एजुकेशन

पढ़ाई से ज्यादा ‘पुड़िया’ पर पैसा: गांवों में 565% बढ़ा गुटखे का शौक, रिपोर्ट ने बजाई खतरे की घंटी

EAC-PM Report: भारत के ग्रामीण इलाकों से एक ऐसी खबर आई है जो किसी को भी डरा सकती है. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की ताज़ा रिपोर्ट ने देश की सेहत और जेब, दोनों का काला सच सामने रख दिया है. रिपोर्ट के आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि हमारे गांवों में अब बच्चों की स्कूल की फीस से ज्यादा पैसा गुटखे और तंबाकू पर लुटाया जा रहा है.

बीड़ी छूटी, पर गुटखे ने जकड़ा

शमिका रवि और पारथा प्रतिम बर्मन द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में 2011-12 और 2023-24 के बीच के बदलावों को बारीकी से देखा गया है. सबसे चौंकाने वाली बात ‘गुटखे’ को लेकर है. पिछले 12 सालों में गांवों में गुटखा खाने वालों की संख्या में 565 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है. पहले जहां सिर्फ 5 प्रतिशत ग्रामीण परिवार गुटखा खाते थे, आज यह आंकड़ा बढ़कर 30 प्रतिशत के पार पहुंच गया है.

दिलचस्प लेकिन चिंताजनक बात यह है कि लोगों ने बीड़ी पीना तो कम किया है, लेकिन वे सुधरने के बजाय सिगरेट और महंगे पैकेटबंद नशे की तरफ मुड़ गए हैं. जैसे-जैसे आमदनी बढ़ी, लोगों ने अपनी पसंद ‘अपग्रेड’ कर ली, लेकिन लत वही पुरानी और जानलेवा रही.

गरीब परिवारों पर दोहरी मार

रिपोर्ट का सबसे दुखद पहलू यह है कि नशे की ये मार सबसे ज्यादा गरीब परिवारों पर पड़ रही है. ग्रामीण भारत के सबसे निचले पायदान पर खड़े 40 प्रतिशत परिवार अपनी कुल कमाई का 4 प्रतिशत हिस्सा नशे (पान, तंबाकू) पर खर्च कर रहे हैं, जबकि अपने बच्चों की पढ़ाई पर उनका खर्च मात्र 2.5 प्रतिशत है. यानी भविष्य संवारने से ज्यादा जरूरी आज उनके लिए नशा हो गया है.

शहरों की हालत भी कुछ जुदा नहीं है. वहां भी तंबाकू सेवन करने वाले परिवारों का आंकड़ा 35 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है.

ये भी पढ़ें- अब गांव का बच्चा भी बनेगा डॉक्टर-इंजीनियर! इस गांव में सरकार ने चलाई एक खास पहल; स्कूल में होगी JEE-NEET की तैयारी

कहां है सबसे बुरा हाल?

अगर राज्यों की बात करें तो पूर्वोत्तर के राज्यों में स्थिति बेकाबू है. त्रिपुरा, अरुणाचल और मिजोरम जैसे राज्यों के गांवों में 90 प्रतिशत से ज्यादा परिवार तंबाकू की गिरफ्त में हैं. बड़े राज्यों में मध्य प्रदेश (89%), बिहार (87%) और उत्तर प्रदेश (83.3%) के गांवों का हाल भी बहुत खराब है. इसके उलट दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने इस मामले में काफी बेहतर अनुशासन दिखाया है.

क्या ‘मुफ्त इलाज’ ने बढ़ा दी बेफिक्री?

रिपोर्ट में एक बहुत ही कड़वा इशारा किया गया है. सरकार ने पिछले कुछ सालों में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ाया है और गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी है. लेकिन इसका एक उल्टा असर यह दिख रहा है कि लोगों में बीमारी का डर कम हो गया है. उन्हें लगता है कि ‘अगर बीमार हुए तो सरकार देख लेगी’, और इसी सोच के कारण वे अपनी सेहत को दांव पर लगाकर धड़ल्ले से नशा कर रहे हैं.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

Recent Posts

करीब 10 साल बाद भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में लौटे आशुतोष राय, पूर्वांचल में क्या होगी भूमिका?

वाराणसी की स्नातक और शिक्षक MLC सीटों पर भाजपा की लगातार दूसरी हार के बीच…

12 minutes ago

‘हर संभव मदद मिलेगी…’: चक्रवात अर्नब के हालात पर अमित शाह की नजर, जल्द पहुंचेगी केंद्रीय टीम

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चक्रवात अर्नब के मद्देनजर आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी, ओडिशा और…

31 minutes ago

बेटे अनंत की बातें सुन नम हुईं मुकेश अंबानी की आंखें, जियो की ऐतिहासिक लिस्टिंग पर दिखा परिवार का प्यार

जियो प्लेटफॉर्म्स की शेयर बाजार में लिस्टिंग के मौके पर अनंत अंबानी की स्पीच सुनकर…

56 minutes ago

जियो की शेयर बाजार में धमाकेदार एंट्री, 104 से सीधे 80 लाख शेयरहोल्डर्स

Jio Platforms Listing: मुकेश अंबानी की जियो के शेयरधारकों की संख्या 104 से बढ़कर 79.6…

57 minutes ago

दिवाली से पहले किसानों की बल्ले-बल्ले..! कल जारी होगी PM Kisan की 24वीं किस्त, खाते में आएंगे इतने रुपए

PM Kisan 24th Kist: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 अक्टूबर 2026 को गुजरात के बनासकांठा से…

2 hours ago