जम्मू-कश्मीर में FCI गेहूं के सैंपल फेल
Jammu Kashmir PDS Wheat Quality: जम्मू-कश्मीर/रवि शर्मा: जम्मू-कश्मीर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के जरिए गरीब जनता की थालियों तक पहुंचने वाले अनाज की गुणवत्ता पर एक बहुत बड़ा और गंभीर सवालिया निशान लग गया है. कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दूरदराज इलाकों (मरवाह और वारवन) में बांटे जा रहे गेहूं के सैंपल भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की जांच में बुरी तरह फेल हो गए हैं. इस खुलासे के बाद किश्तवाड़ में करीब 1,545 क्विंटल गेहूं के स्टॉक को तुरंत बदलने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि यह अनाज ‘मानव उपभोग’ के लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त पाया गया है.
इस पूरे गोरखधंधे का पर्दाफाश 21 जून को मरवाह/वारवन में हुई एक जन शिकायत बैठक के दौरान हुआ. स्थानीय लाभार्थियों ने शिकायत की थी कि पीडीएस से मिलने वाले गेहूं को पीसकर बनाए गए आटे से जो रोटियां बन रही हैं, वे स्वाद में ‘कड़वी’ लग रही हैं. इसके बाद नौपाची क्षेत्र से गेहूं के सैंपल नेशनल फूड लेबोरेटरी, गाजियाबाद भेजे गए. जब वहां 21 से 31 जुलाई के बीच जांच हुई, तो नतीजे बेहद चौंकाने वाले थे.
प्रयोगशाला की रिपोर्ट के मुताबिक, गेहूं में फॉरेन मैटर, मिनरल मैटर और एरगोट प्रभावित दानों की मात्रा निर्धारित सीमा से बहुत ज्यादा पाई गई. एक सैंपल में ‘फॉरेन मैटर’ 7.80 प्रतिशत मिला, जो निर्धारित सीमा (1 प्रतिशत) से करीब आठ गुना अधिक है. इसके अलावा मिनरल मैटर और एरगोट प्रभावित दाने भी अनुमेय सीमा से कई गुना ज्यादा पाए गए, जो सेहत के लिए सीधा खतरा हैं.
खराब गुणवत्ता वाले इस स्टॉक को तत्काल प्रभाव से बदलने के आदेश जारी कर दिए गए हैं. लेकिन, जब इस गंभीर मुद्दे पर FCI के क्षेत्रीय कार्यालय के महाप्रबंधक आई.के. चौधरी से सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़ी आसानी से पल्ला झाड़ लिया. चौधरी ने कहा कि FCI के स्टोर से स्टॉक बाहर जाने के बाद उसके साथ क्या होता है, इसकी जिम्मेदारी FCI नहीं ले सकता. हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि उनके पास स्टॉक बदलने का अनुरोध आया था, लेकिन अब उस स्टॉक को वापस नहीं लिया जा सकता.
किश्तवाड़ के इस मामले के सामने आने के बाद खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी कर दिया है. अब जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर, रियासी, डोडा, राजौरी, और पुंछ के विभिन्न FCI गोदामों से गेहूं के सैंपल लिए जा रहे हैं. पुंछ के डिप्टी कमिश्नर अशोक शर्मा ने बताया कि वहां के सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं. अब देखना यह है कि क्या यह ‘कड़वा गेहूं’ सिर्फ किश्तवाड़ तक सीमित था या पूरे प्रदेश में गरीबों की थाली के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.
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