तस्वीर-AI जेनरेटेड
India Energy Security Strategy: मिडल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. आलम यह है कि दुनिया की लाइफलाइन कही जाने वाली ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Strait of Hormuz) लगभग ठप है, जहाँ से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है. इस युद्ध ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि किसी देश की असली ताकत सिर्फ उसकी सेना नहीं, बल्कि उसका ‘एनर्जी बैकअप’ भी होता है.
आज जब हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में पेट्रोल के लिए हाहाकार मचा है और वहाँ ‘तेल का लॉकडाउन’ लग गया है, तब भारत में फिलहाल तेल को लेकर तो कोई ऐसे हालत नही हैं. आज हम कुछ ऐसे विषयों की बात करेंगे जो वैश्विक तेल संकट के बीच भरत के लिए संकटमोचक की तरह काम कर रहे हैं. कुछ ऐसे विषय जिन पर मोदी सरकार की दूरदर्शी सोच ने 12 साल पहले ही प्लानिंग शुरू कर दी थी. आईए जानते हैं सरकार की पिछले 12 सालों की वो दूरगामी रणनीति, जिसने भारत को आज एक अभेद्य ‘सुरक्षा कवच’ पहना दिया है?
पाकिस्तान की हालत देख लीजिए. वहां ईंधन बचाने के लिए स्कूलों को बंद कर दिया गया है, दफ्तरों में वर्किंग डेज घटा दिए गए हैं और 50% कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ पर भेज दिया गया है. वहां पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही हैं. यह वही डरावनी स्थिति है जिससे भारत 2014 से पहले अक्सर सहमा रहता था.
2014 से पहले भारत की ऊर्जा सुरक्षा एक कच्चे धागे से बंधी थी. लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है. पहले जहां सिर्फ कुछ ही दीं का तेल रिजर्व हुआ करता था, वहीं आज भारत ने अपने सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व(SPR) यानी रणनीतिक तेल भंडार को इतना मजबूत किया है कि आज हमारे पास अपनी आवश्यक जरूरतों के हिसाब से करीब 74 दिन का रिजर्व मौजूद है. यानी अगर आज दुनिया में तेल की सप्लाई पूरी तरह कट भी जाए, तो भी भारत के पहिए ढाई महीने तक थमने वाले नहीं हैं.
यही नहीं मोदी सरकार ने तेल के लिए सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर रहना छोड़ दिया है. आज भारत दुनिया के करीब 40 देशों से तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक क्षेत्र में युद्ध होने पर हमारी सप्लाई लाइन नहीं टूटती.
मोदी सरकार ने पिछले 10 सालों में जो सबसे बड़ा काम किया है, वह है तेल पर अपनी निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना. अगर आज ये कदम न उठाए गए होते, तो भारत की तेल की खपत और मांग आज के मुकाबले कहीं ज्यादा होती और हम पूरी तरह वैश्विक बाजार के रहमों-करम पर होते.
एथेनॉल ब्लेंडिंग (Ethanol Blending): 2014 में पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण मात्र 1.5% के आसपास था, जो आज 15% से भी ऊपर निकल चुका है. सरकार का लक्ष्य इसे जल्द ही 20% तक ले जाने का है. इसका सीधा मतलब है कि हम अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार बचा रहे हैं और अपनी खेती (गन्ने और मक्का) से ‘देश का ईंधन’ बना रहे हैं. जिससे भारत की निर्भरता भी तेल भंडार वाले देशों पर कम होगी.
सोलर एनर्जी का धमाका: भारत आज दुनिया में सौर ऊर्जा के मामले में एक महाशक्ति बन चुका है. पिछले दशक में सोलर क्षमता में कई गुना बढ़ोतरी हुई है. आज गाँवों से लेकर बड़े उद्योगों तक बिजली के लिए डीजल जनरेटरों की जगह सोलर पैनल ले रहे हैं, जिससे तेल की खपत पर काफी हद तक लगाम लगी है.
यह भी पढ़ें: डीजल, पेट्रोल से लेकर LPG सिलेंडर तक, जानें पेट्रोलियम मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या आया सामने?
भारत अब सिर्फ पेट्रोल-डीजल के भरोसे नहीं बैठ सकता, यह बात मोदी सरकार ने पहले ही भांप ली थी. इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) क्रांति और नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन जैसे कदमों ने भारत को एक नई राह दिखाई है. सड़कों पर दौड़ती इलेक्ट्रिक बसें और कारें सीधे तौर पर कच्चे तेल की जरूरत को कम कर रही हैं. अगर आज हमारे पास ये विकल्प नहीं होते, तो तेल के दाम बढ़ते ही भारतीय मिडिल क्लास की कमर टूट चुकी होती.
आज जब वैश्विक संकट की बात करते हैं तो भरत की सबसे ज्यादा कमजोर कड़ी नैचुरल गैस ही बनी हुई है, क्योंकि भारत आज भी अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत गैस बाहर से ही आयात करता है. हालांकि सिर्फ कच्चा तेल ही नहीं, रसोई गैस (LPG) के मामले में भी सरकार ने कमाल की प्लानिंग की थी. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में घरेलू LPG उत्पादन में 25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. और ये हाल तब हैं जब भारत की सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत हर घर करोड़ों लाभार्थियों को गैस पहुंचाने का काम किया है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जोड़ते हुए दावा किया जा रहा है कि मुंबई…
Indian Festival 2026: Flipkart Big Billion Days और Amazon Great Indian Festival Sale शुरू हो…
श्रावस्ती में शटडाउन के बावजूद 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन चालू होने से दो…
नई दिल्ली में आयोजित ‘सेवा संकल्प – राष्ट्रनिर्माण के 25 साल’ समारोह में सेवा, सद्भाव…
नाना पाटेकर के निधन के बाद उनकी पत्नी नीलकंती पाटेकर चर्चा में हैं. जानिए मराठी…
दिल्ली हाईकोर्ट जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति न मिलने के…