चुनाव

नामांकन रद्द होने के बाद क्या? चिराग पासवान के पास हैं 2 ‘सीक्रेट’ विकल्प; जानें चुनावी नियम

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए पहले चरण के नामांकन पूरे होने के बाद, स्क्रूटनी के दौरान NDA गठबंधन को एक बड़ा झटका लगा है. मढ़ौरा विधानसभा क्षेत्र से लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की उम्मीदवार और भोजपुरी एक्ट्रेस सीमा सिंह का नामांकन ‘तकनीकी खामी’ के कारण रद्द कर दिया गया है. नामांकन रद्द होने का असर केवल सीमा सिंह पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि JDU से बागी अल्ताफ आलम राजू समेत कई निर्दलीय उम्मीदवारों का पर्चा भी खारिज हुआ है, जिससे अब यह मुकाबला मुख्य रूप से RJD और प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी के बीच सिमट गया है.

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) में मतदान से पहले चिराग पासवान की उम्मीदवार सीमा सिंह का नामांकन रद्द हो गया है. चिराग पासवान की पार्टी और NDA के रेस से बाहर होने से मौजूदा RJD विधायक जितेंद्र कुमार राय की जीत आसान हो सकती है. हालांकि, चिराग पासवान ने चुनाव आयोग से समाधान की उम्मीद जताते हुए ज्ञापन सौंपा है. आइये जानें नामांकन रद्द होने के बाद क्या विकल्प होते हैं.

नामांकन प्रक्रिया और नियम

  • अगर 25 साल से ज्यादा उम्र का कोई व्यक्ति चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे नामांकन दाखिल करना होता है. जनप्रतिनिधि कानून के तहत, जिस व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट में है, वह नामांकन भर सकता है.
  • अगर कोई मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी से पर्चा भर रहा है तो उसे एक ही प्रस्ताव की जरूरत होती है. पर कोई व्यक्ति निर्दलीय चुनाव लड़ रहा है तो उसे कम से कम 10 प्रस्ताव की जरूरत पड़ती है.
  • नामांकन के साथ उम्मीदवार को जमानत राशि और हलफनामा भी जमा करना होता है. सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों 10 हजार. वहीं, एससी और एसटी उम्मीदवारों को 5 हजार रुपये भरने होते हैं.
  • हलफनामे में अपनी कमाई और खर्च और संपत्ति का सारा हिसाब-किताब देना होता है.

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नामांकन खारिज होने के कारण

  • चुनाव लड़ने के लिए नामांकन भरते समय जो भी जानकारी दी है, वह सब सही होनी चाहिए.
  • अगर जरा सी भी चूक हो तो यह रद्द हो सकता है.
  • अगर उम्मीदवार के नामांकन में प्रस्तावक के दस्तखत नहीं है, पूरा पता नहीं है तो नामांकन रद्द हो सकता है.
  • संपत्ति और आपराधिक मामलों को लेकर हलफनामा नहीं दिया है तो स्क्रूटनी में इसे रद्द कर दिया जाता है.

नामांकन खारिज होने के बाद क्या विकल्प?

स्क्रूटनी के बाद नामांकन रद्द करना या उसे मंजूर करना RO यानी रिटर्निंग ऑपीसर की जिम्मेदारी है. RO का फैसला अंतिम माना जाता है. चुनाव के बाद ही फिर इस फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है. अगर उम्मीदवार को लगता है कि उसका नामांकन रद्द करने का फैसला सही नहीं था तो वह इसे कोर्ट में चुनौती दे सकता है. अगर कोर्ट का फैसला उसके पक्ष में आता है तो जीते हुए प्रत्याशी का चुनाव रद्द कर दिया जाता है.

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चिराग के पास एक और रास्त

Bihar Election 2025 में मढ़ौरा सीट से सीमा सिंह का नामांकन रद्द होना NDA के लिए एक असमय और बड़ा झटका है, खासकर तब जब चिराग पासवान ने इसे महज ‘छोटी सी चूक’ बताया है और समाधान के लिए चुनाव आयोग का रुख किया है. हालांकि, RO के फैसले को चुनाव के बाद ही अदालत में चुनौती दी जा सकती है, लेकिन तत्काल प्रभाव से, सीमा सिंह का विधायक बनने का सपना टूट गया है. ऐसे में NDA को बिना उम्मीदवार के इस महत्वपूर्ण सीट पर अपनी रणनीति बदलनी होगी. उसके पास एक और विकल्प है कि वह किसी अन्य निर्दलीय प्रत्याशी को अपना समर्थन दे.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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