मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह के इस्तीफे के बाद, बीजेपी ने राज्य में नया नेतृत्व तय करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. पार्टी की ओर से नॉर्थईस्ट के कोऑर्डिनेटर संबित पात्रा ने सोमवार को इंफाल में बीजेपी विधायकों के साथ लंबी बैठकें कीं. इनमें वे विधायक भी शामिल थे जो बिरेन सिंह के खिलाफ थे और वे भी जो उनके समर्थन में थे.
बीजेपी नेतृत्व जल्द से जल्द नए मुख्यमंत्री पर सहमति बनाना चाहता है ताकि राज्य में स्थिरता बनी रहे. हालांकि, बिरेन सिंह फिलहाल अंतरिम मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल रहे हैं.
बीजेपी सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति शासन का विकल्प पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है, लेकिन पार्टी इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है. पार्टी चाहती है कि मणिपुर के विधायक आपसी सहमति से नया मुख्यमंत्री चुनें. यदि कोई निर्णय नहीं हुआ, तो राष्ट्रपति शासन एकमात्र विकल्प बच सकता है.
मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं, जिनमें से बीजेपी के 37 विधायक हैं. इनमें 7 विधायक कुकी-जो समुदाय से हैं जो मई 2023 में हिंसा भड़कने के बाद से विधानसभा सत्रों में भाग नहीं ले रहे हैं.
कुकी-जो समुदाय के नेता स्पष्ट कर चुके हैं कि वे बिरेन सिंह की जगह किसी अन्य मीटी समुदाय के नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने को स्वीकार नहीं करेंगे. हालांकि, इस मुद्दे पर कुकी-जो समुदाय के विधायक अभी तक सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं बोले हैं.
बीजेपी के अंदर कुछ प्रमुख नाम नए मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए हैं.
युमनाम खेमचंद सिंह: युमनाम खेमचंद सिंह बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और बिरेन सिंह के मुखर आलोचकों में से एक माने जाते हैं. 2017 से 2022 तक वे विधानसभा अध्यक्ष भी रह चुके हैं. खेमचंद सिंह को आरएसएस का समर्थन प्राप्त है. वे मणिपुर में आरएसएस के करीबी हैं और संगठन लंबे समय से उन्हें आगे बढ़ा रहा है. वे सभी गुटों को साथ लेकर चलने वाले नेता माने जाते हैं और कट्टर विचारधारा से दूर रहते हैं.
ठोकचोम सत्यब्रत सिंह: वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष ठोकचोम सत्यब्रत सिंह भी इस दौड़ में हैं. वे बिरेन सिंह के पहले कार्यकाल में मंत्री पद पर रह चुके हैं. पार्टी के अंदर कुछ विधायकों का समर्थन उनके साथ है, जिससे वे एक मजबूत दावेदार बन सकते हैं.
थोंगम बिस्वजीत सिंह: थोंगम बिस्वजीत सिंह भी नए मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं. वे बिरेन सरकार में दोनों कार्यकाल के दौरान मंत्री रहे. 2017 और 2022 के चुनावों के बाद वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे, लेकिन तब वे पीछे रह गए थे. 2017 में जब बीजेपी ने मणिपुर में पहली बार सरकार बनाई, तब बिस्वजीत महज दो विधायकों में से एक थे, जो पहले से पार्टी में थे. बाकी अधिकांश विधायक कांग्रेस से आए थे या राजनीति में नए थे.
बीजेपी नेतृत्व जल्द ही राज्य के विधायकों के साथ बैठक करेगा. बीजेपी के पूर्वोत्तर प्रभारी सम्बित पात्रा सभी दावेदारों के नामों पर विचार कर रहे हैं. वे कई दौर की बैठकों के बाद संभावित नाम केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेंगे. इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व विधायकों के साथ बैठक कर अंतिम निर्णय लेगा.
फिलहाल, पार्टी चाहती है कि जल्द से जल्द नया मुख्यमंत्री चुना जाए और राष्ट्रपति शासन लागू करने की नौबत न आए.
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-भारत एक्सप्रेस
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