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लोकतंत्र की हत्या या कानून का राज? भुवनेश्वर में राकेश टिकैत और सांसद सुधाकर सिंह की गिरफ्तारी पर छिड़ा संग्राम

उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर में चल रहे किसान आंदोलन ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे कई बड़े किसान नेताओं और जनप्रतिनिधियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. इनमें बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह, भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत, बिहार प्रभारी दिनेश सिंह और स्थानीय किसान नेता मन्नवर सहित कई अन्य किसान साथी शामिल हैं.

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, भुवनेश्वर में पिछले कुछ दिनों से किसान अपनी विभिन्न समस्याओं और अधिकारों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. इस प्रदर्शन को मजबूती देने के लिए देशभर के बड़े किसान नेता वहां जुट रहे थे. इसी कड़ी में राकेश टिकैत, सांसद सुधाकर सिंह, बिहार प्रभारी दिनेश सिंह और स्थानीय नेता मन्नवर भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे.

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो माहौल तब गरमा गया जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका. देखते ही देखते पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए इन तमाम नेताओं और उनके साथ मौजूद दर्जनों किसान साथियों को गिरफ्तार कर लिया.

लोकतंत्र पर प्रहार या कानून व्यवस्था?

इस गिरफ्तारी के बाद किसान संगठनों में गुस्सा है. नेताओं का कहना है कि वे केवल किसानों की जायज मांगों के लिए आवाज उठा रहे थे. सांसद सुधाकर सिंह के समर्थकों और किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है. उनका कहना है कि सरकार संवाद करने के बजाय पुलिस के दम पर किसानों की आवाज को कुचलना चाहती है.

वहीं, प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की भीड़ या विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित रखना उनकी जिम्मेदारी है, ताकि शहर में शांति बनी रहे.

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर किसानों के मुद्दों को केंद्र में ला दिया है. किसान नेताओं का साफ कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे. उनका संघर्ष जारी रहेगा और वे हर हाल में अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे.

आम लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. कुछ लोग इसे किसानों के अधिकारों पर हमला मान रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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