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इन दिनों आपने जामुन खाए? औषधीय गुणों से भरा नुक्कड़ पर मिलने वाला यह फल, दिल्‍ली-NCR में ₹200 किलो बिक रहा

Jamun Seeds Benefits: मानसून की दस्तक के साथ ही बाजारों में काले-रसीले जामुन दिखाई देने लगते हैं. स्वाद में खट्टा-मीठा लगने वाला यह फल सिर्फ जीभ का स्वाद ही नहीं बदलता, बल्कि सेहत का खजाना भी है. अक्सर लोग जामुन खाकर उसके बीजों को कूड़े में फेंक देते हैं, लेकिन हेल्‍थ एक्‍सपर्ट कहते हैं कि जामुन के बीज फल से भी ज्यादा गुणकारी होते हैं. आयुर्वेद में जामुन के बीजों को कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अचूक औषधि माना गया है, जिन्हें सुखाकर पाउडर या हर्बल ड्रिंक के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

मानसून के सीजन में जामुन फल खाने के 5 फायदे

ब्लड शुगर पर नियंत्रण: जामुन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बेहद कम होता है, जो अचानक शुगर बढ़ने के खतरे को रोकता है.

हीमोग्लोबिन में सुधार: इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी और आयरन पाया जाता है, जो शरीर में खून की कमी (एनीमिया) को दूर करता है.

दिल की सेहत: जामुन में मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है और हार्ट अटैक के जोखिम को कम करता है.

त्वचा में चमक: इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण चेहरे के कील-मुंहासों और झुर्रियों को खत्म कर त्वचा को चमकदार बनाते हैं.

मसूड़ों की मजबूती: जामुन के एंटी-बैक्टीरियल गुण मुंह की बदबू को दूर करते हैं और मसूड़ों से खून आने की समस्या को रोकते हैं.

डायबिटीज के मरीजों के लिए रामबाण हैं इसके बीज

जामुन के बीजों में ‘जाम्बोलिन’ (Jamboline) और ‘जाम्बोसिन’ (Jambosine) नाम के विशेष तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में स्टार्च को शुगर (शर्करा) में बदलने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं. यह रक्त में इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित करने में बेहद मददगार है. इसके अलावा, बीजों का पाउडर पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है, पेट दर्द, गैस और दस्त जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है, और बॉडी को डिटॉक्स करने (विषाक्त पदार्थ बाहर निकालने) में मदद करता है.

भारत में जामुन का राज्यवार उत्पादन (डेटा 2025-26)

कृषि मंत्रालय और बागवानी (Horticulture) के वर्ष 2025-26 के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, भारत में जामुन का वार्षिक उत्पादन लगभग 90,000 से 1,00,000 मीट्रिक टन के बीच दर्ज किया गया है. प्रमुख उत्पादक राज्यों का विवरण इस प्रकार है:

उत्तर प्रदेश: देश के कुल उत्पादन में लगभग 30-32% हिस्सेदारी के साथ यूपी शीर्ष पर है. यहाँ के मैदानी इलाकों में बड़े पैमाने पर जामुन के बाग हैं.

महाराष्ट्र: लगभग 18-20% हिस्सेदारी. कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र में इसकी व्यावसायिक खेती तेजी से बढ़ी है.

तमिलनाडु और आंध्र: संयुक्त रूप से लगभग 15% हिस्सेदारी. यहाँ कुछ विशेष किस्में साल में दो बार भी फल देती हैं.

गुजरात और मध्य प्रदेश: प्रत्येक राज्य में लगभग 10-12% का योगदान है.

बिहार और झारखंड: लगभग 8-10% उत्पादन शेयर, जहाँ स्थानीय स्तर पर जंगली और हाइब्रिड दोनों किस्में मिलती हैं.

त्रेतायुग और द्वापरयुग से जुड़ा है जामुन का इतिहास

भारतवर्ष में जामुन का इतिहास कोई नया नहीं है, बल्कि यह लाखों साल पुराना है. सनातन मान्यताओं के अनुसार, पौने 9 लाख साल पहले जब त्रेतायुग था, तब रामायण काल में भगवान श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के दौरान कंद-मूल और जामुन जैसे प्राकृतिक फलों के सेवन का स्पष्ट उल्लेख मिलता है. वहीं, साढ़े पांच हजार साल पहले द्वापर युग में भी भगवान श्री कृष्ण के काल में जामुन, बेर और अमरूद जैसे पौष्टिक फल बहुतायत में खाए जाते थे. भारत में जामुन की दर्जनों किस्में पाई जाती हैं, जिनमें से कुछ किस्में अलग-अलग मौसमों में भी फल देती हैं, हालांकि मुख्य रूप से यह बारिश के मौसम का ही राजा है.

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Vijay Ram

'भारत एक्सप्रेस' में चीफ सब एडिटर। न्‍यूज वेबसाइट पर एवरग्रीन स्‍टोरीज, क्रिएटिव/स्‍पेशल प्रजेंटेशन, हाइलाइट्स के अगुआ। संस्‍था के शुरुआती दौर से दिन-रात हर मौके पर दम-दिमाग झोंककर स्वयं को तपाया। अब तक 8,000 से ज्‍यादा पोस्ट्स पब्लिश कर चुके, 1K+ बाइलाइन हुईं। 'भारत एक्सप्रेस' के CMD एवं एडिटर-इन-चीफ उपेन्द्र राय जी के प्रोग्राम्स (कॉन्क्लेव), और आर्टिकल्‍स को Bharatexpress.com पर प्रमुखता से कवर करते हैं। जर्नलिज्‍म में इनके 10+ वर्ष बीते। यहां से पहले एबीपी इंटरनेशनल, वनइंडिया हिंदी, राजस्‍थान पत्रिका और भास्कर ग्रुप में सेवा दे चुके। देश-विदेश, सैन्य-रणनीति, स्पेस साइंस, ऑफबीट, धर्म-अध्यात्म की खबरों में रुचि।

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