Global Market Crash Alert: वैश्विक अर्थव्यवस्था के गलियारों से इस समय की सबसे सनसनीखेज और पूरी दुनिया के बाजारों को हिला देने वाली भू-राजनीतिक (Geopolitics) खबर सामने आ रही है. दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों (Central Banks) ने अपने रिजर्व से अमेरिकी डॉलर को तेजी से हटाना शुरू कर दिया है और उसकी जगह दोगुनी क्षमता से सोने का भंडार (Gold Reserve) बढ़ा रहे हैं.
आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि पिछले चार वर्षों में हर साल औसतन 1,000 टन सोना खरीदा गया है और पिछले 10 सालों में केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी दोगुनी हो चुकी है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद, क्या यह कदम दुनिया पर आने वाले किसी बहुत बड़े आर्थिक या रणनीतिक संकट की आहट है?
दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों द्वारा अपने तिजोरियों से डॉलर को बाहर फेंकना और सोने को गले लगाना सीधे तौर पर अमेरिकी करेंसी के प्रभुत्व को सीधी चुनौती है. आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध और मिडल ईस्ट में ईरान-अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव के बाद, वैश्विक शक्तियों का अमेरिकी डॉलर से भरोसा डगमगा गया है.
उन्हें डर है कि अमेरिका कभी भी अपनी मुद्रा (Currency) को हथियार बनाकर उन पर कड़े प्रतिबंध लगा सकता है. यही वजह है कि पिछले 4 सालों में हर साल 1000 टन सोना खरीदकर बैंक खुद को सुरक्षित कर रहे हैं, जिससे डॉलर लगातार कमजोर हो रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चश्मे से देखें, तो यह पूरी स्थिति एक बड़े संकट का संकेत देती है. ट्रंप हमेशा से ‘अमेरिका फर्स्ट’ और आक्रामक टैरिफ (संरक्षणवादी नीति) के हिमायती रहे हैं. ट्रंप ने हाल ही में वैश्विक स्तर पर कड़े व्यापारिक प्रतिबंध लगाने की चेतावनियां दी हैं.
जब-जब अमेरिका इस तरह के कदम उठाता है, दुनिया भर के देश डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सोने के सुरक्षित आशियाने में शरण लेते हैं. रणनीतिकारों का मानना है कि वैश्विक बैंकों को पहले ही भनक लग चुकी है कि ट्रंप की नीतियां अमेरिकी फेडरल रिजर्व और वैश्विक व्यापार को अस्थिर कर सकती हैं, इसलिए वे सोने की खरीदारी को डबल कर चुके हैं.
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आंकड़े बताते हैं कि बीते एक दशक में सोने की ये होड़ अभूतपूर्व है. जब भी इतिहास में केंद्रीय बैंकों ने इस रफ्तार से सोना जमा किया है, उसके तुरंत बाद दुनिया ने या तो कोई भयानक वैश्विक मंदी (जैसे 2008 का क्रैश) देखी है या फिर किसी बड़े युद्ध का गवाह बनी है.
ऐसे में 2026 के इस दौर में सोने का यह रिकॉर्ड हाई भंडार इस बात की साफ मुनादी कर रहा है कि आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था की बिसात पर कोई बहुत बड़ा उलटफेर या महा-संकट आने वाला है, जिससे निपटने के लिए पूरी दुनिया बारूद के बजाय सोने के ढेर पर बैठ रही है.
-भारत एक्सप्रेस
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