Amartya Sen SIR Notice: नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक नोटिस मिला. यह नोटिस मतदाता सूची में दर्ज जानकारी में गड़बड़ी के कारण जारी हुआ. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि अमर्त्य सेन की मां की जन्म तिथि गलत दर्ज होने से उनकी उम्र और मां की उम्र में सिर्फ 15 साल का अंतर दिख रहा था. जबकि असल में उनकी मां का जन्म 1914 में हुआ था, लेकिन डेटा में 1918 दर्ज हो गया. इससे कंप्यूटर सिस्टम ने इसे असामान्य माना और ऑटोमैटिक नोटिस जेनरेट हो गया.
अन्य रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य वजह नाम की स्पेलिंग में छोटी गलती थी. चुनाव आयोग ने बाद में स्पष्ट किया कि यह कोई जानबूझकर की गई कार्रवाई नहीं थी. यह एक तकनीकी या क्लेरिकल गलती थी. नोटिस 16 जनवरी को सुनवाई के लिए था, लेकिन अमर्त्य सेन को खुद कहीं जाने की जरूरत नहीं है. अधिकारी उनके शांतिनिकेतन स्थित घर पर ही आएंगे और गलती सुधारेंगे.
तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने इस नोटिस को बंगाल के गौरव का अपमान बताया. उन्होंने एक जनसभा में कहा कि अमर्त्य सेन जैसे विश्व प्रसिद्ध व्यक्ति को नोटिस भेजना दुखद है. यह केंद्र सरकार और बीजेपी के इशारे पर हो रहा है. उन्होंने क्रिकेटर मोहम्मद शमी और अभिनेता देव को भी नोटिस मिलने का जिक्र किया. टीएमसी का कहना है कि SIR प्रक्रिया के बहाने बंगाल के प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाया जा रहा है. यह बंगाली अस्मिता पर हमला है.
अभिषेक बनर्जी ने लोगों से अपील की कि ऐसे एजेंटों को बाहर निकालें जो बंगाल के लोगों को परेशान कर रहे हैं. टीएमसी ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया और चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया.
चुनाव आयोग ने जल्दी ही सफाई दी कि यह नोटिस सिस्टम की ऑटोमैटिक प्रक्रिया से बना था. अमर्त्य सेन 92 साल के हैं और 85 साल से ज्यादा उम्र वालों के लिए घर पर ही सुनवाई का नियम है. उन्हें किसी दफ्तर में आने की जरूरत नहीं है. आयोग ने कहा कि गलती सिर्फ स्पेलिंग या डेटा एंट्री की थी. इसे ठीक करने के लिए बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर पर जाएंगे.
कुछ रिपोर्टों में बताया गया कि नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को सस्पेंड भी कर दिया गया. आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया सभी मतदाताओं पर समान रूप से लागू होती है. यह मतदाता सूची को साफ और सही बनाने के लिए है. कोई व्यक्तिगत उत्पीड़न नहीं है.
अमर्त्य सेन इस समय विदेश में हैं. वे साल के ज्यादा समय बाहर रहते हैं, लेकिन शांतिनिकेतन में उनका पैतृक घर है. वे बोलपुर वार्ड के मतदाता हैं. नोटिस उनके केयरटेकर और रिश्तेदार को सौंपा गया. उनके चचेरे भाई शांतभानु सेन ने कहा कि यह एक बुजुर्ग को परेशान करने जैसा है. लेकिन उन्होंने वकील से बात करके नोटिस स्वीकार किया. अमर्त्य सेन की कोई व्यक्तिगत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है.
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया है. इसमें पुरानी गलतियां, डुप्लिकेट नाम या असामान्य डेटा को चेक किया जाता है. कंप्यूटर सॉफ्टवेयर खुद कुछ विसंगतियां पकड़ लेता है, जैसे उम्र का अंतर कम होना या स्पेलिंग गलत होना. ऐसे मामलों में नोटिस जारी होता है और दस्तावेज मांगे जाते हैं. पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया चल रही है, जिससे लाखों नामों पर सवाल उठे हैं.
यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया. टीएमसी इसे बीजेपी की साजिश बता रही है, जबकि बीजेपी कह रही है कि यह सामान्य प्रक्रिया है. इसे राजनीतिक रंग न दें. आने वाले चुनावों को देखते हुए दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं.
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