रिपोर्ट- मनोज कुमार प्रजापति
दिल्ली के मालवीय नगर में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने एक बार फिर राजधानी में मौजूद होटल, गेस्ट हाउस और रेस्टोरेंट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया हैं. आग लगने की घटनाएं हर बार प्रशासनिक तैयारियों और सुरक्षा मानकों की पोल खोलती हैं, लेकिन हादसे के बाद भी क्या हालात वास्तव में बदलते हैं? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए भारत एक्सप्रेस की टीम साउथ-वेस्ट दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में पहुंची और वहां चल रहे होटलों व रेस्टोरेंट्स का रियलिटी चेक किया.
जैसे ही भारत एक्सप्रेस की टीम होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के पास पहुंची, कई जगहों पर दिलचस्प तस्वीर देखने को मिली है. कुछ लोगों ने कैमरे के सामने आने से साफ इनकार कर दिया, जबकि कई मालिक जरूरी दस्तावेज दिखाने से बचते नजर आए. हालांकि किसी निजी व्यवसाय को मीडिया के सामने अपने दस्तावेज दिखाने के लिए कानूनन बाध्य नहीं किया जा सकता, लेकिन सुरक्षा सवालों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है.
कई होटल संचालकों का कहना था कि उनके पास सभी जरूरी कागजात मौजूद हैं और समय-समय पर संबंधित विभाग उनकी जांच भी करते हैं. उनका तर्क था कि दस्तावेज देखने का अधिकार सरकारी एजेंसियों के पास है, मीडिया के पास नहीं है.
दिल्ली में किसी भी होटल, गेस्ट हाउस या रेस्टोरेंट को शुरू करने और संचालित करने के लिए कई तरह की सरकारी मंजूरियां अनिवार्य होती हैं. इनमें दिल्ली फायर सर्विस से फायर एनओसी, नगर निगम का ट्रेड लाइसेंस, दिल्ली पुलिस का ईटिंग हाउस लाइसेंस, एफएसएसएआई का फूड लाइसेंस और जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रमुख हैं.
इसके अलावा भवन के कमर्शियल उपयोग की अनुमति, स्वीकृत बिल्डिंग प्लान और कुछ मामलों में पर्यावरण एवं स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी भी जरूरी होती है. होटल और गेस्ट हाउस के लिए संबंधित विभागों से अतिरिक्त अनुमति लेने की भी आवश्यकता पड़ सकती है.
नियमों के मुताबिक हर होटल और रेस्टोरेंट में फायर सेफ्टी सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, पर्याप्त पानी की व्यवस्था और आपातकालीन स्थिति से निपटने के इंतजाम होने चाहिए. बेसमेंट के उपयोग को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश तय हैं.
लेकिन हाल के आग हादसों के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राजधानी में चल रहे सभी प्रतिष्ठान इन नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं? क्या संबंधित एजेंसियां नियमित रूप से निरीक्षण कर रही हैं? और यदि सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं, तो फिर कैमरे पर खुलकर जवाब देने में संकोच क्यों दिखाई देता है?
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी होटल या रेस्टोरेंट में बिना अनुमति संचालन, अवैध निर्माण, बेसमेंट का गलत इस्तेमाल या फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो प्रशासन सख्त कार्रवाई कर सकता है. ऐसे मामलों में प्रतिष्ठान को सील किया जा सकता है, भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज हो सकती है.
भारत एक्सप्रेस की इस पड़ताल का उद्देश्य किसी व्यवसाय को कटघरे में खड़ा करना नहीं, बल्कि उन सवालों को सामने लाना है जो सीधे आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े हैं. दिल्ली जैसे महानगर में हजारों लोग होटल, रेस्टोरेंट और गेस्ट हाउस का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि सुरक्षा नियम सिर्फ कागजों तक सीमित ना रहें, बल्कि जमीन पर भी पूरी तरह लागू हों.
-भारत एक्सप्रेस
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