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एक ही रूट पर 8 हजार और 18 हजार का किराया क्यों? हवाई टिकटों की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को घेरा

सुप्रीम कोर्ट ने त्योहार और छुट्टियों के दौरान हवाई जहाज के टिकटों में भारी बढ़ोतरी के मामले में दायर याचिका पर 13 जुलाई को सुनवाई करेगा. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र सरकार से कहा कि इस विसंगति के कारण लोगों को कुछ राहत देने का प्रयास करें. कोर्ट ने कहा कि एक ही दिन, एक ही मार्ग पर उड़ानों के लिए एक एयरलाइन इकोनॉमी क्लास में 8 हजार रुपए और दूसरी एयरलाइन 18 हजार रुपए वसूलती है.

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को जवाब दाखिल करने के लिए एक हफ्ते का समय दे दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान डीजीसीए की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि एक नया कानून लागू हो गया है, नियमों पर परामर्श प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कहा कि हम सभी पहलुओं पर विचार करेंगे. मेहता ने कहा कि मैं समस्या का खंडन नही कर रहा हूं, लेकिन इसका समाधान वैधानिक नियमो के माध्यम से होना चाहिए. इसपर याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि जजों को प्रभावी आदेश पारित करने चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किराए पर जताई चिंता

कोर्ट ने पूछा कि नियम बनाने में आपको कितना समय लगेगा? इसपर एसजी मेहता ने कहा कि पुराने नियम लागू हैं, नए नियम प्रक्रियाधीन हैं. कोर्ट ने कहा कि यह जीवन भर का उद्देश्य है. ऐसा नहीं है कि आपने केवल गर्मी की छुट्टियों के लिए याचिका दायर की है. याचिकाकर्ता ने कहा कि आजकल किराया 300 फीसदी तक बढ़ रहा है. इसपर कोर्ट ने कहा कि वकीलों की फीस भी 400 फीसदी तक बढ़ जाती है, अब क्या करें? पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि हवाई किराए में होने वाले बेतहाशा उतार चढ़ाव में दखल दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

एयरलाइंस द्वारा मनमाने शुल्क और कीमतों में बदलाव

दायर याचिका में दावा किया गया था कि वर्तमान में किसी भी ऑथोरिटी के पास हवाई किराए या अतिरिक्त शुल्कों की समीक्षा करने या उनकी अधिकतम सीमा तय करने की शक्ति नहीं है. इसी का फायदा उठाकर एयरलाइंस गुप्त शुल्कों और कीमतों में मनमाने बदलाव के जरिए उपभोक्ताओं का शोषण कर रही है. याचिका में यह भी कहा गया है कि एयरलाइंस के अनियंत्रित, अपारदर्शी और शोषणकारी व्यवहार जैसे कि मनमाना किराए बढ़ाना, सेवाओं में एकतरफा कटौती, जमीनी स्तर पर शिकायत निवारण की कमी और अनुचित डायनामिक प्राइसिंग एल्गोरिदम-नागरिकों के समानता, आवाजाही की स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जीने के मौलिक अधिकारों का सीधे तौर पर उल्लंघन करता है.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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