Atharva Chaturvedi Supreme Court EWS Reservation Case: मध्य प्रदेश के जबलपुर के 19 साल के अथर्व चतुर्वेदी ने बिना लॉ की डिग्री के सुप्रीम कोर्ट में केस जीतकर सबको चौंका दिया है. अथर्व ने दो बार नीट पास की और 530 अंक हासिल किए, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के तहत निजी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिला. राज्य सरकार ने निजी संस्थानों में EWS आरक्षण लागू करने की स्पष्ट नीति नहीं बनाई थी. हाईकोर्ट में हार के बाद अथर्व ने खुद ऑनलाइन स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की और जनवरी में सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कर केस जीत लिया. आइए जानते हैं SLP क्या है और इसे ऑनलाइन कैसे दाखिल कर सुनवाई कराई जा सकती है.
जब हाईकोर्ट या किसी निचली अदालत का फैसला आपके खिलाफ जाता है और सुप्रीम कोर्ट में सीधे अपील का कोई रास्ता नहीं होता, तब SLP का सहारा लिया जाता है. यह सुप्रीम कोर्ट से स्पेशल परमिशन मांगने जैसा है. SLP के जरिए सुप्रीम कोर्ट किसी भी अदालत या ट्रिब्यूनल के फैसले, आदेश या निर्देश के खिलाफ अपील करने की अनुमति दे सकता है.
यह केस में गंभीर कानूनी गलती, संविधान के उल्लंघन या न्याय के हित में जरूरी मामलों में इस्तेमाल होता है. ध्यान रहे, सैन्य न्यायाधिकरण के फैसलों के खिलाफ SLP नहीं दाखिल की जा सकती. SLP दाखिल करने की समय सीमा भी तय है कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 90 दिन और सर्टिफिकेट ऑफ अपीलिबिलिटी से इनकार के बाद 60 दिन.
SLP दाखिल करना अब बहुत आसान हो गया है. अगर आपको कानून की बेसिक जानकारी है तो आप खुद भी SLP फाइल कर सकते हैं. इसके प्रोसेस की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जाकर इसे ऑनलाइन ई-फाइलिंग के जरिए दाखिल किया जा सकता है. सबसे पहले हाईकोर्ट या निचली अदालत के फैसले की कॉपी और केस से जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स इकट्ठा करें. केस का बैकग्राउंड संक्षेप में तैयार करें और SLP का ड्राफ्ट बनाएं.
इसके बाद एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) से रिव्यू और साइन करवाएं. सिर्फ AOR ही सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल कर सकता है. SLP को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करें, जिसके ई-फाइलिंग या फिजिकल सबमिशन दोनों तरीके उपलब्ध हैं. अगर SLP में कोई कमी नहीं मिलती तो कोर्ट इसे एडमिशन हियरिंग के लिए लिस्ट करता है. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट तय करता है कि मामला सुनवाई योग्य है या नहीं. अगर एक्सेप्ट होता है तो नोटिस जारी होता है.
सुप्रीम कोर्ट में अब ऑनलाइन सुनवाई बहुत आम हो गई है. अगर आप सुनवाई के लिए कोर्ट नहीं आ सकते तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का ऑप्शन चुन सकते हैं. ई-फाइलिंग पोर्टल पर SLP दाखिल करने के बाद कोर्ट रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट्स की जांच करती है. सब सही होने पर मामले को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाता है. सुनवाई से एक दिन पहले कोर्ट वर्चुअल हियरिंग (VC) का लिंक AOR के रजिस्टर्ड ईमेल और मोबाइल पर भेजता है.
वहीं इसकी सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होती है. फैसला आने के बाद ऑर्डर डिजिटली साइन होकर कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड होता है, जिसे आप आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं. अथर्व चतुर्वेदी ने भी इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल किया और बिना लॉ पढ़े सुप्रीम कोर्ट में केस जीत लिया.
अथर्व का केस दिखाता है कि सही जानकारी और हिम्मत से कोई भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है. EWS आरक्षण न मिलने पर हाईकोर्ट से हारने के बाद उसने खुद ऑनलाइन SLP दाखिल की और जीत हासिल की. यह बताता है कि कानूनी प्रक्रिया अब आम आदमी के लिए भी आसान हो गई है. अगर आपके साथ कोई अन्याय हुआ है तो हिम्मत रखें, SLP का रास्ता आज भी खुला है.
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-भारत एक्सप्रेस
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