हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री Anil Vij ने कहा कि पाकिस्तान के गधे और हिंदुस्तान के घोड़े हमेशा से ही बहुत मशहूर है.
अनिल विज ने कहा कि पाकिस्तान और चीन की दोस्ती गधों के कारण हुई, जबकि हिंदुस्तान में घोड़ों की कई अच्छी नस्लें हैं जो मशहूर है. इसलिए हिंदुस्तान के घोड़े और पाकिस्तान के गधे हमेशा से ही मशहूर है.
विज आज पत्रकारों के साथ बातचीत कर रहे थे. गौरतलब है कि हरियाणा के ऊर्जा मंत्री श्री अनिल विज हमेशा अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहते हैं आज भी श्री विज ने इशारों- इशारों में हिंदुस्तान के घोड़ों से लेकर चीन और पाकिस्तान के संबंधों पर चुटकी ले ली.
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि पाकिस्तान के गधे और हिंदुस्तान के घोड़े हमेशा से ही बहुत मशहूर है और पाकिस्तान में तो अब गधों का ही कारोबार हो रहा है.
पाकिस्तान में हुई गधों की गणना के मुताबिक लगभग 60 लाख से ज्यादा गधे पाकिस्तान में है. पाकिस्तान और चीन की दोस्ती भी गधों के कारण है.
उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान के घोड़े हमेशा से मशहूर है, जैसे महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक “पवन मेघ से उड़ने वाले घोड़े”. हिंदुस्तान में घोड़ों की कई अच्छी नस्लें हैं जो मशहूर है. इसलिए हिंदुस्तान के घोड़े और पाकिस्तान के गधे हमेशा से ही मशहूर है.
स्मरण है कि भारत में घोड़ों का एक समृद्ध इतिहास रहा है, जिसमें कई प्रसिद्ध नस्लें और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण घोड़े शामिल हैं.
भारत में कई स्वदेशी घोड़े की नस्लें हैं, जो अपनी विशिष्ट विशेषताओं और क्षमताओं के लिए जानी जाती हैं. हिंदुस्तान में मारवाड़ी घोड़ा, काठियावाड़ी घोड़ा, मणिपुरी पोनी, स्पीति घोड़ा, भूटिया घोड़ा, जंस्करी घोड़ा व अन्य नस्लें मशहूर है.
ऐतिहासिक रूप से चेतक (महाराणा प्रताप का घोड़ा), कृष्णा (छत्रपति शिवाजी महाराज का घोड़ा), बादल (हम्मीरदेव चौहान का घोड़ा), आदि मशहूर है.
इसके विपरीत पाकिस्तान के गधे कई कारणों से प्रसिद्ध हैं और इसी वजह से चीन के साथ उनके व्यापारिक संबंध भी है. हालिया आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में गधों की आबादी 59 लाख से बढ़कर 60.47 लाख हो गई है.
यह दुनिया में गधों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी है, जो इथियोपिया और सूडान के बाद आती है. वहीं चीन में गधों की खाल से “ई-जियाओ” (Ejiao) नामक एक पारंपरिक दवा और सौंदर्य उत्पाद बनाया जाता है.
संक्षेप में, पाकिस्तान के गधे उनकी बड़ी संख्या और चीन के साथ बढ़ते व्यापारिक संबंधों के कारण प्रसिद्ध हैं, जहां उनकी खाल का उपयोग पारंपरिक दवा और सौंदर्य उत्पादों में किया जाता है.
-भारत एक्सप्रेस
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