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केरल में समय से पहले पहुंचा मानसून, 16 सालों का टूटा रिकॉर्ड; जानिए इसका देशभर पर क्या पड़ेगा असर?

भारत में इस बार मानसून ने समय से पहले दस्तक दी है. मौसम विभाग (IMD) ने बताया है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून 8 दिन पहले ही केरल पहुंच गया है. यह पिछले 16 सालों में सबसे जल्दी मानसून आगमन का रिकॉर्ड है. केरल में मानसून आमतौर पर 1 जून के आसपास पहुंचता है, लेकिन इस बार यह मई के तीसरे सप्ताह में ही राज्य में सक्रिय हो गया. इससे पहले 2009 में मानसून मई के तीसरे सप्ताह में केरल पहुंचा था.

इस साल के शुरुआती संकेतों को देखते हुए मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. कुछ जिलों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जहां अगले 24 घंटों में 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश होने की संभावना है. वहीं, कुछ अन्य जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट भी जारी किया गया है.

दिल्ली-एनसीआर में भी बदल रहा मौसम का मिजाज

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में भी मौसम ने करवट बदली है. बुधवार देर रात तेज आंधी और बारिश के बाद, भारतीय मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना जताई है. विभाग के मुताबिक, 25 और 26 मई को दिल्ली में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कहीं-कहीं तेज हवाओं के साथ बारिश भी हो सकती है. 27 मई को भी बारिश होने की संभावना है. इससे पहले 21 मई को दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में आए तेज तूफान के साथ ओले भी गिरे थे.

मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र और मुंबई के लिए भी अलर्ट जारी किया है. दक्षिण कोंकण, गोवा और अरब सागर के पास बारिश की चेतावनी दी गई है. रायगढ़ और रत्नागिरी जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि मुंबई, ठाणे, पालघर, पुणे, सिंधुदुर्ग और सतारा में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. मुंबई में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की आशंका है.

कृषि क्षेत्र को क्या होंगे फायदे?

इस साल मानसून वक्त से पहले आ गया है, और इसका सबसे बड़ा फायदा किसानों को हो सकता है. हमारे देश की खेती काफी हद तक बारिश पर निर्भर करती है. जब समय पर या जल्दी बारिश होती है तो मिट्टी में नमी बढ़ जाती है. खेतों में पानी की कमी नहीं रहती और पानी के स्रोत जैसे नदियां-झीलें भी भरने लगती हैं. इससे किसान जल्दी फसल बो सकते हैं. इन फसलों में धान, दालें, तेल वाली फसलें, कपास (कॉटन) और सब्जियां शामिल हैं.

हालांकि सिर्फ जल्दी बारिश आना काफी नहीं है. विशेषज्ञों के अनुसार मानसून का फायदा तभी होगा जब पूरे देश में अच्छी और बराबर बारिश हो. अगर कुछ जगह बहुत बारिश हो और कुछ जगह सूखा पड़ जाए, तो इसका फसलों पर बुरा असर पड़ेगा. अगर जून से जुलाई तक मानसून देश के हर हिस्से में सही तरीके से फैल गया, तो खेती अच्छी होगी, खाने की कीमतें काबू में रहेंगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा.

ये भी पढ़ें- दिल्ली-एनसीआर में अचानक बदला मौसम, आंधी के साथ बरसने लगीं बूंदें, नोएडा में खूब हुई झमाझम बारिश

-भारत एक्सप्रेस

Prashant Rai

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