Rajasthan News
रिपोर्ट – रवींद्र सिंह, कोटा
Rajasthan News: कोटा मेडिकल कॉलेज में लगभग 70 दिन से भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच महिलाओं के परिवारों ने सरकार से न्याय की गुहार लगाई है. परिवारों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और कथित नकली दवाओं के कारण महिलाओं की दोनों किडनियां खराब हो गईं. उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि सरकार सभी मरीजों का किडनी ट्रांसप्लांट कराए, नहीं तो ‘जहर दे दे’. इस पर प्रसुताओं के भी साइन हैं.
प्रसुताओं का कहना है कि हर दूसरे दिन डायलिसिस से तंग आ चुके हैं, इससे शारीरिक और मानसिक कष्ट हो रहा है. इस समय रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी, सुशीला और धन्नी सुमन अस्पताल में भर्ती हैं.
सभी पांचों पेशेंटस की किडनी फेल हो चुकी है. जीवन भर अब डायलिसिस पर रहना पडे़गा. ऐसे में उनका तो जीना ही मुश्किल हो गया है. लापरवाही हमारी नहीं थी, लापरवाही अस्पताल के स्तर पर हुई है लेकिन सजा हमारी पेशेंट और पूरे परिवार भुगत रहे हैं. जहर का इंजेक्शन दे दो.
अस्पताल में भर्ती धन्नी के पति मोहनलाल ने बताया कि चार मई को उनकी पत्नी को अस्पताल में डिलीवरी के लिए भर्ती किया था. सीजेरियन के बाद किडनी फेल हो गई. आज 70 दिन हो गए हैं अस्पताल में भर्ती रहते हुए. हर दो तीन दिन में डायलिसिस हो रही है.
मोहन ने बताया कि अब तो धन्नी बाई डायलिसिस के नाम से भी डरती है, तकलीफ होती है बार बार डायलिसिस करवाने में, इसलिए खुद उसने ही कह दिया कि मुझे तो जहर का इंजेक्शन दे दो. हम तो सरकार से यही मांग कर रहे हैं कि सरकारी अस्पताल में ये सब हुआ तो सरकार की हमारे लिए जिम्मेदारी बनती है.
अस्पताल में भर्ती रागिनी के भाई विकास ने बताया कि सत्तर दिन हमारे पेशेंट को भी हो गए हैं. दोनों किडनी फेल है और डायलिसिस पर ही जीवन भर रहना पडेगा. ये सजा हम क्यों भुगते?
सरकार को हमने अल्टीमेटम दे दिया है हमारे पेशेंट भी अब नहीं चाहते कि बार बार डायलिसिस के भरोसे रहे. जीवनभर का बोझ बन गया है डायलिसिस, इसलिए किडनी ट्रांसप्लांट करवाई जाए नहीं तो अब सभी पेशेंट डायलिसिस ही नहीं करवाएगी और अस्पताल में बिना डायलिसिस के ही रहेंगी.
प्रसुताओं के परिजनों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर साफ कहा कि यदि 48 घंटे में ट्रांसप्लांट पर फैसला नहीं हुआ तो मरीज डायलिसिस करवाना बंद कर देंगे और अस्पताल के अंदर ही दम तोडे़गे. उनका कहना है कि लगातार डायलिसिस से उन्हें असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ा हो रही है, जबकि उनके परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. अस्पताल में वर्तमान में रागिनी मीणा, आरती चौबदार, पिंकी, सुशीला और धन्नी सुमन भर्ती हैं.
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ज्ञापन में बताया कि 4 मई से 8 मई के बीच सभी प्रसुताएं भर्ती हुई थी. अस्पताल की लापरवाही और कथित नकली दवाओं के कारण उनकी दोनों किडनियां फेल हो गईं. पिछले 70 दिनों से वे अस्पताल में भर्ती हैं और केवल डायलिसिस के सहारे जीवन जी रही हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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