West Bengal Election Update: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में हार के बाद एक ऐसा अभूतपूर्व राजनीतिक और संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी हार स्वीकार करने और नैतिक परंपरा के तहत पद से इस्तीफा (Mamata Banerjee refuses to resign) देने से साफ इनकार कर दिया है. इस टकराव के बीच सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने जो कानूनी रास्ता सुझाया है, उसने बंगाल की सियासत का पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है.
ममता बनर्जी के इस अड़ियल रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए जाने-माने दिग्गज वकील राम जेठमलानी के बेटे और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने बड़ा बयान दिया है. जेठमलानी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ममता बनर्जी इस्तीफा देने से मना करती हैं, तो उन्हें पद से बाहर निकाल देना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि अगर वो जबरन मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बनी रहती हैं, तो राज्यपाल को पुलिस फोर्स भेजकर उन्हें पद से हटा देना चाहिए.
मंगलवार को कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब ममता से पूछा गया कि क्या वे इस्तीफा सौंपने राजभवन (गवर्नर हाउस) जाएंगी? तो उन्होंने दो टूक जवाब दिया कि उनके इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि नैतिक रूप से जीत उन्हीं की हुई है. ममता ने अपनी हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ते हुए कहा-
‘हमारा मुकाबला बीजेपी से नहीं, बल्कि चुनाव आयोग से था और आयोग ने बीजेपी के लिए काम किया.” ममता ने खुलेआम ऐलान किया कि वह अब बीजेपी के अत्याचारों को बर्दाश्त नहीं करेंगी और पार्टी सदस्यों के साथ रणनीति बनाकर फिर से सड़कों पर उतरेंगी.’
मुख्यमंत्री का इस्तीफा देना एक नैतिक परंपरा है. ममता के इस्तीफा न देने से नई सरकार के गठन में सीधे तौर पर कोई संवैधानिक बाधा नहीं है, लेकिन इसके लिए राज्यपाल को सख्त कदम उठाने होंगे. संविधान के जानकारों के अनुसार
अनुच्छेद 164 का पावर: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं और पद पर व्यक्ति राज्यपाल के ‘प्रसादपर्यंत’ (उनकी मर्जी तक) बना रहता है. यदि मुख्यमंत्री बहुमत खो चुका है और इस्तीफा नहीं देता, तो राज्यपाल को उन्हें सीधे बर्खास्त करने का पूरा अधिकार है.
सदन में बहुमत साबित करना: राज्यपाल वर्तमान सरकार को तत्काल प्रभाव से भंग कर सकते हैं या ममता बनर्जी को सदन में बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं. बहुमत साबित न कर पाने पर उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाया जा सकेगा.
कार्यकाल की समाप्ति: बंगाल की मौजूदा विधानसभा का 5 साल का कार्यकाल कल यानी 7 मई 2026 को ही खत्म हो रहा है. ऐसे में राज्यपाल विधानसभा को स्वतः भंग कर सकते हैं, क्योंकि जनादेश पहले ही समाप्त हो चुका है.
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संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ममता बनर्जी या उनकी पार्टी की तरफ से कोई ऐसा कदम उठाया जाता है जिससे राज्य में कोई बड़ा संकट खड़ा हो या कानून-व्यवस्था बिगड़े, तो ऐसी स्थिति में राज्यपाल सीधे अनुच्छेद 356 के तहत राज्य में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) की सिफारिश कर सकते हैं. फिलहाल पूरे देश की निगाहें राजभवन पर टिकी हैं कि राज्यपाल इस ‘संवैधानिक संकट’ को सुलझाने के लिए अपना अगला कदम क्या उठाते हैं.
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