देश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और किसानों की आय के नए रास्ते खोलने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘गोबरधन’ यानी नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी स्कीम को मंजूरी दे दी है. इस योजना पर कुल 23,731 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. सरकार का लक्ष्य है कि इसके जरिए भारत में संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) के उत्पादन को तेजी से बढ़ाया जाए और इसे आने वाले वर्षों में देश के ऊर्जा ढांचे का अहम हिस्सा बनाया जाए.
यह योजना वित्त वर्ष 2027 से 2036 तक लागू रहेगी. इसके तहत घरेलू स्तर पर सीबीजी उत्पादन को करीब 10 गुना तक बढ़ाने की योजना है. सरकार का मानना है कि इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और किसानों को कृषि अवशेषों व जैविक कचरे से अतिरिक्त आमदनी का जरिया मिलेगा.
सरकार ने योजना के तहत सीबीजी उत्पादकों के लिए एक विशेष ‘सीबीजी ऑफटेक एश्योरेंस’ व्यवस्था बनाने का फैसला किया है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सीबीजी बनाने वाली कंपनियों को अपनी गैस बेचने के लिए स्थायी और भरोसेमंद बाजार मिल सके.
इस व्यवस्था के तहत सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनियों को सीबीजी की खरीद बढ़ाने में मदद मिलेगी. लक्ष्य रखा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में सीएनजी (परिवहन) और पीएनजी (घरेलू) क्षेत्रों में 3 प्रतिशत सीबीजी मिश्रण किया जाए. इसके बाद 2028 में यह लक्ष्य 4 प्रतिशत और 2029 से आगे 5 प्रतिशत तक पहुंचाने की योजना है.
सरकार के अनुसार, इससे उद्योगों को लंबे समय के लिए मांग का स्पष्ट संकेत मिलेगा. सीजीडी नेटवर्क के जरिए सीबीजी की नियमित आपूर्ति होने से परियोजनाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और निजी क्षेत्र के निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा.
योजना के तहत सरकार ने सीबीजी के लिए प्रशासनिक कीमत 2,110 रुपये प्रति मेट्रिक मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट (एमएमबीटीयू) तय की है. इससे उत्पादकों को लंबे समय तक आय की निश्चितता मिलेगी, जबकि उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को संतुलित रखने में मदद मिलेगी.
कम से कम 10 साल की अवधि वाले इस मूल्य निर्धारण ढांचे से कंपनियों को नए संयंत्र लगाने और मौजूदा क्षमता बढ़ाने में आसानी होगी. सरकार को उम्मीद है कि इससे सीबीजी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित होगा.
गोबरधन योजना के तहत पात्र नई सीबीजी परियोजनाओं को पूंजीगत सहायता भी दी जाएगी. ग्रीनफील्ड परियोजनाओं को स्थापित क्षमता के प्रति टन प्रतिदिन (टीपीडी) पर 2 करोड़ रुपये तक की मदद मिल सकती है. यह सहायता सिर्फ मशीनरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कच्चे माल के संग्रह, जैविक खाद तैयार करने और अन्य मूल्यवर्धन से जुड़ी सुविधाओं को भी शामिल करेगी.
इसके अलावा, उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाली मौजूदा यानी ब्राउनफील्ड परियोजनाएं भी इस सहायता के लिए पात्र होंगी. छोटे और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) से जुड़ी सीबीजी परियोजनाओं के लिए अलग से क्रेडिट गारंटी व्यवस्था भी बनाई जाएगी. इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों का भरोसा बढ़ेगा और परियोजनाओं को कर्ज हासिल करना आसान होगा.
सरकार सीबीजी संयंत्रों को ट्रंक पाइपलाइन और सिटी गैस वितरण नेटवर्क से जोड़ने के लिए भी सहायता देगी. बेहतर कनेक्टिविटी से गैस की ढुलाई लागत घटेगी, आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और देशभर में सीबीजी के इस्तेमाल का दायरा बढ़ेगा.
इसके साथ ही जिला स्तर पर सीबीजी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए ‘सीबीजी इकोसिस्टम चैलेंज फंड’ बनाया जाएगा. इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर परियोजनाओं को बढ़ावा देना और जैव ऊर्जा से जुड़ी पूरी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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