शुभांशु शुक्ला पर कांग्रेस की सियासत
Congress Politics Over Shubhanshu Shukla: कहते हैं जब किसी विषय पर राजनीति की दीमक लग जाए तो वहां तर्क नहीं, सिर्फ एजेंडा चलता है. आज जब भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष की सैर से वापस धरती पर आए हैं तो 140 करोड़ भारतीयों का सिर गर्व से ऊपर उठ गया है. हर तरफ जश्न का माहौल है. लोग आतिशबाजी कर रहे हैं और एक दूसरे को मिठाइयां बांटकर एक साथ होली और दिवाली मना रहे हैं. ऐसे मौके पर कांग्रेस को अपनी सियासत सूझ रही है. सियासत के कोसों दूर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के मिशन की कामयाबी पर भी राहुल गांधी के करीबी और पूर्व कांग्रेस सांसद उदित राज ने सियासी एंगल खोज निकाला है. ऐसे में एक बार फिर से कांग्रेस के मुद्दे सवालों के घेरे में आ गए हैं.
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला स्पेस स्टेशन में 18 दिन रहकर लौटे है. उनका स्पेसक्राफ्ट कैलिफोर्निया के तट पर जैसे ही लैंड हुआ भारत ने इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज करा लिया. ऐसा 41 साल बाद हुआ जब कोई भारतीय स्पेस में पहुंचा हो. वहीं पहली बार ऐसा हुआ है जब कोई भारतीय स्पेस स्टेशन में रुका है. हालांकि, कांग्रेस को इससे क्या..? उसे तो यहां भी जाति की राजनीति नजर आने लगी और उदित राज ने देश के सामने इसे जाहिर भी कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस की जमकर किरकिरी हो रही है.
शुभांशु शुक्ला की धरती पर वापसी को लेकर मीडिया ने जब उदित राज से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि मैं शुभकामनाएं देता हूं, जो ज्ञान उन्होंने अर्जित किया है उसे यहां आकर बिखेरें. उनकी वापसी मानवता के लिए लाभकारी है. हालांकि, मुझे लगता है कि इस बार बारी थी कि किसी बैकवर्ड, किसी दलित को अंतरिक्ष में भेजना चाहिए था. इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि वह कोई परीक्षा देकर तो गए नहीं थे? उदित राज यहीं नहीं रुके उन्होंने यह भी कहा कि नासा ने कोई परीक्षा तो नहीं कराई थी. जिसमें शुक्लाजी का सिलेक्शन हुआ है.
उदित राज केवल भारतीय पायलट शुभांशु शुक्ला के स्थान पर SC-ST और OBC को भेजने की वकालत पर नहीं रुके. जब उनसे सवाल किया गया कि जब राकेश शर्मा को भेजा गया था कि इंदिरा सरकार ने SC-ST और OBC को अंतरिक्ष क्यों नहीं भेजा? इस सवाल पर उनका जवाब और बचकाना था. उन्होंने कहा कि जब राकेश शर्मा को भेजा गया था तो देश के SC-ST और OBC पढ़े-लिखे नहीं थे. इस कारण इस समाज के लोगों को उस समय अंतरिक्ष नहीं भेजा जा सका. हालांकि, इस बार इस समाज के लोगों को अंतरिक्ष भेजा जा सकता था.
भारती की राजनीति में जातिवाद हमेशा से होता रहा है. सियासत चमकाने के लिए कोई नेता और दल जब ऐसा करते हैं तो इसके लिए देश की जनता आदी हो गई है. हालांकि, जब ऐसे विषय पर दलित या जाति का राजनीति की जाती है तो हर वर्ग को गुस्सा आता है. ऐसा राहुल गांधी और कांग्रेस हमेशा करती रहती है.
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साल 2024 में भी राहुल गांधी ने मिस इंडिया लिस्ट को लेकर सवाल उठाए थे. 26 अगस्त 2024 को उन्होंने ‘संविधान सम्मान सम्मेलन’ में कहा था कि उन्होंने मिस इंडिया की लिस्ट देखी, जिसमें कोई दलित, आदिवासी, या ओबीसी महिला नहीं थी. इसे राहुल गांधी ने देश में सामाजिक असमानता बताया था और जातिगत जनगणना कराने की मांग दोहराई थी. अब उदित राज भी उनके कदमों के निशान का मापते हुए चल पड़े हैं.
अब जब देश अंतरिक्ष पर फैले भारत के परचम पर खुशी मना रहा है तो कांग्रेस नेता अपनी छोटी सोच का परचम लहरा रहे हैं. उदित राज के हद पार करने वाले बयान ने कांग्रेस की सियासत और उसके तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर क्यों कांग्रेस देश की उड़ान को देखकर भी जमीन पर जाति की खाई खोदने में मशगूल है? इस मौके पर भी सियासी रोटियां सेंकने का अवसर तलाशना बताता है कि कांग्रेस मुद्दों की फुलझड़ियों से नहीं, जातियों की चिंगारी से खेल रही है.
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