाय के जीवन, संघर्ष, सपनों और सामाजिक भेदभाव की इसी अनदेखी दुनिया से पाठकों को रूबरू कराती है.

पूर्व आईपीएस अफसर राजेश पाण्डेय की किताब 'वर्चस्व' कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला के खौफनाक दौर और यूपी एसटीएफ के गठन की इनसाइड स्टोरी बयां करती है.

विश्वास पाटील का उपन्यास 'ग्रेट कंचना सर्कस' द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान बर्मा के जंगलों में फंसे एक भारतीय सर्कस दल, उनकी नायिका कंचना और बेजुबान जानवरों के 520 किमी लंबे संघर्ष और साहस की ऐतिहासिक गाथा बयां करता है.