देश

खड़गे के विवादित बयान के बाद सुर्खियों में पीएम मोदी के पिता! जानिए कौन थे दामोदरदास मूलचंद मोदी?

Damodardas Mulchand Modi Biography: भारतीय राजनीति में भाषा और संवाद की गिरती मर्यादा के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का हालिया विवादित बयान – ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ – एक बार फिर देश के सियासी गलियारों में बड़ा विवाद बनकर उभरा है. इस अमर्यादित टिप्पणी ने उस शांत अतीत को भी विवादों के कठघरे में घसीट लिया है, जिसका सक्रिय राजनीति से कभी दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं रहा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वर्गीय पिता दामोदरदास मूलचंद मोदी, जिन्होंने जीवनभर ईमानदारी से चाय बेची और बेहद साधारण जीवन जिया, आज सत्ता की इस वैचारिक जंग में निजी हमलों का निशाना बन गए हैं.

वडनगर स्टेशन पर चाय की दुकान और जीवन का संघर्ष

दामोदरदास मूलचंद मोदी का जन्म गुजरात के मेहसाणा जिले के ऐतिहासिक कस्बे वडनगर में एक बेहद साधारण मोढ़-घांची (OBC) परिवार में हुआ था. सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय की एक छोटी सी गुमटी लगाकर अपनी आजीविका शुरू की. सुबह से देर रात तक स्टेशन पर आने वाली पैसेंजर ट्रेनों के मुसाफिरों को चाय पिलाकर उन्होंने अपने परिवार का पेट पाला. उनके इस काम में बालक नरेंद्र मोदी और उनके भाई भी हाथ बंटाते थे.

सादगी और सिद्धांतों से पिरोया 8 सदस्यों का परिवार

दामोदरदास मोदी का विवाह हीराबेन से हुआ था. बेहद सीमित आय होने के बावजूद दामोदरदास और हीराबा ने कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया. मिट्टी और ईंटों से बने एक बेहद संकरे घर में उन्होंने अपने 6 बच्चों सोमाभाई, अमृतभाई, नरेंद्र, प्रह्लादभाई, पंकजभाई और पुत्री वासंतीबेन का पालन-पोषण किया. अभावों के बावजूद दामोदरदास जी का जोर हमेशा इस बात पर रहा कि उनके बच्चे आत्मनिर्भर बनें और ईमानदारी का मार्ग न छोड़ें.

बेटे के संन्यास और राजनीति पर रखी मौन सहमति

जब युवा नरेंद्र मोदी ने सांसारिक मोह त्यागकर भारत भ्रमण और संघ प्रचारक बनने का निर्णय लिया, तो एक पिता के रूप में दामोदरदास जी को चिंता जरूर हुई, किंतु उन्होंने कभी बेटे के राष्ट्र सेवा के संकल्प में बाधा नहीं डाली. वर्ष 1989 में जब दामोदरदास मूलचंद मोदी का स्वास्थ्य खराब होने (बोन कैंसर) के बाद देहांत हुआ, तब तक नरेंद्र मोदी सार्वजनिक जीवन में एक समर्पित प्रचारक के रूप में स्थापित हो रहे थे. दामोदरदास जी अपने जीवनकाल में बेटे को गुजरात का मुख्यमंत्री या देश का प्रधानमंत्री बनते तो नहीं देख सके, किंतु उनके दिए संस्कार और श्रम का मूल्य नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की नींव बने.

निजी हमलों की राजनीति पर सवाल

दामोदरदास मोदी ने अपना पूरा जीवन गुमनामी, ईमानदारी और स्वाभिमान से जिया. उन्होंने न तो कभी किसी राजनीतिक मंच का उपयोग किया और न ही कभी सत्ता की छाया का लाभ लिया. ऐसे में आज चुनावी लाभ के लिए एक दिवंगत, परिश्रमी पिता को अमर्यादित भाषा के घेरे में खींचना लोकतंत्र के स्वस्थ संवाद पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है.

यह भी पढ़ें: पहले मां, अब पीएम मोदी के बाप पर उतरी कांग्रेस, सुनें मल्लिकार्जुन खड़गे की मावालियों जैसी भाषा

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

Recent Posts

श्रीकृष्ण पाथेय न्यास की छात्रवृत्ति के लिए 102 मेधावी चयनित: सीएम मोहन यादव ने दी बधाई, खंडवा जिले से सर्वाधिक 6 विजेता

मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा 102 छात्र-छात्राओं को 'भगवान श्रीकृष्ण मेधावी…

34 minutes ago

मौसम बदलते ही बदला रामलला का दिनचर्या, अब सुबह 4 बजे खुलेंगे पट, जानिए पूरी समय-सारणी

1 नवंबर से अयोध्या के राम मंदिर में श्रीरामलला की पूजा, आरती और दर्शन का…

2 hours ago

मोदी सरकार का बड़ा एक्शन: नार्को-कार्टेल पर सुरक्षा एजेंसियों का सर्जिकल स्ट्राइक, 100 करोड़ का हवाला नेटवर्क ध्वस्त

NCB ने मिजोरम पुलिस और ED के साथ मिलकर 'ऑपरेशन ट्राइडेंट' लॉन्च किया. असम, मिजोरम…

2 hours ago

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अफसरों की लगाई क्लास, 3707 पोस्टमार्टम में से सिर्फ 2 की पुलिस ने मांगी ऑनलाइन

इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्ती के बाद मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब सीधे CCTNS पोर्टल…

3 hours ago

‘जाणता राजा’ का चौथा दिन: राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल और पतंजलि CMD आचार्य बालकृष्ण समेत ये हस्तियां आईं आज

गाजियाबाद के सनसिटी में छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित महानाट्य 'जाणता राजा' के…

3 hours ago

12वें BRICS संसदीय मंच की मेजबानी करेगा भारत, नई दिल्ली में जुटेगी दुनिया; जानें पीएम मोदी और ओम बिरला का प्लान

नई दिल्ली में 26-27 अक्टूबर को 12वां ब्रिक्स संसदीय मंच आयोजित हो रहा है. पीएम…

3 hours ago