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‘चंदा मामा पास के…’, लद्दाख में ISRO बनाएगा ‘अंतरिक्ष’,जानें क्या है मिशन मित्र?

ISRO Mission MITRA: भारत का महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ अब अपने अगले और सबसे अहम पड़ाव पर पहुंच गया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने हाल ही में एक बेहद खास प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसे ‘मिशन MITRA’ नाम दिया गया है. इस मिशन का मकसद अंतरिक्ष यात्रियों को उस मानसिक और शारीरिक तनाव के लिए तैयार करना है, जिसका सामना उन्हें अंतरिक्ष की गहराइयों में करना पड़ेगा.

लद्दाख की पहाड़ियों में क्यों हो रहा है ये टेस्ट?

अब आप सोच रहे होंगे कि अंतरिक्ष की तैयारी पहाड़ों पर क्यों? दरअसल, लद्दाख का लेह इलाका अपनी ऊंचाई, कड़ाके की ठंड, ऑक्सीजन की कमी और अकेलेपन के लिए जाना जाता है. ये परिस्थितियां काफी हद तक अंतरिक्ष के वातावरण से मिलती-जुलती हैं.

समुद्र तल से करीब 3,500 मीटर की ऊंचाई पर ‘मिशन मित्रा’ के तहत वैज्ञानिकों की एक टीम को आइसोलेशन यानी दुनिया से अलग-थलग रखा जा रहा है. यहाँ यह देखा जा रहा है कि जब हवा पतली हो और शरीर थक रहा हो, तब इंसान का दिमाग कैसे काम करता है और टीम के बाकी सदस्यों के साथ उसका तालमेल कैसा रहता है.

क्या है मिशन ‘MITRA’ का असली मकसद?

‘MITRA’ यानी Mapping of Interoperable Traits and Response Assessment का सीधा सा मतलब है, इंसानी व्यवहार और प्रतिक्रियाओं का बारीकी से अध्ययन करना. ISRO यह समझना चाहता है कि जब अंतरिक्ष यात्री हफ्तों तक एक छोटे से कैप्सूल में बंद रहेंगे, तो उनके बीच बातचीत कैसी होगी? तनाव की स्थिति में वे फैसले कैसे लेंगे? और सबसे जरूरी बात, जमीन पर बैठे कंट्रोल रूम के साथ उनका तालमेल कैसा रहेगा?

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सेना और स्टार्टअप्स का मिला साथ

यह मिशन सिर्फ इसरो का ही नहीं, बल्कि एक साझा कोशिश है. इसमें भारतीय वायुसेना के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन’ के डॉक्टर और एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं. वहीं, बेंगलुरु के एक स्टार्टअप ‘प्रोटोप्लैनेट’ को इस पूरी रिसर्च के ऑपरेशनल मैनेजमेंट की जिम्मेदारी दी गई है. इस मिशन की आधिकारिक शुरुआत 2 अप्रैल 2026 को इसरो चीफ डॉ. वी नारायणन ने एक वर्चुअल कार्यक्रम के जरिए की.

गगनयान के लिए क्यों जरूरी है ये डेटा?

अंतरिक्ष में सिर्फ रॉकेट का सही होना काफी नहीं है, बल्कि उस रॉकेट के अंदर मौजूद इंसान का मानसिक रूप से मजबूत होना सबसे ज्यादा जरूरी है. ‘मिशन मित्रा’ से जो डेटा मिलेगा, उसका इस्तेमाल गगनयान के यात्रियों की ट्रेनिंग को और बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा. इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि अंतरिक्ष में टीम का लीडर कौन होगा और मुश्किल वक्त में बिना घबराए मिशन को सफल कैसे बनाया जाए.

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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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