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Ayodhya Ram Mandir: रामलला की प्राण प्रतिष्ठा में ये होंगे मुख्य यजमान, 22 जनवरी तक 45 कड़े नियमों का करेंगे पालन

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या में भगवानश्रीराम का भव्य मंदिर जहां एक ओर अपना पूरा आकार ले रहा है तो वहीं दूसरी ओर प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर तैयारी तेजी से आगे बढ़ रही हैं. 22 जनवरी को मंदिर का उद्घाटन होगा. इसी बीच मुख्य यजमान को लेकर खबर सामने आ रही है. मीडिया सूत्रों के मुताबिक, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने प्राणप्रतिष्ठा के यजमान के लिए नियमों के बारे में काशी के विद्वान पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ से सलाह मांगी थी. इसकी बाद जानकारी सामने आ रही है कि, उन्होंने कोषाध्यक्ष को भेजे गए पत्र में कहा है कि 15 जनवरी से मुख्य यजमान को सभी 45 नियमों का पालन करना होगा.

बता दें कि 22 जनवरी को मात्र 84 सेकेंड के सूक्ष्म मुहूर्त में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज ने मीडिया को बताया कि, समारोह पूरी तरह से सनातनी व वैदिक परंपराओं के अनुसार ही होगा. इसी के साथ ही उन्होंने मुख्य यजमान के बारे में जानकारी दी और बताया कि, समारोह के मुख्य यजमान एक दंपती होंगे. इसी के साथ उन्होंने कहा कि, दंपती को 15 जनवरी से ही उपवास, जप, तप, हवन, स्नान और दान समेत 45 नियमों का सख्ती से पालन करना होगा. उन्हें लकड़ी की चौकी पर सोना होगा और ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा. इसी के साथ ही उनको नियमों के मुताबिक ही जीवनचर्या बदलनी होगी. साथ ही उनको प्रायश्चित, गोदान, दशविध स्नान, प्रायश्चित क्षौर और पंचगव्यप्राशन आदि भी करना होगा.

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8 दिन तक इन सख्त नियमों का करना होगा पालन

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा करने वाले मुख्य यजमान को नित्य प्रात: स्नान करना होगा. बाहरी भोजन वर्जित, बीड़ी-सिगरेट का त्याग करना होगा.
मुख्य यजमान को पूरी तरह से सच बोलना होगा. ऐसी कि भी परिस्थिति में जहां सच बोलने में अड़चन हो, वहां पर मौन रहना होगा.
मन को विचलित करने वाले दृश्य पूरी तरह से वर्जित, खुद को शांत रखें, क्रोध न करें, अहंकार एवं मद से दूर रहना होगा, ब्राह्मणों को संतुष्ट रखना होगा.
पुरुष यजमान सिला हुआ सूती वस्त्र नहीं पहनेंगे तो वहीं पत्नी को लहंगा, चोली जैसे सिले वस्त्र पहनने होंगे. सर्दी को देखते हुए स्वेटर, ऊनी शाल, कंबल धारण कर सकेंगे.
आचार्य, ब्राह्मण और ऋत्विजों से झगड़ा, कठोर वचन व कटु भाषण का इस्तेमाल नहीं करेंगे. अनुष्ठान के दौरान सद्विचार एवं सद्चिंतन करेंगे.
रात्रि में आरती के बाद सात्विक भोजन कर सकते हैं. रात्रि में सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं.
नित्य का पूजन होने के पूर्व यजमान फलाहार कर सकते हैं. गरम व शीतल शुद्ध जल ले सकते हैं. अनुष्ठान के दौरान बोतलबंद पानी व बर्फ वर्जित रहेगी.
औषधि व तांबूल ले सकते हैं. खाने-पीने की चीजें भगवान को भोग लगाकर प्रसाद रूप में ही ग्रहण कर सकेंगे.
हल्दी, राई, सरसों, उड़द, मूली, बैंगन, लहसुन, प्याज, मंदिरा, मांस, अंडा, तेल से बने पदार्थ, गुड़, भुजिया चावल, चना आदि ग्रहण नहीं कर सकेंगे.
दिन में सो नहीं सकेंगे. तो वहीं रात में शयन लकड़ी की चौकी पर करना होगा. खटिया या बेड पर बैठना, सोना वर्जित रहेगा.
पुरुष को दर्भासन एवं कंबल तथा महिला के लिए कंबल, संपूर्ण कार्य होने के पूर्व रोजाना बिछौना पर बैठना वर्जित. रोज दाढ़ी एवं नख निकालना वर्जित रहेगा.
दोपहर में ब्राह्मणों को पहले आहार पर बैठाना चाहिए, उसके बाद यजमान आहार करें. रात्रि में भी इसी तरह करना होगा.

-भारत एक्सप्रेस

Archana Sharma

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