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डीजल, पेट्रोल से लेकर LPG सिलेंडर तक, जानें पेट्रोलियम मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या आया सामने?

इजराइल-ईरान तनाव के बीच देश में LPG सिलेंडर को लेकर अफरा-तफरी दिखी, लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय ने हालात नियंत्रण में बताए. सरकार का कहना है कि क्रूड सप्लाई सुरक्षित है, जबकि गैस सप्लाई पर असर से निपटने के लिए वैकल्पिक प्लान तैयार है…

Petroleum Ministry briefing on LPG supply situation: इजराइल-ईरान युद्ध के बीच पिछले कुछ दिनों से देश के कोने-कोने में रसोई गैस (LPG) को लेकर मची अफरा-तफरी और लंबी लाइनों ने आम जनता की नींद उड़ा दी है. इस संकट के बीच आज पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने देश के सामने पूरी तस्वीर साफ करने की कोशिश की. मंत्रालय का सीधा संदेश है कि घबराएं नहीं, हालात काबू में हैं. लेकिन आंकड़ों की परतें खोलें तो समझ आता है कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध की आहट ने हमारे किचन के बजट और सप्लाई चेन की कमर तोड़ने की पूरी कोशिश की है. फिर भी सरकार का दावा है कि भारत के पास इस ‘आर्थिक चक्रव्यूह’ से निकलने का पूरा प्लान तैयार है.

‘कच्चे तेल पर कोई खतरा नहीं, पर गैस का गणित थोड़ा बिगड़ा’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुजाता शर्मा ने सबसे पहले कच्चे तेल (Crude Oil) की स्थिति पर देश को भरोसा दिलाया. उन्होंने साफ कहा कि भारत की क्रूड सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है. हमारी रोजाना की खपत 55 लाख बैरल है और अच्छी बात यह है कि हम आज दुनिया के 40 अलग-अलग देशों से तेल मंगवा रहे हैं.

इस ‘डायवर्सिफिकेशन’ (विविधता) का फायदा यह हुआ कि हमारा 70 प्रतिशत तेल उस ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) से नहीं गुजरता, जो युद्ध के कारण सबसे ज्यादा संवेदनशील इलाका बना हुआ है. यानी सिर्फ 30 प्रतिशत सप्लाई पर थोड़ा असर पड़ा है, जिसके लिए सरकार अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रही है. रिफाइनरियां भी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं, जो एक राहत भरी खबर है.

नेचुरल गैस के कंट्रोल पर क्या कहा?

असली पेंच फंसा है नेचुरल गैस और LPG के आयात में. सुजाता शर्मा के मुताबिक, देश की रोजाना की खपत 189 मिलियन मैट्रिक स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर है. इसमें से करीब आधा हिस्सा हम खुद पैदा करते हैं, लेकिन बाकी के लिए विदेशों पर निर्भर हैं. मिडिल ईस्ट के बिगड़े हालातों की वजह से हमारे कुल आयात में से एक बड़ा हिस्सा (47.4 MMSCND) प्रभावित हुआ है.

इसी संकट को देखते हुए सरकार ने ‘नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर’ को ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodity Act) के तहत लागू कर दिया है. इसका मतलब है कि अब सरकार तय करेगी कि गैस किसे पहले मिलेगी. फिलहाल सरकार की प्राथमिकता ‘डोमेस्टिक सेक्टर’ यानी घरों का चूल्हा और जरूरी सेवाएं जैसे अस्पताल और स्कूल हैं. इंडस्ट्री और बाकी सेक्टर्स को अभी इंतजार करना पड़ सकता है.

क्यों कम पड़ रही है गैस?

अगर आप सोच रहे हैं कि जब तेल आ रहा है तो गैस क्यों नहीं, तो इसका जवाब आंकड़ों में है. भारत अपनी जरूरत की 60 प्रतिशत LPG बाहर से मंगवाता है. और परेशानी की बात यह है कि इस आयात का 90 प्रतिशत हिस्सा उसी ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ वाले रास्ते से आता है जहां फिलहाल तनाव सबसे ज्यादा है.

हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू स्तर पर हमारा उत्पादन 20 प्रतिशत तक बढ़ा है, लेकिन भारी निर्भरता आयात पर होने के कारण सप्लाई चेन में थोड़ी देरी हो रही है. सरकार अब उन रास्तों पर काम कर रही है जहां से बिना किसी रुकावट के गैस इंडिया पहुंच सके.

पैनिक बुकिंग न करें

प्रेस कॉन्फ्रेंस के आखिर में सुजाता शर्मा ने आम उपभोक्ताओं से एक भावुक और जरूरी अपील की. उन्होंने कहा कि अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर (Panic Booking) सिलेंडर बुक न कराएं. मंत्रालय का दावा है कि बुकिंग के ढाई दिन के अंदर सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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