ग्लोबल साउथ की आवाज बना 'TV BRICS' (AI IMAGE)
दशकों से दुनिया भर में खबरें उसी नजरिए से दिखाई जाती रही हैं, जैसा पश्चिमी मीडिया – खासकर अमेरिका और यूरोपीय संस्थान तय करते हैं. चाहे जलवायु परिवर्तन का मुद्दा हो, युद्ध हो या अर्थव्यवस्था, पश्चिमी मीडिया ही दुनिया का एजेंडा तय करता रहा है. लेकिन अब टीवी ब्रिक्स (TV BRICS) और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के अन्य मीडिया संस्थान इस एकतरफा व्यवस्था को बदलने के लिए आगे आ रहे हैं.
सवाल यह उठ रहा है कि क्या ये नए मीडिया प्लेटफॉर्म दुनिया को एक स्वतंत्र और निष्पक्ष नजरिया देने में कामयाब हो पाएंगे?
पश्चिमी देशों के मीडिया में अक्सर विकासशील देशों को केवल गरीबी, गृहयुद्ध या संकट के तौर पर दिखाया जाता है. दूसरी तरफ, ‘टीवी ब्रिक्स’ जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया नेटवर्क का मकसद विकासशील देशों के अपने मुद्दों – जैसे कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विज्ञान, शिक्षा और व्यापार को दुनिया के सामने प्रमुखता से रखना है.
इसका मतलब यह नहीं है कि पश्चिमी मीडिया को पूरी तरह नकार दिया जाए, बल्कि इसका मकसद दुनिया को सिर्फ एक चश्मे से देखने के बजाय दूसरे पक्षों को भी सामने लाना है.
किसी भी मीडिया संस्थान की निष्पक्षता और स्वतंत्रता इस बात से तय होती है कि वह कितनी ईमानदारी से खबरें पेश करता है. टीवी ब्रिक्स और अन्य ग्लोबल साउथ के मीडिया संस्थानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे केवल अपनी सरकारों या BRICS संगठन का प्रचार बनकर न रह जाएं.
सच्ची पत्रकारिता वही है जो सत्ता चाहे पश्चिम की हो या ब्रिक्स देशों की, दोनों से कड़े सवाल पूछे. ब्रिक्स देशों के बीच भी कई मुद्दों पर आपसी मतभेद हैं, और एक बेहतर मीडिया नेटवर्क को इन जटिलताओं को छुपाने के बजाय खुलकर सामने रखना चाहिए.
जैसे-जैसे टीवी ब्रिक्स की लोकप्रियता बढ़ रही है, इंटरनेट पर ‘BRICS Satellite TV Private Limited’ जैसे नामों और लोगो को लेकर भ्रम भी फैला है. भारत में पंजीकृत यह प्राइवेट कंपनी और रूस आधारित अंतरराष्ट्रीय टीवी ब्रिक्स मीडिया नेटवर्क दो अलग संस्थाएं हैं. इसलिए पाठकों और पत्रकारों को केवल लोगो देखकर नहीं, बल्कि आधिकारिक स्रोतों से ही खबरों की पुष्टि करनी चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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