देश की राजनीति और कानूनी इतिहास में एक और बड़ा अध्याय (Bhojshala High Court Verdict) जुड़ गया है. दरअसल मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक ‘भोजशाला’ को लेकर इंदौर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष के हक में मुहर लगा दी है.
कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यह स्थान मूल रूप से राजा भोज द्वारा स्थापित ‘वाग्देवी सरस्वती का मंदिर’ और संस्कृत शिक्षा का केंद्र था, जहां हिंदुओं की पूजा की निरंतरता कभी खत्म नहीं हुई. लेकिन इस फैसले की गूंज सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है. इस आदेश ने देश के अन्य बड़े धार्मिक विवादों काशी और मथुरा की कानूनी लड़ाई को भी एक नई संजीवनी दे दी है.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जिस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया, वह था भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की साइंटिफिक रिपोर्ट. कोर्ट ने साफ कहा कि ‘अयोध्या मामले’ में जो कानूनी मिसालें कायम हुई थीं, उसी आधार पर एएसआई के निष्कर्षों को अकाट्य सत्य माना जा सकता है.
ध्यान देने वाली बात ये रही कि जिस तरह अयोध्या में एएसआई की खुदाई और रिपोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का आधार तैयार किया था. भोजशाला में दोहराव: ठीक वैसे ही भोजशाला में भी एएसआई के वैज्ञानिक सर्वे ने मुस्लिम पक्ष की दलीलों को जमींदोज कर दिया और हिंदुओं को पूर्ण पूजा का अधिकार मिल गया.
भोजशाला के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद, अब देश के चार सबसे बड़े धार्मिक विवादों के ताजा ‘स्टेटस’ को समझना बेहद जरूरी है:
1. अयोध्या (राम जन्मभूमि):
वर्तमान स्थिति: इस महा-विवाद पर साल 2019 में ही सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आ चुका है. सर्वोच्च अदालत ने पूरी जमीन हिंदू पक्ष को सौंपी थी, जिसके बाद वहां भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है.
आगे क्या: यह कानूनी विवाद अब पूरी तरह सुलझ चुका है. कोर्ट के आदेश पर मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अलग से जमीन दे दी गई है.
2. भोजशाला (धार, मध्य प्रदेश):
वर्तमान स्थिति: इस मामले में आज ही इंदौर हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए माना कि यह मूल रूप से वाग्देवी का मंदिर ही था. अदालत ने हिंदुओं को परिसर में पूर्ण पूजा का अधिकार दे दिया है.
आगे क्या: हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब गेंद केंद्र सरकार और एएसआई (ASI) के पाले में है, जिन्हें इसके प्रबंधन की रूपरेखा तय करनी है. वहीं, मुस्लिम पक्ष इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है.
3. ज्ञानवापी (काशी, उत्तर प्रदेश):
वर्तमान स्थिति: यहाँ अदालती प्रक्रिया तेजी से जारी है. परिसर का एएसआई सर्वे पहले ही पूरा हो चुका है और कोर्ट के आदेश पर हिंदू पक्ष को ‘व्यास जी के तहखाने’ में पूजा का अधिकार भी मिल चुका है.
आगे क्या: फिलहाल यह मामला जिला कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के बीच कानूनी बारीकियों में उलझा हुआ है. परिसर के मुख्य मालिकाना हक को लेकर अदालत का अंतिम फैसला आना अभी बाकी है.
4. श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा, उत्तर प्रदेश):
वर्तमान स्थिति: यह विवाद अभी शुरुआती कानूनी चरण में है. शाही ईदगाह मस्जिद के वैज्ञानिक सर्वे को लेकर सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के बीच लगातार कानूनी बहस चल रही है.
आगे क्या: हिंदू पक्ष लगातार ज्ञानवापी और भोजशाला की तर्ज पर यहाँ भी एएसआई (ASI) सर्वे कराने की मांग पर अड़ा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इस कार्रवाई को रोकने के लिए ‘प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ की ढाल ले रहा है.
इस फैसले (Bhojshala High Court Verdict) के बाद कानूनी गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा ‘प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ (उपासना स्थल अधिनियम) को लेकर छिड़ गई है. यह कानून कहता है कि 15 अगस्त 1947 को जो धार्मिक स्थल जिस रूप में था, वह वैसा ही रहेगा (सिर्फ अयोध्या को इससे छूट थी).
लेकिन भोजशाला मामले में कोर्ट ने साफ किया कि चूंकि यह 1904 से (यानी आजादी से बहुत पहले से) ही ‘स्मारक संरक्षण अधिनियम’ के तहत एक संरक्षित स्मारक था, इसलिए इस पर पुरानी व्यवस्थाएं और ऐतिहासिक साक्ष्य लागू होते हैं. यही दलील अब काशी और मथुरा के मामलों में भी हिंदू पक्ष को बेहद मजबूत स्थिति में ला खड़ा करती है.
हाईकोर्ट के इस फैसले (Bhojshala High Court Verdict) पर मुस्लिम पक्ष (शहर काजी) ने कड़ी नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि फैसले के कई तकनीकी पहलुओं पर दोबारा विचार की जरूरत है और वे जल्द ही देश की सबसे बड़ी अदालत (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाएंगे. दूसरी तरफ, प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से धार और आसपास के इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया है ताकि कानून-व्यवस्था न बिगड़े.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
BRICS Summit में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समुद्र में संकट का सामना करने वाले सीफेयरर्स…
Monkey Viral Video Phone Snatching: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक बंदर लड़की का…
Supreme Court: राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणापत्र के लिए एक मानक प्रारूप तय करने की…
सुप्रीम कोर्ट ने कारों में सीट बेल्ट, चाइल्ड सेफ्टी सिस्टम और फर्स्ट एड किट को…
केरलम के वायनाड जिले की कलेक्टर और 2017 बैच की आईएएस अधिकारी मेगाश्री डी आर…
Supreme Court: देश में नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका…