फैक्ट चेक

भूटान ने नहीं लिया भारत का E20 पेट्रोल? सोशल मीडिया के दावे पर पेट्रोलियम मंत्रालय का बड़ा खुलासा

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि पड़ोसी देश भूटान ने भारत से इथेनॉल-मिश्रित (E20) पेट्रोल खरीदने से मना कर दिया है. इस वायरल दावे के पीछे ईंधन के रखरखाव और वॉटर एब्जॉर्प्शन (पानी सोखने) जैसी तकनीकी दिक्कतों का हवाला दिया जा रहा था. आइए जानते हैं कि भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस वायरल दावे पर क्या सच्चाई बताई है.

सोशल मीडिया पर वायरल यह दावा कि भूटान ने तकनीकी दिक्कतों के कारण भारत से E20 पेट्रोल लेने से मना कर दिया है, पूरी तरह गलत है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि भारतीय कंपनियों द्वारा भूटान को ऐसा कोई ऑफर या प्रस्ताव दिया ही नहीं गया था. सरकार ने इस खबर को भ्रामक बताते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है.

सरकार का स्पष्टीकरण

भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि भूटान ने भारत से E20 पेट्रोल का आयात करने से मना कर दिया है. मंत्रालय ने आधिकारिक बयान (एक्स और फेसबुक पोस्ट) के जरिए स्पष्ट किया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने ऐसा कोई ऑफर भूटान को दिया ही नहीं था और न ही भूटान को E20 पेट्रोल एक्सपोर्ट करने का कोई प्रस्ताव फिलहाल पाइपलाइन में है.

क्या था सोशल मीडिया पर वायरल दावा?

दरअसल, इंटरनेट पर कुछ भ्रामक खबरें वायरल थीं कि भूटान ने भारत से सामान्य पेट्रोल यानी की बिना इथेनॉल मिश्रित मांगा है. वायरल पोस्ट्स में दावा किया गया था कि इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल में ‘हाइड्रॉक्सिल ग्रुप’ होता है जो नमी/पानी को जल्दी सोख लेता है, और भूटान के पास फिलहाल ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है जो इस ईंधन को सुरक्षित स्टोर कर सके. सरकार ने साफ किया है कि यह पूरा दावा मनगढ़ंत है और जनता से केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करने की अपील की है.

भारत का इथेनॉल ब्लेंडेड प्रोग्राम

भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ‘इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम’ को तेजी से बढ़ा रहा है. E20 पेट्रोल का मतलब है- 80 प्रतिशत सामान्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत पर्यावरण-अनुकूल इथेनॉल का मिश्रण. यह कार्यक्रम देश में क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन को घटाने के वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसका भारत में बड़े पैमाने पर सफल रोलआउट किया जा चुका है.

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-भारत एक्सप्रेस

Shubhra Rai

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