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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर सांसद विजय चिंतकायला ने पीएम मोदी को भेंट किया मंगलगिरी शॉल

भारत की सदियों पुरानी हथकरघा परंपरा को सम्मान देने वाले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध मंगलगिरी हथकरघा कला एक बार फिर सुर्खियों में है. राज्यसभा सांसद विजय चिंतकायला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हाथ से तैयार किया गया पारंपरिक मंगलगिरी शॉल भेंट किया. इस खास अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे.

मंगलगिरी हथकरघा शॉल की यह भेंट केवल एक उपहार नहीं थी, बल्कि आंध्र प्रदेश के मेहनती बुनकरों और उनकी पीढ़ियों से चली आ रही कला को देश के सर्वोच्च नेतृत्व तक पहुंचाने का एक प्रयास भी था. विजय चिंतकायला ने इस मौके को राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प विरासत को सामने रखने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया.

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशभर के बुनकरों और कारीगरों के योगदान को याद किया था. उन्होंने कहा था कि हथकरघा क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है. इसी भावना के अनुरूप मंगलगिरी शॉल की भेंट को देखा जा रहा है.

पीढ़ियों से चली आ रही बुनाई की गौरवशाली परंपरा

मंगलगिरी हैंडलूम अपनी खास बुनाई, सादगी भरे डिजाइन और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाना जाता है. इसे जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी जीआई टैग भी प्राप्त है, जो इसकी खास पहचान को दर्शाता है. इस कला को जीवित रखने में कई पीढ़ियों से जुड़े बुनकर परिवारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उनकी मेहनत ने इस परंपरा को आज भी देश-विदेश में पहचान दिलाई है.

आंध्र प्रदेश सरकार भी स्थानीय हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है. मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में सरकार का जोर बुनकरों को आर्थिक सुरक्षा देने, उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उनकी कला को नई पहचान दिलाने पर है.

प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद विजय चिंतकायला ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मंगलगिरी शॉल भेंट करना राज्य के सभी बुनकरों के सम्मान का प्रतीक है. उन्होंने इसे उन कारीगरों को समर्पित बताया, जो अपनी मेहनत से भारत की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं.

कला को मिल रही नई दिशा

वहीं, मंगलगिरी से विधायक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नारा लोकेश भी क्षेत्र की हथकरघा परंपरा को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहे हैं. उनकी ओर से शुरू की गई ‘नेथान्नाकु सेवा’ योजना के तहत हथकरघा बुनकर परिवारों को हर साल 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. इसके अलावा बुनकरों के लिए विशेष स्कूल की पहल भी की गई है, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस पारंपरिक कला को सीख सकें और इसे आगे बढ़ा सकें.

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भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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