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लद्दाख में चमत्कार! बिना सीमेंट-कंक्रीट के पत्थरों को जोड़कर बना देश का पहला रॉक चेक डैम

Ladakh Rock Check Dam: लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने बुधवार को लेह के उपशी में सिंधु नदी पर भारत के पहले पर्यावरण-अनुकूल ‘रॉक चेक डैम’ का उद्घाटन किया. यह उद्घाटन ‘सिंधु जल समृद्धि अभियान’ के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य बिना सीमेंट या कंक्रीट का इस्तेमाल किए लगभग 40 मिलियन लीटर पानी जमा करके लद्दाख में दीर्घकालिक जल सुरक्षा और टिकाऊ कृषि को बेहतर बनाना है.

उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, “मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि मैंने हमारे अधिकारियों को सिंधु नदी के बारे में एक विचार दिया था, जो कि एक बहुत ही शक्तिशाली नदी है, कि जहां पानी उथला है, वहां इस पानी को कैसे रोका जा सकता है. उसके बाद, हम अपने अधिकारियों के साथ बैठे, योजना बनाई, इस जगह को चुना और आज मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी हो रही है कि यह देश का पहला रॉक चेक डैम है जहां न तो कंक्रीट का इस्तेमाल हुआ है और न ही सीमेंट का.

500 मीटर तक फैला पानी का इलाका

उन्होंने कहा कि नदी के आस-पास बड़े-बड़े पत्थर हैं. इन पत्थरों को उठाया गया और यहां आपस में फंसाकर लगाया गया, और इसी तरह यह चेक डैम बनाया गया. जिस समय इस चेक डैम का निर्माण हो रहा था, उस समय यहां पानी की गहराई लगभग एक से डेढ़ फीट हुआ करती थी, और आज इस चेक डैम के निर्माण के बाद, किनारों पर पानी की गहराई लगभग 4.5 से 5 फीट हो गई है, और बीच में यह 10 से 12 फीट हो गई है. पानी जमा होने का क्षेत्र लगभग 500 मीटर तक फैल गया है, और इसमें लगभग 45 मिलियन लीटर पानी जमा हो रहा है.

झरना इस चेक डैम की सबसे बड़ी खूबसूरती

उन्होंने कहा कि यहां जो कुछ भी दिख रहा है, उसकी योजना बहुत ही बेहतरीन ढंग से बनाई गई है, और झरना इस चेक डैम की सबसे बड़ी खूबसूरती है. पूरे लद्दाख की नदियों को देखें, तो आमतौर पर आपको इस तरह का झरना देखने को नहीं मिलता. यह झरना एक ‘कैस्केडिंग इफेक्ट’ भी पैदा कर रहा है, और पानी की आवाज इतनी मधुर है.

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उपराज्यपाल ने कहा कि मैं कई लोगों को इस चेक डैम को दिखाने के लिए आमंत्रित कर रहा हूं. उन्हें यह दिखाया जाएगा और उनके सुझाव भी लिए जाएंगे, क्योंकि अभी जो चेक डैम बनाया गया है, वह केवल हमारी और हमारे इंजीनियरों की समझ और तकनीकों का उपयोग करके बनाया गया है. इसके बाद, इसे और बेहतर बनाने के लिए हमें जो भी सुझाव मिलेंगे, हम निश्चित रूप से उन्हें लागू करेंगे.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

मैं गोविंद सिंह हूं और मूल रूप से बिहार के कैमूर की पहाड़ियों वाले इलाके से आता हूं। मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हुई। इसके बाद मैंने पटना कॉलेज, पटना से मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की और अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा। अपने पेशेवर सफर में मुझे ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिला। इन जगहों पर काम करते हुए मैंने रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचारों की प्रस्तुति से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखीं। फिलहाल मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं। यहां मेरी मुख्य रुचि विदेश, राजनीति और बिहार से जुड़ी खबरों को कवर करने में है।

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