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सिर्फ मराठी मानुस ही नहीं! मुंबई के 94 साल के इतिहास में इन गैर-मराठी दिग्गजों ने भी संभाली शहर की कमान, कितने हिंदी भाषी बने मेयर?

Mumbai Mayor Race: मुंबई में बीएमसी चुनाव (BMC Election) के बाद मेयर पद के लिए कवायद तेज हो गई है. एक तरफ महायुति गठबंधन (बीजेपी-शिंदे गुट) है, जो चुनाव के बाद 118 सीटों के साथ महापौर बनने के लिए मजबूत दावा पेश कर रहा है. वहीं दूसरी तरफ शिवसेना (UBT) भी अपना मेयर बनाने के लिए गठजोड़ में जुटी हुई है. UBT के सासंद सजय राउत (Sanjay Raut) का दावा है कि उनके पास सिर्फ 6 सीटों की कमी है, जिसके बाद मुंबई का मेयर फिर से एक मराठा ही होगा.

संजय राउत के इस दावे के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि दुनिया की सबसे समृद्ध बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में अब तक कितनी बार गैर-मराठी नेता मेयर बने हैं. इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि हिंदी भाषी नेताओं को कितनी बार मुंबई के महापौर पद तक पहुंचने का अवसर मिला है.

इतने गैर-मराठी बने मेयर ( Non-Marathi became mayor’s in mumbai)

मुंबई में मेयर का पद 1931 से अस्तित्व में आया, जब नगर पालिका अध्यक्ष के पदनाम को औपचारिक रूप से बदल दिया गया. गैर-मराठी मेयरों की बात करें तो बीते 94 वर्षों के इतिहास में लगभग 35 ऐसे लोग मेयर बने, जिनकी मातृभाषा मराठी नहीं थी. आजादी से लेकर 1968 तक 21 में से 15 मेयर गैर-मराठी रहे.

इनमें गुजराती, पारसी, मुस्लिम, ईसाई, दक्षिण भारतीय और उत्तर भारतीय समुदायों से आने वाले नेता शामिल थे. इस दौर के बड़े नामों में सर जे.बी. बोमन-बेहराम का नाम भी शामिल है, जो 1931-32 में मुंबई के पहले मेयर बने। इसके अलावा 1942-43 में यूसुफ मेहरअली, 1949-52 में एस.के. पाटिल और 1982-83 में डॉक्टर प्रभाकर पाई भी मेयर रहे.

30–35 साल तक मराठी मेयरों का दबदबा (Marathi mayor’s in mumbai)

1973 के बाद से मुंबई के मेयर पद की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला. शिवसेना के उभार के साथ ही बीएमसी चुनावों में मराठी अस्मिता को लेकर राजनीति तेज हुई. शिवसेना के सुधीर जोशी मुंबई के पहले मराठी भाषी मेयर बने.

इसके बाद अगले तीन दशकों में शिवसेना बीएमसी में एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरी और मेयर का पद धीरे-धीरे मराठी भाषी नेताओं के पास केंद्रित होता चला गया. बीते 30 से 35 वर्षों में मेयर पद पर लगभग पूरी तरह से मराठी बोलने वाले नेताओं का ही कब्जा रहा है.

मुंबई के कितने हिंदी भाषी मेयर बने? (Hindi mayor’s in mumbai)

बीएमसी के मेयर पद पर अब तक हिंदी भाषी नेता बेहद कम संख्या में नजर आए हैं. गौरतलब है कि मुंबई में बड़ी हिंदी भाषी आबादी होने के बावजूद इस समुदाय के नेताओं के लिए मेयर बनना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है.

