दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आज 8 फरवरी को घोषित किए जाएंगे. इस चुनाव के नतीजों का इंतजार सिर्फ दिल्ली की जनता ही नहीं बल्कि पूरे देश को है. वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू हो चुकी है. इस बार 5 फरवरी को हुए मतदान में करोड़ों मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए कुल 699 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला कर दिया है.
इस चुनावी मुकाबले में मुख्य रूप से तीन प्रमुख राजनीतिक दल मैदान में हैं- आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस(INC). हालांकि शुरुआती एग्जिट पोल के नतीजों में अलग-अलग तस्वीरें उभरकर सामने आई हैं. कुछ रिपोर्ट्स में बीजेपी को सरकार बनाते हुए दिखाया जा रहा है, जबकि कुछ में आम आदमी पार्टी को लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का अनुमान लगाया गया था.
दिल्ली विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं. किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए 36 सीटों का बहुमत चाहिए. अभी आ रहे ताजा रुझानों में कांग्रेस कमजोर स्थिति में है और उसका खाता खुलने की संभावना बेहद कम है. ऐसे में असली मुकाबला AAP और BJP के बीच नजर आ रहा है.
लेकिन एक सवाल उठता है- अगर AAP और BJP को बराबर सीटें (35-35) मिलती हैं या फिर अन्य छोटे दलों को 2 सीटें मिलती हैं और दोनों बड़ी पार्टियों को 34-34 सीटें मिलती हैं, तो सरकार कैसे बनेगी?
अगर किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है, तो सरकार बनाने के लिए कुछ विकल्प सामने आते हैं…
अगर कोई पार्टी बहुमत से दूर रह जाती है तो वो अन्य दलों का समर्थन लेकर सरकार बना सकती है. उदाहरण के लिए, अगर AAP को कुछ सीटों की कमी होती है, तो वह कांग्रेस या छोटे दलों से समर्थन ले सकती है. हालांकि, दिल्ली की राजनीति में AAP और कांग्रेस के बीच मजबूत गठबंधन की संभावना कम ही दिखती है.
दूसरी ओर, BJP के पास भी छोटे दलों के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने का विकल्प रहेगा लेकिन दिल्ली में बीजेपी को आमतौर पर छोटे दलों का समर्थन कम ही मिलता रहा है.
अगर कोई भी पार्टी सरकार बनाने में असफल रहती है और गठबंधन की संभावना भी नहीं बनती, तो दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा सकता है. इस स्थिति में विधानसभा को निलंबित (Suspended) कर दिया जाएगा और केंद्र सरकार दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) के माध्यम से प्रशासन चलाएगी.
अगर लंबे समय तक कोई भी पार्टी सरकार नहीं बना पाती, तो दिल्ली में दोबारा चुनाव कराए जा सकते हैं. ऐसा पहले भी हो चुका है, 2013 में AAP और कांग्रेस की गठबंधन सरकार कुछ ही समय में गिर गई थी, जिसके बाद 2015 में दोबारा चुनाव कराए गए थे.
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या AAP लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में सफल होती है या बीजेपी दिल्ली की सत्ता पर कब्जा जमाने में कामयाब होती है. अगर मुकाबला बहुत करीबी होता है, तो सरकार बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल और चुनौतीपूर्ण हो सकती है. आज के नतीजे दिल्ली की राजनीति की दिशा तय करेंगे और यह साफ करेंगे कि दिल्ली को स्थिर सरकार मिलेगी या फिर राजनीतिक अस्थिरता का सामना करना पड़ेगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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