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रियल एस्टेट नहीं है हिमालय! नेपाल में तबाही के बाद विशेषज्ञ की सलाह, पहाड़ों में सुरंगों और फोर-लेन पर लगे ब्रेक

Himalayan Disaster Nepal Flood: नेपाल में आई त्रासदी में अबतक 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. हजारों लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है. इन सबके बीच इस त्रासदी ने एक बड़ा सवाल पैदा कर दिया है कि क्या हिमालय में बढ़ते मानवीय दखल ने इलाके को स्थिर कर दिया है. दरअसल नेपाल में आई त्रासदी के बाद हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और भारत के सीमावर्ती राज्यों पर मंडरा रहे संभावित खतरे को लेकर पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी ने गंभीर चिंता जताई है.

उन्होंने कहा कि नेपाल में हुई त्रासदी को केवल प्राकृतिक आपदा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ जंगलों की कटाई, पहाड़ों में अत्यधिक मानवीय हस्तक्षेप, सड़क चौड़ीकरण, सुरंग निर्माण और तेजी से हो रहा बुनियादी ढांचा विकास भी आपदा के जोखिम को बढ़ा रहा है.

पर्यावरणविद् भावरीन कंधारी (इमेज-IANS)

भावरीन कंधारी ने कहा कि नेपाल में जो हुआ, वह बेहद दुखद और दिल दहला देने वाला है. जलवायु परिवर्तन इस पूरी परिस्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. हिमालयी ग्लेशियरों की तेजी से बदलती स्थिति को लेकर वैज्ञानिक संस्थाएं पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं. ग्लोबल वार्मिंग और जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक इस्तेमाल का वैश्विक प्रभाव हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर भी पड़ रहा है. तत्काल स्तर पर समस्या केवल जलवायु परिवर्तन की नहीं है, बल्कि हिमालय में बढ़ता मानवीय हस्तक्षेप भी गंभीर चिंता का विषय है. नेपाल, तिब्बत और भारत को अलग-अलग भौगोलिक इकाइयों के रूप में देखकर इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को नहीं समझा जा सकता. एक हिस्से में होने वाले बदलाव का प्रभाव दूसरे हिस्से पर पड़ना स्वाभाविक है.

भारत में भी हो सकता है असर

कंधारी ने कहा कि नेपाल और तिब्बत में ग्लेशियरों के टूटने, भारी बारिश या भूस्खलन जैसी घटनाओं का असर भारत तक पहुंच सकता है. खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम जैसे क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि से बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है. सीमाओं से प्रकृति के प्रभाव को रोका नहीं जा सकता. यदि नेपाल में किसी नदी या ग्लेशियर पर अत्यधिक दबाव बनता है, तो उसका पानी आगे बढ़कर भारत के इलाकों को प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा, नेपाल में भारतीय पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के फंसे या लापता होने की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं.

नेपाल में आए फ्लस फ्लैड की तस्वीर (इमेज-IANS)

बाढ़ की चेतावनी प्रणाली को लेकर उन्होंने कहा कि कोई भी प्रणाली पूरी तरह सटीक नहीं हो सकती. हालांकि, कुछ दिन या सप्ताह पहले चेतावनी मिल जाए तो बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है, लेकिन असली लक्ष्य केवल आपदा आने के बाद राहत और बचाव नहीं होना चाहिए. सरकारों को आपदा रोकथाम पर अधिक ध्यान देना होगा. हिमालयी क्षेत्र में सड़क निर्माण, सुरंगों की खुदाई, पहाड़ों को विस्फोट से काटना और जलविद्युत परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप जैसे कदमों पर पुनर्विचार की जरूरत है.

हिमालय को रियल एस्टेट के रूप में न देखें

भावरीन कंधारी ने विकास कार्यों का विरोध नहीं किया, लेकिन कहा कि हिमालय को सामान्य रियल एस्टेट परियोजना की तरह नहीं देखा जा सकता. स्थानीय लोगों के लिए सड़क और बुनियादी सुविधाएं जरूरी हैं, लेकिन निर्माण उतना ही होना चाहिए जितना वास्तव में आवश्यक हो. संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क को अनावश्यक रूप से चार लेन तक चौड़ा करने के बजाय न्यूनतम आवश्यक जगह का इस्तेमाल किया जाना चाहिए. पहाड़ों को विस्फोट से काटने के बजाय ऐसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होना चाहिए जिनसे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचे. उन्होंने ठेकेदारों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों की निगरानी मजबूत करने की जरूरत भी बताई. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो.

नेपाल में आए फ्लस फ्लैड की तस्वीर (इमेज-IANS)

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कंधारी ने हिमालयी राज्यों में तेजी से बढ़ते पर्यटन पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सरकारें एक तरफ संवेदनशील क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए सड़कें और हाईवे बना रही हैं, वहीं दूसरी तरफ वहां की पर्यावरणीय क्षमता पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है. हिमालय की वहन क्षमता के अनुसार पर्यटन की सीमा तय करना आवश्यक है. नेपाल की घटना को भारत के लिए चेतावनी बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे केवल राहत, बचाव और बेहतर सैटेलाइट निगरानी तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए. हिमालय के साथ विकास की मौजूदा नीति में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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