बीएमसी के मेयर सूची पर नजर डालें तो अब तक केवल दो हिंदी भाषी नेताओं को यह मौका मिला है. पहले थे मुरलीधर देवड़ा, जिन्हेंने 1977-78 में मेयर के रूप में कार्य किया. मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले मुरलीधर देवड़ा आगे चलकर कांग्रेस के बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री बने. दूसरे हिंदी भाषी मेयर थे आर.आर. सिंह, उन्होंने 1993 से 1994 के दौरान यह पद संभाला. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के थे और कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे. उन्हें मुंबई का आखिरी हिंदी भाषी मेयर माना जाता है.


ये भी पढ़ें: Mumbai Mayor Race: ‘हमें 6 सीटों की कमी’, संजय राउत का बड़ा दावा, शिंदे पर भी साधा निशाना


बीएमसी मेयर की सूची (1931–2022)

संख्या नाम कार्यकाल पार्टी
1 जे.बी. बोमन बहराम 1931–1932 —
2 वी.एन. चंदावरकर 1932–1933 —
3 मोरेश्वर चिंतामन जावले 1933–1934 —
4 हुसैनाली रहीमतोला 1934–1935 —
5 खुर्शीद नरीमन 1935–1936 —
6 जमनादास एम. मेहता 1936–1937 —
7 एलिजा मोसेस राजपुरकर 1937–1938 —
8 सुल्तान एम. चिनॉय 1938–1939 —
9 बहराम एन. करंजिया 1939–1940 —
10 माथुरदास त्रिकमजी 1940–1941 —
11 जोसेफ ए. कोलाको 1941–1942 —
12 यूसुफ मेहरअली 1942–1943 —
13 एम.डी.डी. गिल्डर 1943 —
14 मिनू मसानी 1943–1944 —
15 नागिंदास टी. मास्टर 1944–1945 —
16 जोसेफ अल्बन डिसूजा 1945–1946 —
17 मोहम्मद आई.एम. रोवजी 1946–1947 —
18 ए.पी. सबावाला 1947–1948 —
19 एम.यू. मस्करेन्हा 1948–1949 —
20 एस.के. पाटिल 1949–1952 —
21 गणपतिशंकर एन. देसाई 1952–1953 —
22 पी.ए. डायस 1953–1954 —
23 दयाभाई पटेल 1954–1955 —
24 एन.सी. पुपाला 1955–1956 —
25 सुलोचना मोदी 1956 —
26 अब्दुल कादर सालेभॉय 1956–1957 —
27 साइमन सी. फर्नांडीस 1957 —
28 एम.वी. डोंडे 1957–1958 —
29 एस.एस. मिराजकर 1958–1959 —
30 पी.टी. बोराले 1959–1960 —
31 विष्णुप्रसाद एन. देसाई 1960–1961 —
32 वी.बी. वर्लिकर 1961–1962 —
33 एन.एन. शाह 1962–1963 —
34 ई.ए. बंदूकवाला 1963–1964 —
35 बी.पी. दिवगी 1964–1965 —
36 एम. माधवन 1965–1966 —
37 एस.आर. पाटकर 1966–1967 —
38 जे. लियोन डिसूजा 1967–1968 —
39 आर.एन. कुलकर्णी 1968–1969 —
40 जे.के. जोशी 1969–1970 —
41 एस.जी. पटेल 1970–1971 —
42 हेमचंद्र गुप्ते 1971–1972 शिवसेना
43 आर.के. गनात्रा 1972–1973 —
44 सुधीर जोशी 1973–1974 शिवसेना
45 बी.के. बोमन-बहराम 1974–1975 —
46 एन.डी. मेहता 1975–1976 —
47 मनोहर जोशी 1976–1977 शिवसेना
48 मुरली देवड़ा 1977–1978 कांग्रेस
49 वामनराव महादिक 1978 शिवसेना
50 आर.के. चिम्बुलकर 1978–1980 —
61 चंद्रकांत हांडोरे 1992–1993 रिपब्लिकन पार्टी
62 आर.आर. सिंह 1993–1994 कांग्रेस
75 विश्वनाथ महादेश्वर 2017–2019 शिवसेना
76 किशोरी पेडनेकर 2019–2022 शिवसेना

 

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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