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PM-JAY के तहत मुफ्त अस्पताल देखभाल राशि 1.2 लाख करोड़ पार, अब तक 8.59 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित हुए

प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत लाभार्थियों को इस योजना के शुरू होने के बाद से 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मुफ्त अस्पताल में भर्ती होने का लाभ दिया गया है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, PM-JAY योजना से अब तक 8.59 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं, जो सालाना 5 लाख रुपये का मुफ्त स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है.

सितंबर 2018 से यह योजना देश के 10.7 करोड़ गरीब परिवारों के लिए उपलब्ध कराई गई थी, जो मोटे तौर पर आबादी के निचले 40% हिस्से को कवर करती है. जब यह योजना शुरू की गई थी, अनुमानित 62% स्वास्थ्य देखभाल लागत जेब से वहन की जाती थी, जिससे हर साल लाखों भारतीय गरीबी में चले जाते हैं.

इस योजना के तहत तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान, केरल, आंध्र प्रदेश और गुजरात के लोग सबसे अधिक लाभार्थी थे. PM-JAY के तहत, लाभार्थियों को कैशलेस उपचार प्राप्त करने के लिए लगभग 2,000 प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं, जिसमें उपचार से संबंधित सभी लागतें शामिल हैं. आपूर्ति, डायग्नोस्टिक सेवाएं, चिकित्सक की फीस, कमरे का शुल्क, सर्जन शुल्क, ओटी और आईसीयू शुल्क आदि शामिल हैं.

36 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए गए

लाभार्थियों द्वारा अब तक प्राप्त किए गए शीर्ष विशेष देखभाल उपचार सामान्य चिकित्सा, संक्रामक रोग, चिकित्सा ऑन्कोलॉजी, नेत्र विज्ञान और आर्थोपेडिक्स हैं. लोगों द्वारा प्राप्त प्रक्रियाओं में हेमोडायलिसिस, कोविड-19 के लिए स्क्रीनिंग, कई पैकेज और तीव्र ज्वर संबंधी बीमारी शामिल हैं. लाभार्थियों को अब तक 36.54 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं. PM-JAY के तहत 31,077 सार्वजनिक और निजी अस्पताल लिस्टेड हैं.

यह देखते हुए कि देश में कई लोग गरीबी में जाने से सिर्फ एक मेडिकल बिल दूर हैं, वित्त पर संसदीय स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि PM-JAY योजना को भुगतान के आधार पर ‘मिसींग मिडल’ तक बढ़ाया जाना चाहिए. हाल ही में केंद्र ने इस योजना को आय स्तर की परवाह किए बिना 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों तक बढ़ा दिया है. अक्टूबर 2021 में जारी नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 30% आबादी या 40 करोड़ व्यक्ति, जिन्हें इस रिपोर्ट में मिसिंग मिडिल कहा गया है, स्वास्थ्य के लिए किसी भी वित्तीय सुरक्षा से वंचित हैं.

आने वाले बजट में कोविड काल के दौरान स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के लिए शुरू की गई पहलों पर काम करने और इन्हें पहले से मौजूद कार्यक्रमों के साथ एकीकृत करने की उम्मीद है. विशेषज्ञों ने प्राथमिक देखभाल के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर ध्यान दिलाया है.

पिछले सप्ताह केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को बदलने में कार्यक्रम की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 5 साल के विस्तार को मंज़ूरी दी. इस योजना को 2005 में सिर्फ़ ग्रामीण घटक के साथ शुरू किया गया था, लेकिन बाद में इसे व्यापक बना दिया गया.


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-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

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