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11 देश, दुनिया की 45% आबादी..!’ कैसे बदला ग्लोबल पावर बैलेंस? जानिए BRICS की पूरी ABCD

BRICS Full Form and History: 12 और 13 सितंबर 2026 को भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है. दुनिया के सबसे चर्चित और प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संगठनों में गिना जाने वाला यह समूह आज 11 पूर्ण सदस्यों और कई साझेदार देशों के साथ वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का रुख तय कर रहा है.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस ब्रिक्स के सामने आज दुनिया की महाशक्तियां थर-थर कांपती हैं, उसकी शुरुआत किसी सरकारी समझौते से नहीं बल्कि एक विदेशी अर्थशास्त्री के रिसर्च पेपर से हुई थी? आइए समझते हैं BRIC से BRICS बनने और इसके वैश्विक महा-संगठन में तब्दील होने की पूरी कहानी.

 

कैसे पड़ा यह नाम और किसने दिया विचार?(BRICS Full Form and History)

ब्रिक्स की कहानी साल 2001 में शुरू होती है. जाने-माने वैश्विक वित्तीय संस्थान ‘गोल्डमैन सैक्स’ (Goldman Sachs) के मुख्य अर्थशास्त्री जिम ओ’नील (Jim O’Neill) ने एक रिसर्च पेपर लिखा था. इसमें उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि अगले 50 सालों में Brazil (ब्राजील), Russia (रूस), India (भारत) और China (चीन) दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं होंगी और ये चारों देश मिलकर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर राज करेंगे. जिम ओ’नील ने इन चारों देशों के पहले अक्षरों को जोड़कर अंग्रेजी का एक शब्द बनाया- ‘BRIC’ (ब्रिक). उस समय ‘ब्रिक’ कोई औपचारिक संगठन नहीं बल्कि केवल एक आर्थिक अवधारणा थी.

एक आईडिया से लेकर औपचारिक मंच बनने का सफर

अर्थशास्त्री की इस अवधारणा को वास्तविक कूटनीति में बदलने की शुरुआत साल 2006 में हुई. न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान इन चारों देशों के विदेश मंत्रियों की पहली अनौपचारिक बैठक हुई, जिसमें आपस में मिलकर काम करने का खाका तैयार हुआ.

इसके बाद 16 जून 2009 को रूस के ‘येकातेरिनबर्ग’ (Yekaterinburg) शहर में BRIC का पहला औपचारिक शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया. इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी देशों (अमेरिका और यूरोप) के आर्थिक दबदबे को चुनौती देना और विकासशील देशों (Global South) की आवाज को बुलंद करना था.

साउथ अफ्रीका की एंट्री से बना ‘BRICS’

शुरुआत में यह केवल 4 देशों का समूह था. लेकिन अफ्रीकी महाद्वीप का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका (South Africa) को इस समूह में शामिल होने का न्योता दिया गया. दिसंबर 2010 में दक्षिण अफ्रीका औपचारिक रूप से इसका सदस्य बना और इस तरह ‘BRIC’ के नाम के आगे ‘S’ जुड़ गया, जिससे यह ‘BRICS’ (ब्रिक्स) बन गया. चीन के सान्या शहर में हुए 2011 के सम्मेलन में दक्षिण अफ्रीका ने पहली बार पूर्ण सदस्य के रूप में भाग लिया.

2024 का ऐतिहासिक विस्तार

एक दशक से भी ज्यादा समय तक 5 देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) के साथ काम करने के बाद ब्रिक्स ने अपनी ताकत को और बढ़ाने का फैसला किया. जनवरी 2024 में ब्रिक्स का सबसे बड़ा ऐतिहासिक विस्तार हुआ, जब इसमें 6 नए देशों— इजिप्ट (मिस्र), इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया (अर्जेंटीना ने अंतिम समय में शामिल होने से इनकार कर दिया था). इसके बाद 2025-26 के सम्मेलनों में कई अन्य देशों को ‘पार्टनर कंट्री’ का दर्जा दिया गया. आज यह 11 प्रमुख देशों का एक शक्तिशाली आर्थिक गुट बन चुका है.

जानिए इसके गठन के 3 मुख्य उद्देश्य

पश्चिमी आर्थिक व्यवस्था को चुनौती: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया के व्यापार और वित्तीय प्रणाली पर अमेरिका और यूरोप (IMF और वर्ल्ड बैंक) का कब्जा था. ब्रिक्स का गठन एक ऐसा विकल्प देने के लिए हुआ जो विकासशील देशों के हितों की रक्षा कर सके. इसी कड़ी में ब्रिक्स ने अपना ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ (NDB) भी बनाया.

स्थानीय मुद्राओं में व्यापार (De-Dollarization): अमेरिकी डॉलर पर दुनिया की निर्भरता कम करने और ब्रिक्स देशों के बीच अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना इसका बड़ा लक्ष्य रहा है.

वैश्विक शासन में निष्पक्षता: संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय निकायों में सुधार की मांग करना ताकि भारत और ब्राजील जैसे उभरते देशों को स्थायी प्रतिनिधित्व मिल सके.

यह भी पढ़ें:BRICS 2026: क्यों फंसा है ‘ब्रिक्स करेंसी’ का पेच, जानिए भारत के सामने खड़ी 5 बड़ी चुनौतियां

आज कितनी है ब्रिक्स की वैश्विक ताकत?

आज का ब्रिक्स दुनिया की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है:

आबादी: दुनिया की कुल आबादी का लगभग 45% हिस्सा ब्रिक्स देशों में रहता है.

अर्थव्यवस्था: वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (Global GDP) में ब्रिक्स का योगदान 36% से अधिक है, जो पश्चिमी देशों के संगठन ‘G7’ से भी ज्यादा हो चुका है.

ऊर्जा और तेल: सऊदी अरब, ईरान, यूएई और रूस के एक साथ आने से दुनिया के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) उत्पादन का 40% से अधिक हिस्सा अब ब्रिक्स के नियंत्रण में है.

-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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