दूसरा दिल कैसे काम करता है?
Calf Muscles Health Tips: हम सब जानते हैं कि हमारा दिल हमारे सीने में धड़कता है जो शरीर को जीवन देता है. लेकिन हमारे शरीर में एक और ‘दिल’ है, जो हमारे पैरों में छिपा है. इसकी सेहत का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना हमारे असली दिल का. जी हां, चिकित्सा विज्ञान में हमारी पिंडलियों की मांसपेशियों को ‘दूसरा दिल’ कहा जाता है. यह कोई कविताई नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक सच्चाई है. यह ‘दूसरा दिल’ कैसे काम करता है और क्यों इसके बिना आपका जीवन खतरे में पड़ सकता है, यह जानना बेहद जरूरी है.
हमारी पिंडलियों की मांसपेशियां, जिन्हें अंग्रेजी में काल्फ मसल्स कहा जाता है. इन्हीं काल्फ मसल्स को चिकित्सा विज्ञान में अक्सर ‘दूसरा दिल’ कहा जाता है. आइये जाने यह दिल क्यों है और इसका खयाल कैसे रखें साथ ही यह भी जानें की इसे नजरअंदाज करने से क्या खतरा हो सकता है?
हमारा हृदय तो पूरे शरीर में खून पहुंचाने का काम करता है, लेकिन शरीर के निचले हिस्सों, खासकर पैरों में, जब खून नीचे पहुंचता है, तो उसे वापस ऊपर मतलब दिल की ओर लौटने में काफी मेहनत करनी पड़ती है. यह काम आसान नहीं होता, क्योंकि ग्रैविटी यानी गुरुत्वाकर्षण हमेशा खून को नीचे की ओर खींचता है. यहीं पर पिंडलियों की भूमिका शुरू होती है.
ये भी पढ़ें: डेंगू में बकरी का दूध ‘अमृत’ नहीं ‘जहर’, प्लेटलेट्स के लिए कैसे नुकसानदायक?
जब हम चलते हैं, दौड़ते हैं, या सिर्फ पैरों को हल्का-सा भी हिलाते हैं, तो पिंडलियों की मांसपेशियां सिकुड़ती हैं. यह सिकुड़न नसों पर दबाव बनाती है और एक तरह से खून को ऊपर की ओर ‘पंप’ करती हैं. ठीक उसी तरह जैसे दिल धड़क कर खून को पंप करता है. इस प्रक्रिया को ही ‘मसल पंप मैकेनिज्म’ (सीएमपी) कहा जाता है. यही वजह है कि इन मांसपेशियों को “दूसरा दिल” कहा गया है.
जून 2024 में प्रकाशित मेयो क्लीनिक के अध्ययन में पाया कि जिन लोगों में सीएमपी की कार्यक्षमता कम थी, उनकी मृत्यु दर अधिक थी. अध्ययन में देखा गया कि सीएमपी की कमी कई बीमारियों की जड़ बनी. 2020 में दुनिया की सबसे बड़ी चिकित्सा लाइब्रेरी ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में छपे शोध पत्र के मुताबिक अगर सीएमपी ठीक से काम नहीं करता तो कई बीमारियों की गिरफ्त में आप आ सकते हैं और हृदयाघात भी हो सकता है.
इस दूसरे दिल का ठीक से काम करना हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है. यदि यह ठीक से काम न करे, तो पैरों में खून जमने लगता है, जिससे सूजन, भारीपन, दर्द और वैरिकोज नसों की समस्या हो सकती है. लंबे समय तक बैठे रहने या खड़े रहने की स्थिति में जब हम पैरों को नहीं हिलाते, तो यही समस्याएं और बढ़ जाती हैं. इसके अलावा, रक्त संचार में बाधा आने पर खून के थक्के बनने का खतरा भी बढ़ जाता है, जो फेफड़ों या दिल तक पहुंच कर जानलेवा साबित हो सकते हैं.
ये भी पढ़ें: बच्चों में कैसे फैलता है खतरनाक टोमेटो फीवर? जानें लक्षण और बचाव
इस लिए अगली बार जब आप चलें, रेस लगाएं या सीढ़ियां चढ़ें तो एक बार रुककर पैरों पर नजर जरूर दौड़ाएं और ठहरकर उनका आभार जताएं क्योंकि वे सिर्फ आपको आगे ही नहीं बढ़ाते, बल्कि दिल का बोझ भी बांटते हैं.
नोट- यह खबर एजेंसी (IANS) फीड से सीधे पब्लिश की गई है. इसमें किसी भी जानकारी को नहीं बदला गया है. खबर को पढ़ने लायाक बनाने के लिए लिए केवल हेडलाइन बदली गई है. वहीं पैराग्राफ से पहले सबहेड जोड़े गए हैं. इस स्टोरी को लेकर भारत एक्सप्रेस की किसी भी तरह की नैतिक जिम्मेदारी नहीं होगी.
नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में बॉलीवुड अभिनेता ने ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक और…
दिल्ली-NCR और पूरे उत्तर भारत में रात 10:23 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए.…
वाराणसी के छोटी शीतला घाट स्थित शिव मंदिर का नाम 'पाकिस्तानेश्वर' से बदलकर 'सिंधु गंगेश्वर…
DRDO ने 21 किमी की ऊंचाई पर 'हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम' (HAPS) का सफल परीक्षण…
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम केविन रुड ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के मन में पीएम…
उत्तर प्रदेश में 'प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना' से 2,942 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप सोलर लग…