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मोदी सरकार के विजन से बदली जिंदगी, मखाना फैक्ट्री के कामगारों ने जताया आभार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ का ही नतीजा है कि कभी मुंबई और गाजियाबाद जैसे महानगरों में दो जून की रोटी कमाने वाले कामगार आज अपने प्रदेश में चैन की जिंदगी गुजार रहे हैं.

उनका कहना है कि पहले हमें दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए घर-परिवार से दूर महानगरों का रुख करना पड़ता था. आज अपने ही राज्य में अपने ही लोगों के बीच चैन की रोटी नसीब हो रही है, तो इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाना चाहिए.

शत्रुघ्न कुमार शर्मा और जयप्रीत कुमार ने आईएएनएस से बातचीत में अपनी खुशी जाहिर की. दोनों ने कहा कि आज की तारीख में हम बहुत खुश हैं. हमारे लिए इससे बड़ी बात और क्या होगी कि हमें अपने ही राज्य में रोजगार मिल गया.

गांव में ही बदल गई किस्मत

शत्रुघ्न ने कहा कि आज मैं मखाना फैक्ट्री में काम करके बहुत खुश हूं. इससे पहले मुंबई और हरदा में काम करता था. आज मुझे अपने ही परिवार के बीच काम मिल गया. दूसरे शहर में कई प्रकार के खर्चे हैं, जिसे जुटाने के कारण बचत भी नहीं कर पाते थे. आज एक तरफ अच्छे पैसे बचा लेता हूं, दूसरी तरफ परिवार के साथ भी रहने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है. उन्होंने कहा कि यह सबकुछ प्रधानमंत्री मोदी के व्यापक विजन की वजह से मुमकिन हो पाया है. आज अगर हमारे सभी सपने पूरे हो रहे हैं, तो इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है.

जयप्रीत कुमार ने कहा कि इससे पहले मैं गाजियाबाद में काम करता था. पिछले दो साल से यहां पर काम कर रहा हूं. मैं हर महीने 35 हजार रुपए कमाता हूं, बचत भी ठीक है. कई लोग यहां आकर काम करते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जब भी मखाना का जिक्र करते हैं, तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहता है. मखाना को लेकर उनके व्यापक विजन ने हमें अपने ही राज्य में रोजगार दिलाने का काम किया है. अब हमारा यह मखाना दुबई भी जा रहा है.

मोदी के विजन की सफलता

मखाना एक्सपोर्टर मनीष कुशवाहा ने भी प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की. उन्होंने कहा कि अगर आज सैकड़ों लोगों को मखाना की वजह से रोजगार मिल पा रहा है तो इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी के विजन को जाता है. यह कदम भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में भी काफी अहम है. उन्होंने कहा कि जीआई टैग से हमारे उत्पाद को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है. इसी वजह से अन्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी व्यापारी इसमें अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. वो हमसे हाथ मिलाने के लिए तैयार हैं.

उन्होंने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि एक वक्त ऐसा भी आएगा, जब मखाना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी. जब राज्य में नीतीश कुमार और केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार आई, तो उन्होंने इस दिशा में अहम कदम उठाए.

उन्होंने कहा कि अभी हमारी फैक्ट्री में सात महिलाएं और पांच पुरुष काम करते हैं. कई दंपति साथ काम करते हैं. सभी को अच्छी कमाई भी हो रही है.

यह भी पढ़ें: मोदी सरकार इस तारीख को पेश करेगी 2026-27 का केंद्रीय बजट, 28 जनवरी से शुरू होगा संसद सत्र, मंत्री बोले— देश का ख्याल रखा जाएगा

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-भारत एक्सप्रेस

आईएएनएस

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