Beohari NAPA President Controversy: अनिल पाण्डेय/शहडोल: मध्य प्रदेश का शहडोल जिले का ब्यौहारी इलाका एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई विकास कार्य नहीं बल्कि नगर पालिका अध्यक्ष राजन गुप्ता का ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’ है. ब्यौहारी नगर पालिका अध्यक्ष एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं. इस बार उनका आमना-सामना वन विभाग की टीम से हुआ, जहां उन्होंने न सिर्फ सरकारी काम रुकवाया बल्कि कर्मचारियों के साथ जमकर तू-तू, मैं-मैं भी की. इस पूरी घटना का एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान हैं.
जानकारी के मुताबिक, वन विभाग की टीम अपनी तय सीमा पर मुनारा (सीमा चिह्न) निर्माण का काम करवा रही थी. जैसे ही इसकी खबर नगर पालिका अध्यक्ष राजन गुप्ता को लगी, वे अपने लाव-लश्कर के साथ मौके पर पहुंच गए. आरोप है कि वहां पहुंचते ही उन्होंने निर्माण कार्य रुकवा दिया और वन विभाग के कर्मचारियों पर बरस पड़े. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह तीखी बहस हो रही है. इस दौरान नपा अध्यक्ष का अंदाज काफी सख्त और कथित तौर पर ‘दादागिरी’ भरा नजर आया.
सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल अपने विभाग के निर्देशों का पालन कर रहे थे, लेकिन अध्यक्ष जी की दखलअंदाजी ने मौके पर हंगामा खड़ा कर दिया. काफी देर तक चले इस हंगामे की वजह से काम तो रुका ही, साथ ही सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधि के बीच का टकराव सार्वजनिक हो गया.
राजन गुप्ता के लिए विवादों में रहना कोई नई बात नहीं है. स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर हो रही चर्चाओं की मानें तो इससे पहले भी वे कई बार सुर्खियों में रह चुके हैं. उन पर पहले भी टोल प्लाजा के कर्मचारियों के साथ बदसलूकी और अभद्र व्यवहार करने के गंभीर आरोप लग चुके हैं. बार-बार सामने आ रही इन घटनाओं ने अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठाना शुरू कर दिया है. लोग सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं कि क्या सत्ता की हनक में सरकारी कर्मचारियों को ऐसे ही अपमानित किया जाता रहेगा?
जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, ब्यौहारी और पूरे शहडोल जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया. वीडियो में जिस तरह की भाषा और बॉडी लैंग्वेज का इस्तेमाल हुआ है, उसे लेकर आम लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है. लोग इसे सीधे तौर पर सरकारी काम में बाधा और पद का दुरुपयोग मान रहे हैं.
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और वन विभाग के आला अधिकारियों पर टिकी हैं. क्या प्रशासन इस बार कोई कड़ा कदम उठाएगा या फिर पहले की तरह इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? वन विभाग के कर्मचारी अंदरूनी तौर पर इस व्यवहार से खासे नाराज बताए जा रहे हैं, और कयास लगाए जा रहे हैं कि वे इसकी लिखित शिकायत उच्चाधिकारियों से कर सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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