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बेटे को खोने के बाद पिता का छलका दर्द, पीएम मोदी ने अग्निवेश अग्रवाल को दी श्रद्धांजलि

वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल आज के ही दिन असहनीय पीड़ा से गुजर रहे हैं. उनके 49 वर्षीय बेटे, अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में निधन हो गया है. इस खबर ने न केवल व्यापार जगत को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर गहरा दुख जताते हुए परिवार को ढांढस बंधाया है.

असमय निधन बहुत ही दुखद: PM Modi

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर अनिल अग्रवाल की पोस्ट को साझा करते हुए लिखा कि श्री अग्निवेश अग्रवाल का असमय निधन बहुत ही चौंकाने वाला और दुखद है.

पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, ‘इस मार्मिक श्रद्धांजलि में आपके दुख की गहराई साफ झलकती है. प्रार्थना है कि आपको और आपके परिवार को लगातार शक्ति और हिम्मत मिले. ओम शांति.’

हादसे से लेकर अस्पताल तक का संघर्ष

अग्निवेश की मौत की वजह एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा बनी. अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनका बेटा अपने दोस्तों के साथ अमेरिका में स्कीइंग करने गया था, जहाँ उसका एक्सीडेंट हो गया. उसे न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में भर्ती कराया गया था. शुरुआती इलाज के बाद परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द ठीक होकर घर लौट आएगा, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. अचानक आए कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया.

चुलबुला बचपन और सादगी भरा व्यक्तित्व

अपने बेटे को याद करते हुए अनिल अग्रवाल ने पुरानी यादों के झरोखे खोल दिए. उन्होंने बताया कि 3 जून 1976 को पटना के एक मध्यमवर्गीय परिवार में अग्निवेश का जन्म हुआ था. वह बचपन में बहुत चंचल और अपनी बहन प्रिया के लिए बेहद प्रोटेक्टिव था. अजमेर के मेयो कॉलेज से पढ़ाई करने वाले अग्निवेश सिर्फ एक सफल बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि बॉक्सिंग चैंपियन, घुड़सवार और एक बेहतरीन म्यूजिशियन भी थे.

उन्होंने ‘फुजैराह गोल्ड’ जैसी कंपनी खड़ी की और ‘हिंदुस्तान जिंक’ के चेयरमैन के रूप में जिम्मेदारी निभाई. लेकिन इतनी सफलता के बावजूद वह जमीन से जुड़े रहे. उनके पिता कहते हैं, “वह मेरा बेटा ही नहीं, मेरा सबसे अच्छा दोस्त और मेरी दुनिया था.”

बेटे के सपनों को अब पिता देगा उड़ान

इस दुख की घड़ी में भी अनिल अग्रवाल ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को नहीं भुलाया है. उन्होंने साझा किया कि उनका और अग्निवेश का सपना भारत को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने का था. अग्निवेश हमेशा चाहता था कि देश का कोई बच्चा अनपढ़ न रहे और हर हाथ को काम मिले.

अनिल अग्रवाल ने भावुक होते हुए लिखा, “अभी तो साथ मिलकर बहुत कुछ करना था अग्नि. तुम्हें पूरी जिंदगी जीनी थी. कितने सपने थे, कितने अरमान थे, सब कुछ अधूरा ही रह गया. समझ नहीं आता, तुम्हारे बिना अब जिंदगी कैसे कटेगी बेटा. तुम्हारे बिना जिंदगी हमेशा अधूरी रहेगी, लेकिन तुम्हारे सपने अधूरे नहीं रहने दूंगा.”

ये भी पढ़ें: सोमनाथ का काला सच और अटूट आस्था की जीत! पीएम मोदी ने क्यों कहा- ‘हमें कोई डिगा नहीं सका’

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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