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वाह बिहार..! तोड़ दिए आजादी के बाद के सारे रिकॉर्ड; 5 कारणों से बढ़ी वोटिंग; Explained

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान में मतदाताओं ने एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम किया है. गुरुवार को हुए मतदान में 64.66 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जिसने 1951-52 से लेकर अब तक के सभी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इसे “ऐतिहासिक मतदान” बताते हुए मतदाताओं का आभार व्यक्त किया. इस बंपर वोटिंग के साथ ही उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव समेत 1314 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है.

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान ने राज्य के चुनावी इतिहास में एक नया अध्याय (Historic Bihar Election 2025) लिख दिया है. राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार इस अप्रत्याशित वृद्धि के पीछे 5 प्रमुख कारणों का आकलन कर रहे हैं, जो बिहार की राजनीति में एक नए रुझान का संकेत देते हैं.

अब तक का सबसे ऊंचा मतदान प्रतिशत (Bihar Election Voter Turnout)

चुनाव आयोग के अनुसार, 6 नवंबर को हुए पहले चरण के मतदान में 64.66 फीसदी मतदान हुआ है, जिसके आंकड़े में अभी और वृद्धि संभव है. पिछला विधानसभा रिकॉर्ड 2000 के विधानसभा चुनाव में बना था. तब 62.57% वोटिंग हुई थी. वहीं लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड साल 1998 के चुनाव में बना था. तब  64.60% मतदान हुआ था.

बिहार में 1951-52 से 2020 तक के विधानसभा चुनावों में अब तक केवल तीन बार ही 60% से अधिक मतदान हुआ है. साल 1990, 1995, और 2020 में मतदाताओं ने बंपर मतदान किया था. इस बार का मतदान इन सभी आंकड़ों को पछाड़ गया. पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर तीन करोड़ 75 लाख से अधिक वोटर थे.

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रिकॉर्ड तोड़ मतदान के पीछे 5 प्रमुख कारण (Reasons For Bihar Election Voter Turnout)

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ऐतिहासिक मतदान के लिए मतदाताओं और पूरी चुनाव मशीनरी को धन्यवाद दिया और भारत निर्वाचन आयोग में पूर्ण विश्वास व्यक्त करने के लिए मतदाताओं का आभार जताया. वहीं राजनीतिक विश्लेषक और जानकारों ने मतदान बढ़ने के पीछे चार मुख्य कारण बता रहे हैं.

  1. महिलाओं ने मतदान किया
  2. वोटर लिस्ट शुद्धीकरण (SIR)
  3. महागठबंधन के उठाए गए सवाल
  4. जन सुराज के आने का असर
  5. छठ और दिवाली के करीब चुनाव

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महिलाओं ने बढ़ाया मतदान (Woman Impact on Bihar Election

विधानसभा चुनाव 2025 में दोनों गठबंधनों ने महिलाओं पर केंद्रित वादे किए हैं. सरकार की ओर से चुनाव से पहले ही महिला रोजगार योजना के तहत 1.21 करोड़ महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए की पहली किस्त डाल दी गई थी. वहीं महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी ने महिलाओं को हर साल 30 हजार रुपए देने का वादा किया गया है. संभवत: इसी कारण महिलाएं ज्यादा वोट करने पहुंची है.

मतदान में SIR का असर (Impact of SIR on Bihar Election)

कई जानकारों का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले प्रदेश में SIR की प्रक्रिया संपन्न हुई है. इससे करीब 70 लाख मृत, फर्जी, डुप्लिकेट, लापता और राज्य से बाहर शिफ्ट हुए वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं. इस कारण भी मतदान फीसदी अधिक नजर आ रहा है. क्योंकि, हटाए गए नाम आमतौर पर वोट करने के लिए नहीं आते थे.

महागठबंधन के उठाए गए सवाल

SIR के कारण वोटिंग बढ़ने के साथ ही कुछ एक्सपर्ट यह मानते हैं कि इस साल बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान महागठबंधन ने लिस्ट पर सवाल उठाकर ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को गरम किया. इसका असर हुआ कि वोटर पिछड़ा और अति पिछड़ा वोटर बनाम अगड़ा हो गए और अधिक संख्या में मतदान करने पहुंच गए.

जन सुराज के आने का असर (Role of Jan Suraaj in high voting)

कुछ जानकारों का मानना है कि इन चुनावों में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज ने एंट्री ली थी. इससे नई राजनीति के साथ ही कई लोगों में होप जागी. खासतौर पर नए वोटर उनसे प्रभावित नजर आए. इस कारण वह वोट करने के लिए पहुंचे.

छठ और दिवाली के करीब चुनाव (Role of Chhath in Bihar Election)

20 अक्टूबर को दिवाली थी. इसके बाद 28 अक्टूबर को छठ मनाया गया. बड़ी संख्या में बाहर गए वोटर त्योहारों के लिए पहुंचे थे. 6 नवंबर को मतदान की तारीख देख वह रुक गए और बंपर मतदान करने के लिए पहुंचे. इस कारण भी मतदान में भारी इजाफा देखने को मिला.

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शांतिपूर्ण और निगरानी में रहा मतदान

दिल्ली से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने लाइव-वेबकास्टिंग के माध्यम से पूरे दिन कड़ी निगरानी रखी. बिहार में पहली बार 100 फीसदी मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग सुनिश्चित की गई थी. वहीं पहली बार, अंतर्राष्ट्रीय चुनाव आगंतुक कार्यक्रम (IEVP) के तहत दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, थाईलैंड सहित 6 देशों के 16 प्रतिनिधि चुनाव कार्रवाई देखने आए थे. बुर्का और पर्दा नशीन महिलाओं की पहचान के लिए सभी मतदान केंद्रों पर 90,000 से अधिक जीविका दीदी और महिला स्वयंसेवकों को तैनात किया गया था.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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