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‘बंगाल फाइल्स’ पर प्रतिबंध नहीं! कलकत्ता हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की PIL?

Calcutta High Court Bengal Files PIL: पश्चिम बंगाल में फिल्म ‘बंगाल फाइल्स’ को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में शुक्रवार को एक बड़ा मोड़ आया. कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस फिल्म की रिलीज से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता का इस मामले में कोई प्रत्यक्ष हित नहीं है. न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति स्मिता दास डे की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि फिल्म की रिलीज का मसला सीधे तौर पर निर्माता-निर्देशक के अधिकार और प्रयासों से जुड़ा है.

न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति स्मिता दास डे की खंडपीठ ने साफ किया कि याचिकाकर्ता का इस मामले में कोई प्रत्यक्ष हित नहीं है. अदालत ने कहा कि असली समस्या फिल्म के निर्माता-निर्देशक से जुड़ी है, क्योंकि फिल्म की रिलीज उन्हीं के अधिकार और प्रयासों से संबंधित है. इस कारण इसे खारिज (PIL dismissed on Bengal Files movie) किया जाता है.

सरकार ने बताया नहीं है प्रतिबंध (No Ban On Bengal Files)

राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने अदालत में स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने फिल्म पर किसी भी तरह का प्रतिबंध नहीं लगाया है. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह सिनेमा हॉल मालिकों का निर्णय है कि वे फिल्म दिखाना चाहते हैं या नहीं. चूंकि हॉल मालिकों के खिलाफ पीआईएल दायर नहीं की जा सकती, इसलिए यह याचिका विचारणीय नहीं है और इसी कारण इसे खारिज किया गया.

मामले में अधिवक्ता निकुंज बर्लिया ने कहा, ”यह मामला मंगलवार को आया था जब राज्य सरकार पेश हुई थी और उन्होंने इस मामले पर निर्देश देने के लिए समय मांगा था. इसलिए आज जब यह मामला अदालत में उठाया गया तो पश्चिम बंगाल राज्य की ओर से विद्वान महाधिवक्ता पेश हुए और उन्होंने इस जनहित याचिका को दायर करने के याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र के बारे में कुछ आपत्तियां उठाईं.”

कोर्ट ने क्यों खारिज का याचिका?

उनकी दलील का मुख्य आधार यह था कि जनहित याचिका किसी दर्शक या दर्शकों में से किसी एक के कहने पर है. यह किसी फिल्म निर्माता, निर्देशक या इस फिल्म के निर्माण में शामिल अभिनेताओं के कहने पर नहीं है. जिसके लिए हमने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के कुछ फैसलों का हवाला दिया था. जहां सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसी ही परिस्थितियों में संरक्षण का आदेश दिया था जहां कोई आधिकारिक प्रतिबंध नहीं था.

सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर विचार कर रहे हैं, तो निकुंज बर्लिया ने कहा कि आदेश अभी अपलोड किया गया है. मैं इसे अपने मुवक्किल के साथ भी साझा करूंगा और जैसा कि मैंने आपको बताया, मेरे मुवक्किल सौमेंदु मुखर्जी, जो सुप्रीम कोर्ट से जुड़े हैं, भी इस मामले में शामिल हैं. यदि हमें लगेगा कि इस मामले में दम है और सुप्रीम कोर्ट में इसे लड़ा जा सकता है, तो हम निश्चित रूप से वहां जाने पर विचार करेंगे.

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इसके साथ ही, जब पूछा गया कि क्या वे फिल्म के निर्देशक और निर्माता से संपर्क करेंगे, तो बर्लिया ने कहा कि हम उनकी ओर से कोई संवाद स्थापित करने की कोशिश करेंगे, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि हमारी लड़ाई उनसे स्वतंत्र है. हमारा उद्देश्य सिर्फ यह है कि दर्शकों का अधिकार सुरक्षित रहे और फिल्म को देखने से कोई कृत्रिम बाधा न बने.

नोट- यह खबर एजेंसी (IANS) फीड से सीधे पब्लिश की गई है. इसमें किसी भी जानकारी को नहीं बदला गया है. खबर को पढ़ने लायाक बनाने के लिए लिए केवल हेडलाइन बदली गई है. वहीं पैराग्राफ से पहले सबहेड जोड़े गए हैं. इस स्टोरी को लेकर भारत एक्सप्रेस की किसी भी तरह की नैतिक जिम्मेदारी नहीं होगी.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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