दुनिया

3 हजार साल पहले हरा-भरा था यवतमाल, खुदाई में मिली समृद्ध कृषि और विकसित सभ्यता के सबूत

Yavatmal archaeological discovery: आज कम बारिश, सूखे और कृषि संकट के लिए पहचाने जाने वाले महाराष्ट्र के यवतमाल जिले का लगभग तीन हजार वर्ष पुराना समृद्ध इतिहास पुरातात्विक खुदाई में सामने आया है. नागपुर विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग द्वारा पाचखेड गांव में की गई खुदाई में ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जो बताते हैं कि यह इलाका कभी उन्नत कृषि, विकसित बस्तियों और समृद्ध जीवनशैली का केंद्र हुआ करता था. इस खोज को विदर्भ के प्राचीन इतिहास को समझने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

लौह युग की विकसित बस्ती के मिले अवशेष

खुदाई के दौरान शोधकर्ताओं को लौह युग की बस्ती के अवशेष, मकानों की नींव, लोहे के औजार, विभिन्न प्रकार के मिट्टी के बर्तन और अनाज के प्रमाण मिले हैं. इनमें चावल, गेहूं, अरहर और मूंग जैसी फसलों के अवशेष शामिल हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इन साक्ष्यों से स्पष्ट होता है कि करीब तीन हजार वर्ष पहले इस क्षेत्र में संगठित और उन्नत कृषि व्यवस्था मौजूद थी.

कभी अधिक वर्षा वाला क्षेत्र था यवतमाल

इस शोध से जलवायु परिवर्तन का ऐतिहासिक पहलू भी सामने आया है. पुरातत्व विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में कम वर्षा वाला यवतमाल क्षेत्र सातवाहन काल तक अपेक्षाकृत अधिक आर्द्र था. समय के साथ जलवायु में बदलाव आया और वर्षा कम होती गई, जिससे खेती और फसल प्रणाली पर गहरा प्रभाव पड़ा. यह निष्कर्ष आज के जलवायु परिवर्तन के अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

यह भी पढ़ें: भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अस्थायी आदेश, असली फैसला अभी बाकी

खेती के साथ धातु निर्माण और शिकार में भी थे दक्ष

खुदाई में मिले साक्ष्य बताते हैं कि उस समय का समाज केवल खेती पर निर्भर नहीं था. लोग मछली पकड़ने, शिकार और धातु निर्माण जैसी गतिविधियों में भी कुशल थे. लोहे के औजारों से उस दौर की उन्नत धातु प्रसंस्करण तकनीक का पता चलता है. इसके अलावा नदी के शंख और सीपियों से चूना बनाने के प्रमाण भी मिले हैं, जो निर्माण कार्य में प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं.

यह भी पढ़ें: ₹2100 निकालने गई महिला, बैलेंस देखते ही पैरों तले खिसक गई जमीन; फिर अचानक फ्रीज हो गया अकाउंट

विदर्भ के इतिहास को समझने में मिलेगी नई दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि पाचखेड की यह खोज केवल यवतमाल तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे विदर्भ क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति, कृषि व्यवस्था, पर्यावरण और मानव जीवनशैली को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. यह खोज इतिहासकारों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए अध्ययन का नया आधार बनेगी और यह साबित करती है कि आज सूखे की पहचान रखने वाला यवतमाल कभी समृद्ध कृषि और विकसित सभ्यता का केंद्र था.

भारत एक्सप्रेस

Swati Pandey

Recent Posts

उड़ान भरी, संपर्क टूटा और फिर मलबे में बदला विमान… नाइजीरिया में कैसे हुई 32 लोगों की मौत?

Nigeria Plane Crash: नाइजीरिया में बेनिन सिटी से लागोस जा रहा सैन्य विमान ओंडो राज्य…

9 minutes ago

सुबह-सुबह कांप उठी धरती! भारत के 2 राज्यों में भूकंप के ताबड़तोड़ झटके, अफगानिस्तान भी हिला

Earthquake News Today: असम के नगांव में 4.5 तीव्रता के भूकंप से तड़के धरती कांप…

35 minutes ago

सावधान! साध्य योग से ग्रहों की चाल में यू-टर्न, 4 राशियों की चमकेगी किस्मत; पढ़ें आज का राशिफल

6 अक्टूबर 2026 मंगलवार को इंदिरा एकादशी, आश्लेषा नक्षत्र और साध्य योग का शुभ संयोग…

1 hour ago