देश

किराया हजारों में, लेकिन सुरक्षा के इंतजाम कितने? सत्यनिकेतन हादसे के बाद मुखर्जी नगर से लक्ष्मी नगर तक सहमे छात्र

रिपोर्ट- तनु चौधरी


दिल्ली में हर साल हजारों छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए घर से दूर आते हैं. कोई CA की तैयारी करता है, कोई CS की, तो कोई प्रतियोगी परीक्षाओं की. मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर और सत्यनिकेतन जैसे इलाके ऐसे छात्रों से भरे रहते हैं. इनके लिए PG और हॉस्टल सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि पढ़ाई और भविष्य की तैयारी का अहम हिस्सा होते हैं.

लेकिन सवाल तब खड़ा होता है, जब इन्हीं जगहों पर रहने की बुनियादी सुरक्षा ही सवालों के घेरे में आ जाए.

सत्यनिकेतन में जर्जर इमारत गिरने से सात छात्रों की मौत के बाद दिल्ली में छात्रों के लिए बने PG और हॉस्टल की व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है. हादसे के बाद कार्रवाई होना अपनी जगह है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या खतरे की पहचान पहले नहीं की जा सकती थी?

लक्ष्मी नगर में छात्रों की बड़ी संख्या

लक्ष्मी नगर दिल्ली का एक बड़ा स्टूडेंट हब है. खासकर CA और CS की तैयारी करने वाले बड़ी संख्या में छात्र यहां PG और हॉस्टल में रहते हैं. इलाके में हर तरफ छात्रों की आवाजाही दिखाई देती है. लेकिन इसी भीड़ के बीच कई ऐसी इमारतें भी नजर आती हैं, जिनकी हालत देखकर सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है.

कहीं पुराने और जर्जर मकान दिखाई देते हैं, तो कहीं इमारतों के बाहर बिजली के तारों का उलझा हुआ जाल नजर आता है. कुछ जगहों पर सीमित जगह में जरूरत से ज्यादा छात्रों को ठहराए जाने की शिकायत भी सामने आती है.

छात्र इसके लिए हर महीने हजारों रुपये किराया देते हैं. कई मामलों में यह रकम 10 हजार रुपये या उससे भी ज्यादा होती है. ऐसे में उनकी उम्मीद सिर्फ एक कमरे की नहीं होती, बल्कि सुरक्षित और रहने लायक माहौल की भी होती है.

दिल्ली भेजते समय माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद करते हैं. पढ़ाई की फीस के अलावा रहने, खाने और दूसरी जरूरतों पर परिवार हर महीने बड़ी रकम खर्च करता है. लेकिन अगर बच्चा जिस जगह रह रहा है, वही इमारत असुरक्षित हो, तो चिंता होना स्वाभाविक है.

छात्रों का कहना है कि किराए के मुकाबले कई जगह सुविधाएं संतोषजनक नहीं हैं. सुरक्षा को लेकर भी उनके मन में डर बना रहता है. ऐसे में यह सवाल उठना जरूरी है कि PG और हॉस्टल संचालकों की जिम्मेदारी आखिर कहां तक है और सरकारी एजेंसियों की निगरानी कितनी प्रभावी है?

कितनी इमारतों की जांच हुई?

दिल्ली में करीब 76 लाख सेंसस मकान बताए जाते हैं, लेकिन MCD अब तक लगभग 28 लाख मकानों का ही ऑडिट कर पाया है. इसका सीधा मतलब यह है कि बड़ी संख्या में इमारतों की जांच अभी बाकी है.

यहीं से सबसे बड़ा सवाल सामने आता है कि अगर किसी इलाके में इमारत पहले से कमजोर है, तो उसकी पहचान हादसा होने से पहले क्यों नहीं होनी चाहिए?

सिर्फ किसी बड़े हादसे के बाद इमारतों की जांच करना पर्याप्त नहीं होगा. जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें जर्जर और खतरनाक इमारतों की नियमित पहचान हो, जिम्मेदार लोगों को नोटिस मिले और जरूरत पड़ने पर समय रहते कार्रवाई भी की जाए.

सत्यनिकेतन की घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि सुरक्षा को लेकर लापरवाही की कीमत बेहद भारी हो सकती है. ये छात्र अपने परिवारों से दूर रहकर घंटों पढ़ाई करते हैं. उनके पीछे उनके माता-पिता की उम्मीदें और वर्षों की मेहनत जुड़ी होती है.

ये भी पढ़ें- ‘इंसानियत की बड़ी मिसाल…!’ मात्र 1 रुपये में वेंटिलेटर सेवा दे रहे हैं ओडिशा के यह डॉक्टर; गरीबों के बने मसीहा

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

Recent Posts

‘पितृ पक्ष में तृतीया तिथि का विशेष महत्व…’ जानिए आज के पंचांग में क्या है खास और कौन सा रहेगा मुहूर्त?

Pitru Paksha Panchang: 29 सितंबर 2026 को पितृ पक्ष के अंतर्गत तृतीया श्राद्ध है. पंचांग…

1 hour ago

पहलगाम की अरु घाटी में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव, आधे सफर से लौटने को मजबूर सैलानी; स्थानीय कारोबार प्रभावित

पहलगाम की अरु घाटी में मोबाइल नेटवर्क, एटीएम, स्वास्थ्य और शौचालय की भारी कमी। सैलानी…

6 hours ago

द ग्रेट मंडल बनाम कमंडल संघर्ष: वह दिन जब बिहार ने आडवाणी की रथ यात्रा रोक दी

Mandal Vs Kamandal: एलके आडवाणी की रथ यात्रा 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ…

7 hours ago

स्टूडेंट हॉस्टल से CM हाउस तक: वह रात जब लालू ने बिहार की कमान संभाली

Lalu Prasad Yadav: लालू प्रसाद यादव के उभार की कहानी सिर्फ एक राजनेता की जीवनी…

7 hours ago

35 से ज्यादा लग्जरी घड़ियां, अकूत जमीन और 500-500 के नोटों की गड्डियां… बिहार के इस पावर कपल के ठिकानों पर पड़ा छापा

VIGILANCE RAID ON BIHAR OFFICER COUPLE: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance)…

7 hours ago

ठहाका, तेवर और तूफानी राजनीति! जानिए कैसे लालू यादव ने हमेशा के लिए बदल दिए भारतीय लोकतंत्र के नियम

Lalu Prasad Yadav: भारतीय लोकतंत्र में लालू प्रसाद यादव की पहचान एक खास राजनीतिक शैली…

8 hours ago