इंडि अलायंस के प्रमुख घटक दल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP – शरद पवार गुट) की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पार्टी के सभी आठों सांसदों ने पीएम मोदी से मुलाकात की. दिल्ली में हुई इस 15 से 20 मिनट की उच्चस्तरीय बैठक के बाद सियासी गलियारों में तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गई हैं. हालांकि, इन कयासबाजियों और राजनीतिक कयासों के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया है कि इस मुलाकात को लेकर किसी तरह की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए.
शरद पवार गुट के सांसदों की प्रधानमंत्री मोदी से हुई इस बैठक पर मचे सियासी हंगामे के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की. फडणवीस ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का प्रधानमंत्री से मिलना एक बेहद सामान्य बात है. किसी भी दल के नेता देश के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर सकते हैं.
उन्होंने आगे कहा कि सांसद अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और विकास योजनाओं को लेकर ही प्रधानमंत्री से मिले होंगे. इसे लेकर किसी तरह की गलतफहमी या सियासी कयासबाजी नहीं होनी चाहिए. वहीं बीजेपी नेत्री नवनीत राणा ने भी इस मुलाकात का समर्थन करते हुए कहा कि यदि महाराष्ट्र की प्रगति और विकास के लिए शरद पवार के सांसद प्रधानमंत्री से मिल रहे हैं, तो इसमें कोई बुरी बात नहीं है.
सुप्रिया सुले के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र से जुड़े कई गंभीर मुद्दों, विकास परियोजनाओं और सामाजिक मांगों को प्रधानमंत्री के सामने रखा.
चार महान विभूतियों को भारत रत्न देने की मांग: NCP सांसदों ने राष्ट्रपिता महात्मा ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, संत तुकड़ोजी महाराज और लोकशाहीर अन्नाभाऊ साठे को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की औपचारिक मांग की.
जल एवं इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याएं: बीड से सांसद बजरंग सोनवणे ने सोलापुर के उजनी डैम से बीड जिले को पानी उपलब्ध कराने की मांग की.
रेलवे व एयरपोर्ट का मुद्दा: शिरूर सांसद अमोल कोल्हे ने नासिक-पुणे रेलवे लाइन विवाद का मुद्दा उठाया, जबकि भिवंडी सांसद बालू मामा म्हात्रे ने नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम ‘भूमिपुत्र दी बा पाटिल’ के नाम पर रखने की बात कही. इसके साथ ही किसानों के मुद्दों पर भी चर्चा हुई.
गौरतलब है कि इससे पहले 22 जुलाई को भी शरद पवार और सुप्रिया सुले ने पीएम मोदी से मुलाकात की थी. बार-बार हो रही इन मुलाकातों के बाद महाविकास आघाड़ी में किसी बड़े सियासी उलटफेर की अटकलें लगाई जाने लगी हैं.
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हालांकि, सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया है कि यह बैठक केवल महाराष्ट्र की विकास योजनाओं को लेकर थी. उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि उनकी पार्टी संसद में प्रस्तावित FCRA बिल का विरोध करेगी. फिलहाल, परिसीमन बिल पर पार्टी के रुख और पीएम मोदी से मुलाकातों के सियासी मायनों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है.
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