Himanta Biswa Sarma Core Team: असम की राजनीति में ‘मामा’ के नाम से मशहूर हिमंता बिस्वा सरमा का जादू 2026 के विधानसभा चुनावों में एक बार फिर सिर चढ़कर बोला है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन ने प्रचंड जनादेश हासिल करते हुए राज्य में एक बार फिर सत्ता पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है. इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही हिमंता सरकार ने असम के विकास को एक नई रफ्तार देने का खाका तैयार कर लिया है. किसी भी सरकार की सफलता सिर्फ उसके मुखिया पर नहीं, बल्कि उसकी कोर टीम पर निर्भर करती है.
असम की इस नई सरकार में हिमंता बिस्वा सरमा के साथ 4 ऐसे कद्दावर और अनुभवी नेताओं ने सत्ता के अहम मोर्चों की कमान संभाली है, जिन्हें सियासी हलकों में ‘मामा की चौकड़ी’ कहा जा रहा है. आइए जानते हैं असम सरकार के इन 4 प्रमुख चेहरों का पूरा प्रोफाइल और उनका सियासी सफर.
असम की राजनीति में चाय बागान समुदाय का एक बड़ा प्रभाव है और रामेश्वर तेली (Rameswar Teli)इस समुदाय का सबसे बड़ा और विश्वसनीय चेहरा हैं. जमीन से जुड़े इस नेता ने अपने लंबे सियासी सफर में कई अहम मुकाम हासिल किए हैं. उनका चुनावी सफर 2001 में शुरू हुआ था, जब वे पहली बार दुलियाजान से विधायक चुने गए थे. 2014 में उन्होंने डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट से जीत दर्ज की और 2021 तक सांसद रहे. इसके बाद 2024 में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा. 2026 के विधानसभा चुनाव में वे एक बार फिर अपनी पुरानी सीट दुलियाजान से चुनाव लड़े और विजयी होकर विधानसभा पहुंचे. अब वे असम सरकार में एक बेहद अहम मंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
अजंता नेओग (Ajanta Neog)असम की राजनीति में एक ऐसा नाम हैं, जिनके पास प्रशासन और संगठन दोनों का दशकों लंबा अनुभव है. उन्होंने हमेशा अपनी मजबूत कार्यशैली से खुद को साबित किया है. अजंता ने 1996 में गोलाघाट सीट से पहली बार विधायक बनकर विधानसभा में कदम रखा था. उनके कौशल को देखते हुए 2002 में उन्हें असम सरकार में राज्य मंत्री का पद सौंपा गया. लंबे समय तक कांग्रेस में रहने के बाद, 2020 में उन्होंने बड़ा सियासी कदम उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया. 2021 में वे असम सरकार में कैबिनेट मंत्री बनीं. 2026 के विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन के बाद वे हिमंता कैबिनेट के प्रमुख स्तंभों में से एक हैं.
अतुल बोरा (Atul Bora) सिर्फ एक विधायक या मंत्री नहीं हैं, बल्कि वे असम की राजनीति में गठबंधन के सबसे अहम सूत्रधारों में से एक हैं. वे असम गण परिषद (AGP) के अध्यक्ष हैं और एनडीए सरकार में एक मजबूत सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं. बोकाखाट से विधायक चुने गए अतुल बोरा ने 1996 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था. 2014 में उन्होंने अपनी पार्टी ‘असम गण परिषद’ के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली. 2016 में बोकाखाट से जीत दर्ज करने के बाद से वे लगातार असम सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में काम कर रहे हैं. 2026 की नई सरकार में भी उनका अनुभव नीतियों को दिशा देने में अहम साबित हो रहा है.
इस चौकड़ी के चौथे अहम चेहरे चरण बोरो (Charan Boro) हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और जनता के बीच मजबूत पकड़ के दम पर सरकार के शीर्ष पदों तक का सफर तय किया है. चरण बोरो ने पहली बार 2016 के विधानसभा चुनाव में मजबत सीट से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत की थी. संगठन और क्षेत्र में उनके लगातार अच्छे काम को देखते हुए 2025 में उन्हें पहली बार कैबिनेट मंत्री बनाया गया. 2026 के जनादेश के बाद भी वे हिमंता सरकार की ‘कोर टीम’ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं.
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2026 के विधानसभा चुनावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि असम की जनता ने विकास और सुशासन के नाम पर अपना वोट दिया है. हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में ‘मामा की यह चौकड़ी’ अपने-अपने क्षेत्रों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हुए असम को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
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