गुजरात की राजनीति के एक सादगी पसंद और जमीनी नेता, भाजपा विधायक गोविंदभाई परमार अब हमारे बीच नहीं रहे. 82 वर्षीय परमार पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे और आणंद के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, जहां शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर से पूरे चारोतर क्षेत्र और भाजपा खेमे में शोक की लहर दौड़ गई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर पोस्ट कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं. पीएम ने लिखा, “गुजरात विधानसभा के सदस्य गोविंद परमार के निधन की खबर सुनकर दुख हुआ. वे हमेशा सामाजिक कामों के लिए तत्पर और समर्पित रहते थे. दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना और दुखी परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं.”
1943 में जन्मे गोविंदभाई परमार का जीवन सादगी और जनसेवा की मिसाल था. एक बेहद साधारण परिवार से आने वाले परमार ने केवल सातवीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की थी, लेकिन ग्रामीण समुदायों के साथ उनका जुड़ाव इतना गहरा था कि वे राजनीति के शिखर तक पहुंचे.
उन्होंने 2017 में पहली बार उमरेठ विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी. इसके बाद 2022 के चुनावों में भी उन्होंने अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी और राकांपा (NCP) के दिग्गज नेता जयंत पटेल को हराकर दोबारा विधायक चुने गए.
गुजरात भाजपा अध्यक्ष और विधायक जगदीश विश्वकर्मा ने भी उनके निधन पर दुख जताते हुए कहा कि उमरेठ ने अपना एक ‘लोकप्रिय और समर्पित’ जनसेवक खो दिया है. परमार को उनके क्षेत्र में एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा जो हमेशा लोगों की समस्याओं के लिए उपलब्ध रहते थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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