सिर्फ एक गलती...और खत्म हो गई ब्लैकबेरी
Blackberry vs iPhone: अगर आप नाइंटीज किड हैं तो आपको ब्लैकबेरी फोन (Blackberry ) के बारे में जरूर पता होगा. उस समय लोग इस फोन के दिवाने थे. बड़े-बड़े सेलिब्रिटी से लेकर राजनेता तक इसी फोन को लेकर चला करते थे. ब्लैकबेरी फोन की टेक्नोलॉजी अपने समय से आगे की थी. बड़ा स्क्रीन और ढेर सारे बटन इस फोन की पहचान हुआ करती थी. लेकिन साल 2015 आते -आते यह फोन बाजार से गायब से होने लगे. एप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियों के सामने इसने घुटने टेक दिये और अंत में ब्लैकबेरी कंपनी ने 2016 में स्मार्टफोन बनाना बंद कर दिया. माना जाता है कि एक गलती की वजह से ब्लैकबेरी अर्श से फर्श पर पहुंच गई. आइये बताते हैं कि वो गलती क्या थी?
ब्लैकबेरी को कभी स्मार्टफोन का बादशाह कहा जाता था. यह एक ऐसी मशीन थी जो सच में एक प्रोफेशनल की तरह दिखती थी. सन 2000 के दशक की शुरुआत में ब्लैकबेरी कंपनी उसी तरह की पहचान रखती थी जैसे आज एप्पल और सैमसंग जैसी कंपनियां रखती हैं. 2007 तक दुनिया भर में इस फोन के 1.6 करोड़ से अधिक यूजर्स थे. लेकिन 2010 तक आते आते इस कंपनी को चुनौती मिलने लगी.
जिस ब्लैकबेरी फोन का पूरी दुनिया भर में क्रेज था, उसे अब iphone जैसी एक नई नवेली कंपनी से जबरदस्त चुनौती मिलने लगी थी. कारण था इसकी डिजाइन.
ब्लैकबेरी कीपैड फोन बनाती थी. उस समय सभी कंपनिया कीपैड वाला फोन ही बनाती थीं. उनमें कुछ नया नहीं था. लोग बटन दबा-दबाकर उबने लगे थे. तभी मार्केट में लॉन्च होता है iphone. जो ना सिर्फ टच स्क्रीन फोन था, बल्कि उसकी डिजाइन बेहद ही आकर्षक थी. इस फोन को चलाने के लिए यूजर्स को बटन दबाने की जरूरत नहीं पड़ती थी. इसका अपना एक ब्राउजर और पूरा का पूरा ऐप इकोसिस्टम था. लोग अब ब्लैकबेरी फोन छोड़कर एप्पल फोन की तरफ जाने लगे थे.
इस बदलती दुनिया में ब्लैकबेरी ने एक बड़ी गलती कर दी. वो यूजर्स की मांग को समझने में गलती कर दी. जहां यूजर्स ऐसा फोन चाहते थे जिससे काम भी हो सके और मनोरंजन भी हो. लेकिन ब्लैकबेरी के नेतृत्व ने iPhone और उसकी टेक्नोलॉजी को नकार दिया.
वहीं iPhone यूजर्स को बड़ी स्क्रीन और एक सरल यूजर इंटरफेस दे रहा था. जो सिर्फ बड़े और अमीर लोगों के लिये नहीं बल्कि आम जनता के लिए डिजाइन किया गया था.
हद तो तब हो गई जब ब्लैकबेरी की मूल कंपनी RIM के संस्थापक और तत्कालीन सीईओ माइक लाजिरिडिस ने Iphone का मजाक उड़ाते हुए कह दिया कि, iPhone एक मनोरंजन का गैजेट है. वहीं ब्लैकबेरी एक व्यवसायिक गैजेट है. माइक लाजिरिडिस की यह बात ब्लैकबेरी के लिए बहुत ही घातक सिद्ध हुई.
ब्लैकबेरी ने iPhone को गंभीरता से नहीं लिया और अपने फोन को अपग्रेड करने के बजाय वो उसी बिजनेस आइडिया पर अड़े रहे जो अतीत में उनके लिए बेहद मुनाफे वाला रहा.
मार्केट में सिर्फ iPhone ही ब्लैकबेरी को चुनौती नहीं दे रहा था. उस समय गूगल का ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉयड भी काफी तेजी से लोकप्रिय हो रहा था. 2008 तक गूगल ने भी अपना एंड्रॉयड स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया. एंड्रॉयड के उस फोन का नाम था T-मोबाइल G1. इस फोन में गूगल यूजर्स को एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम की सुविधा दे रहा था. जिसमें यूजर्स कई चीजें कर सकते थे.
दूसरी ओर ब्लैकबेरी का ऑपरेटिंग सिस्टम पुराना हो चुका था. यह ऐप्स के लिए डेवलपर्स को आकर्षित करने में विफल हो रहा था. इसका ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रायड और iOS जैसा सरल और यूजर्स को बेहतरीन अनुभव प्रदान करने में असमर्थ था.
RIM (ब्लैकबेरी को बनाने वाली कंपनी) अपने ऑपरेटिंग सिस्टम को सिर्फ बिजनेस आधारित ही रखा. जबकि उसके बाकी प्रतिद्वंदी जनता की मांग के हिसाब से अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में बदलाव कर रहे थे. RIM के अपने कॉर्पोरेट कंफर्ट जोन में बने रहने का फैसला इस कंपनी के लिये बहुत घातक साबित हुआ. इसकी वजह से ना सिर्फ ब्लैकबेरी ऐप क्रांति से चूक गया बल्कि आगे चलकर उसके स्मार्ट फोन बाजार में बिकना ही बंद हो गए.
2010 आते-आते ब्लैकबेरी की बाजार में हिस्सेदारी घटने लगी. उपभोक्ता आईफोन और एंड्रॉयड डिवाइस की ओर ज्यादा आकर्षित होने लगे. 2012 तक एप्पल ने कुल स्मार्टफोन की बिक्री के मामले में ब्लैकबेरी को काफी पीछे छोड़ दिया. जिसकी वजह से ब्लैकबेरी के शेयरों की कीमतें गिरने लगीं.
2013 में ब्लैकबेरी ने अपनी डिवाइसों की नई सिरीज शुरू की, जिसका नाम उन्होंने ब्लैकबेरी Z10 रखा. यह कंपनी के द्वारा खुद को नए सिरे से स्थापित करने की अंतिम कोशिश थी. तबतक बहुत देर हो चुकी थी. ब्लैकबेरी की यह रणनीति काम नहीं आई. उपभोक्ताओं को अब ब्लैकबेरी के फोन में कोई दिलचस्पी नहीं रही.
ऐप इकोसिस्टम और टच इंटरफेस के मामले में आईफोन व एंड्रॉयड फोनों ने पहले ही ये जंग जीत ली थी.
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अंतत: ब्लैकबेरी ने 2016 में अपने फोन निर्माण को बंद कर दिया. साल 2018 में ब्लैकबेरी ने खुद को आधिकारिक तौर पर सॉफ्टवेयर निर्माण कंपनी के रूप में खुद को बदल लिया.
आज बिजनेस स्कूलों में ब्लैकबेरी के उत्थान और पतन को एक केस स्टडी के रूप में पढ़ाया जाता है. जहां ये बताने की कोशिश की जाती है कि किसी कंपनी को बाजार में बने रहने के लिए उसका समय के साथ चलना और अपने बिजनेस स्ट्रैटजी को बदलना कितना जरूरी है.
– भारत एक्सप्रेस
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