अमित शाह ने क्यों टाल दिया PK के 'परफॉर्मेंस' पर जवाब?
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज दौरा किया. इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ‘ऐतिहासिक जीत’ का विश्वास जताया. उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नीत महागठबंधन को ‘नया मुखौटा पहने जंगलराज’ कहकर खारिज कर दिया. हालांकि, उनके एक टिप्पणी ने बिहार चुनाव में एक नया सस्पेंस खड़ा कर दिया है. जब उनसे पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) की एक साल पुरानी पार्टी जन सुराज के बारे में पूछा गया उन्होंने कुछ खास अंदाज में सवाल को टाल दिया. उनके जबाव ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
अमित शाह ने कहा कि राजग ने पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार को स्थिरता और प्रगति की राह पर ले गया है. शाह ने कहा कि पिछले 20 सालों में हमने बिहार को नरक से निकाला. अब जनता राजग को एक और मौका दे, ताकि प्रगति का यह सिलसिला जारी रहे,
प्रशांत किशोर की जन सुराज पर क्या बोले?
केंद्रीय मंत्री से बिहार चुनाव में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी पर पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि उनकी नई पार्टी पहली बार चुनाव लड़ रही है. नतीजे आने के बाद ही उनके बारे में बात करेंगे. उन्होंने कहा- हम उनके बारे में वोटों की गिनती और नतीजे घोषित होने के बाद बात करेंगे. किशोर की पार्टी को कुछ लोग बिहार चुनाव में छुपा रुस्तम मान रहे हैं. ऐसे में अमित शाह का जवाब सियासी गलियारों में घूमने लगा है. इसे कुछ लोग NDA की बी टीम की तरह देखने लगे हैं.
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विपक्ष में सीट बंटवारे पर भ्रम
विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि राजद, कांग्रेस और वाम दलों में नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर भारी उलझन है. कई सीटों पर वे एक-दूसरे के खिलाफ ही चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने विपक्ष के ‘मुफ्त रेवड़ी’ के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि राजग सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिहार की जनता को लगातार मिल रहा है.
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केंद्र की योजनाओं से बिहार को फायदा
शाह ने बताया कि पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना से 8.52 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज, 87 लाख किसानों को किसान सम्मान निधि, 52 लाख किसानों को फसल बीमा, 3.53 लाख लोगों को आयुष्मान भारत योजना और 1.57 करोड़ महिलाओं को उज्ज्वला योजना का लाभ मिला है. इसके अलावा, 44 लाख बेघर लोगों को आवास दिए गए हैं. बिहार में बुनियादी ढांचे के विकास का जिक्र करते हुए कहा कि पहले पटना से गया पहुंचने में छह घंटे लगते थे, जो अब दो घंटे में पूरा हो जाता है. अपहरण और जातीय हिंसा जैसी घटनाएं अब अतीत की बात हैं.
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