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हवाई सफर में उपद्रव: भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत हो सकती है सजा; क्यों बनी ‘नो फ्लाई लिस्ट’?

No-Fly List Laws And Rules: हवाई सफर के दौरान अभद्र व्यवहार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ताजा मामला इंडिगो की मुंबई-कोलकाता उड़ान में शुक्रवार को सामने आया है. इसमें एक यात्रा ने सहयात्री को धक्का दे दिया. इस कारण उसको पैनिक अटैक आ गया. इसके बाद एयरलाइन ने हमलावर को सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया है. इसके साथ ही अपनी ओर से कार्रवाई शुरू कर दी है. माना जा रहा है अब उसे नो फ्लाइ लिस्ट में डाला ज सकता है. अब कई सवाल उठ रहे हैं.

आपको मिलेंगे इन सवालों के जवाब

  • नो फ्लाइ लिस्ट क्या है और इसके तहत कैसे कार्रवाई हो सकती है?
  • क्या अंतराष्ट्रीय स्तर भी इस तरह का कोई नियम है?
  • सरकार, पुलिस और कानून इस तरह के मामलों में कैसे एक्शन लेते हैं?
  • जिस यात्री पर एक्शन होता है क्या उसके पास भी कोई अधिकार हैं?

भारत में नो फ्लाई लिस्ट के नियम (No-Fly List Rules)

सेफ हवाई सफर के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं, जिनका उल्लंघन करने पर मुसाफिरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है. इतना ही नहीं, मुसाफिर को नो फ्लाई लिस्ट में भी डाला जा सकता है. मिनिस्ट्री ऑफ सिविल एविएशन ने सितंबर 2017 में नो फ्लाई लिस्ट के नियम जारी किए थे. इसके तहत हवाई सफर के दौरान बुरा बर्ताव करने वाले मुसाफिरों की एक लिस्ट तैयार की जाती है. यह नियम सभी भारतीय एयरलाइंस पर लागू होते हैं.

तीन कैटेगरी में बने हैं नियम (No-Fly List Category)

  • मौखिक अभद्रता: जिसमें धमकी देना, आपत्तिजनक व्यवहार, वर्बल हैरेसमेंट जैसे शांति भंग करने का बर्ताव शामिल है। इस कैटेगरी में आने वाले मुसाफिर पर 3 महीने का बैन लगाया जा सकता है.
  • शारीरिक अभद्रता: जिसमें धक्का देना, पैर मारना, जकड़ लेना, सेक्शुअल हैरेसमेंट या गलत तरीके से छूना शामिल है। इस कैटेगरी में आने वाले मुसाफिर पर 6 महीने का बैन लगाया जा सकता है.
  • जीवन को खतरा: इस कैटेगरी में आने वाले मुसाफिर पर 2 साल तक का बैन लगाया जा सकता है, और गंभीर मामलों में आजीवन हवाई सफर से रोका जा सकता है.

क्या है एक्शन का प्रोसेस?

फ्लाइट में अभद्र बर्ताव की शिकायत पायलट-इन-कमांड की तरफ से दर्ज कराई जाएगी. यात्री के खिलाफ शिकायत की जांच विमान कंपनी की एक इंटरनल कमेटी करेगी, जिसका अध्यक्ष रिटायर्ड जिला और सत्र जज होगा. कमेटी में विमान कंपनी, यात्री संगठन और उपभोक्ता संगठन के प्रतिनिधि शामिल होंगे. शिकायत के 30 दिनों के भीतर मामले में फैसला लेने का नियम है. जब तक कोई फैसला नहीं आता है, तब तक कंपनी मुसाफिर की हवाई यात्रा पर बैन लगा सकती है. अगर मुसाफिर दोबारा गलती करता है तो उसकी सजा को दोगुनी की जा सकती है.

साल 2017 के नियम (No-Fly List DGCA 2017 Rules)

  • जांच के दौरान एयरलाइंस कंपनी को यात्री पर 30 दिनों का बैन लगाने का अधिकार होता है.
  • अगर 30 दिन के भीतर जांच नहीं होती है तो यात्री को फिर से यात्रा करने का अधिकार मिल जाता है.
  • बैन के फैसले के खिलाफ पीड़ित व्यक्ति अपील कर सकता है.
  • उसे 60 दिन के भीतर अपील करनी होती है. यह मिनिस्ट्री के अपीलीय समिति के सामने की जाती है.
  • इस समिति की अध्यक्षता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस करेंगे.
  • अपील का अधिकार उन यात्रियों को नहीं होता है जिन्हें गृह मंत्रालय ने बैन किया होता है.

भारतीय कानून के अनुसार सजा

जांच समित अपनी जांच में व्यवहार को कानूनी रूप से दंडनीय बता सकती है. इसके बाद मामला पुलिस और अदालत का हो जाता है. तब यात्रा के दौरान उपद्रव करने वाली याात्री को गिरफ्तार कर उस पर वायुयान नियम-1937 के नियम 22,23 व 29 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है. वहीं पुलिस शिकायत मिलने पर भारतीय न्याय संहिता के अनुसार कार्रवाई कर सकती है.

इंटरनेशनल यात्रियों के लिए नियम (Rules for International Unruly Passengers)

इंटरनेशनल यात्रियों के लिए जापान की राजधानी टोक्यो में 14 सितंबर, 1963 को ‘टोक्यो समझौता’ हुआ था. यह 4 दिसंबर, 1969 को प्रभाव में आया. टोक्यो समझौते के मुताबिक, पायलट-इन-कमांड को विशेष अधिकार मिले हैं. पायलट अभद्र व्यवहार करने वाले मुसाफिर को हिरासत में लेकर पुलिस को सौंप सकता है. गिरफ्तार मुसाफिर को अपने प्रतिनिधि से संपर्क करने का अधिकार है. अथॉरिटी को गिरफ्तार किए गए मुसाफिर के देश और जिस देश में विमान का पंजीकरण है उस देश का जानकारी देनी होगी. गिरफ्तार करने वाला देश उस यात्री पर बैन लगा सकता है.

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भारत में क्यों बनाए गए नियम? (Ravindra Gaikwad Case)

साल 2017 में पूर्व शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ से जुड़ा एक मामला आया था. इसमें उन्होंने एयर इंडिया के एक कर्मचारी पर हमला कर दिया था. इसके बाद DGCA ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियम बनाए थे. इसे ही नो फ्लाई लिस्ट कहा जाता है. नो फ्लाई लिस्ट DGCA की विमानों में अनियंत्रित व्यवहार और उसके लिए दंड और दंडनीय अपराध घोषित करती है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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