चुनाव

तंज से तख्तापलट तक! जब 2014 में दीदी ने उड़ाया था अमित शाह का मजाक, 2026 में उखाड़ फेंका TMC का किला

Mamata Banerjee Vs Amit Shah: साल 2014 भारतीय राजनीति में एक बड़ा मोड़ लेकर आया था. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने पहली बार अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी. इस ऐतिहासिक जीत के पीछे जिस रणनीतिकार का नाम बार-बार सामने आया, वे थे अमित शाह. संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और चुनावी गणित को साधने में उनकी भूमिका को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा होती रही. इसी जीत के बाद बीजेपी ने अपने विस्तार का बड़ा लक्ष्य पश्चिम बंगाल को तय किया.

उसी दौरान कोलकाता में एक दिलचस्प सियासी घटना हुई. जब मीडिया ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा कि अमित शाह बंगाल में रैली करने आ रहे हैं, तो उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिया- “कौन अमित शाह?” यह बयान भले ही उस समय सामान्य राजनीतिक बयान लग रहा था, लेकिन इसे बीजेपी ने चुनौती के रूप में लिया.

इसके बाद 1 दिसंबर 2014 को कोलकाता के धर्मतल्ला में अमित शाह ने एक बड़ी रैली की. यहीं से उन्होंने बंगाल की राजनीति में अपनी मौजूदगी का ऐलान किया. मंच से उन्होंने सीधे ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए कहा कि दीदी अगर आप देख सकती हैं तो देख लीजिये…सुन सकती हैं तो सुन लीजिये. मैं अमित शाह हूं. मैं भारतीय जनता पार्टी का एक छोटा सा कार्यकर्ता हूं. मैं अमित शाह हूं और इस बंगाल की भूमि से तृणमूल कांग्रेस को उखाड़ने के लिए आया हूं. ये आप समझ लीजिये. अमित शाह का यह बयान उस समय एक राजनीतिक हुंकार के रूप में देखा गया.

2019 के लोकसभा चुनाव में दिखा परिणाम

इसके बाद शुरू हुआ बीजेपी का लंबा संगठनात्मक अभियान. पार्टी ने बंगाल में बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत की. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेटवर्क और स्थानीय नेताओं के जरिए कार्यकर्ताओं की नई फौज तैयार की गई. 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 18 सीटें जीतकर पहली बड़ी छलांग लगाई. इसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी मुख्य विपक्ष के रूप में उभरी.

बीजेपी 200 से अधिक सीटों पर बनाई बढ़त

अब 4 मई को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों ने इस पूरी राजनीतिक यात्रा को एक निर्णायक मुकाम पर पहुंचा दिया है. ताजा रुझानों के मुताबिक बीजेपी 200 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है और कई सीटों पर जीत भी दर्ज कर चुकी है. वहीं, पिछले 15 सालों से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस इस बार काफी पीछे नजर आ रही है.

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294 सीटों वाले इस राज्य में सत्ता परिवर्तन के संकेत साफ दिख रहे हैं. यह सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि बीजेपी के उस लंबे और सतत मिशन का परिणाम है, जिसकी शुरुआत 2014 में अमित शाह ने शुरू की थी. अमित शाह की वह चुनौती, जो कभी एक राजनीतिक बयान लगती थी, आज हकीकत बनती नजर आ रही है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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